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जनसंघ सह-संस्थापक दीनदयाल उपाध्‍याय की हत्‍या का ‘सच’ सामने लाने को हो सकती है सीबीआई जांच

उत्तर प्रदेश के आंबेडकरनगर में एक भाजपा कार्यकर्ता के पत्र के जवाब में गृह मंत्रालय ने राज्य सरकार से इस मामले में रिपोर्ट मांगी थी।

दीनदयाल उपाध्याय का जन्म 25 सितंबर 1916 को उत्तर प्रदेश के मथुरा में हुआ था। (तस्वीर- बीजेपी डॉट ऑर्ग से साभार)

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के विचारक और भारतीय जनसंघ के सह-संस्थापक पंडित दीन दयाल उपाध्याय की हत्या के करीब पचास साल बाद सरकार इस मामले की जांच नए सिरे से सीबीआई से करा सकती है। दरअसल उत्तर प्रदेश के आंबेडकरनगर में एक भाजपा कार्यकर्ता के पत्र के जवाब में गृह मंत्रालय ने राज्य सरकार से इस मामले में रिपोर्ट मांगी थी। इसी पत्र के आधार पर इलाहाबाद के एसपी (एसपी) ने बुधवार (19 सितंबर, 2018) को अपनी रिपोर्ट डीआईजी (रेलवे) को भेज दी है। यह रिपोर्ट अगले एक-दो दिनों बाद संबंधित प्रशासन को भेजी जाएगी।

इस रिपोर्ट में बताया गया कि दीनदयाल उपाध्याय की हत्या से जुड़े दस्तावेज लापता हैं। इसमें एफआईआर की कॉपी, केस डायरी शामिल है। हालांकि थाने में मिले एक रजिस्टर के आधार पर पता चला है कि इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इनमें से एक शख्स को चार की सजा सुनाई गई। खबर है कि अधिकारी पचास साल पुराने मामले में अब ऐसे किसी पुलिसकर्मी की तलाश कर रहे हैं जो घटना के समय वहां तैनात रहा हो। वहीं गृह मंत्रालय ने जो रिपोर्ट मांगी है वह किसी मामले की सीबाआई जांच के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया है।

बता दें कि 6 नवंबर, 2017 को आंबेडकरनगर के पूर्व भाजपा मंडल मंत्री राकेश गुप्ता ने केंद्र सरकार को एक पत्र लिखा था। इसमें पटना जाते समय स्टेशन पर दीनदयाल की हत्या को साजिश बताते हुए सीबीआई जांच की मांग की गई थी। पत्र में हत्या के तार बंगाल, दिल्ली और बिहार से जुड़े होने का भी दावा पत्र में किया गया है।

केंद्र को लिखे पत्र में आगे लिखा गया कि घटना के बाद ना तो कानूनी कार्यवाही का पालन किया गया और ना ही शव का पोस्टमार्टम कराया गया। चूंकि मामला कई राज्यों से जुड़ा है, इसलिए बिना सीबीआई जांच के पूरा सच बाहर नहीं आ सकता है। इस पत्र के आधार पर गृह मंत्रालय ने यूपी सरकार से रिपोर्ट मांगी है।

मामले में वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है, ‘भाजपा पचास साल पुराने मामले की सीबीआई जांच कराना चाहती है, इसमें कोई बुराई नहीं है। हालांकि इसके साथ राफेद खरीद घोटाले की भी जांच करानी चाहिए, जिसमें जनता के करोड़ों रुपए की लूट हुई है।’

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