महाराष्ट्र के पालघर जिले से धर्मांतरण की कोशिश का एक मामला सामने आया है, जहां एक गांव में हैदराबाद से आई महिलाओं ने धर्म परिवर्तन का कथित प्रयास किया। पुलिस ने धर्मांतरण के प्रयास और धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप में 22 महिलाओं पर केस दर्ज कर लिया है। यह सभी महिलाएं धर्मांतरण की कोशिश में शामिल थीं।

पीटीआई की खबर के मुताबिक, यह घटना 21 अगस्त को पालघर के वाकडपाड़ा गांव की है जहां कथित रूप से हैदराबाद से आई महिलाओं ने हिंदू देवी-देवताओं को लेकर अपमानजनक बातें कहीं और धर्म परिवर्तन का प्रयास किया। इसकी शिकायत एक 18 साल के छात्र ने की है। मोखाडा थाने के सहायक पुलिस निरीक्षक (एपीआई) अजित साबले ने बताया कि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 299 (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के इरादे से जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कृत्य) और धारा 3(5) (साझा मंशा) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।

‘किताब पढ़ने से बीमारी दूर होगी’

अजित साबले के मुताबिक, “इस मामले में 22 महिलाओं को आरोपी बनाया गया है। इनमें दो मुख्य संदिग्धों की पहचान ठाणे जिले के उल्हासनगर निवासी सत्यवती बालकृष्ण कुंचे (46) और स्थानीय निवासी कुसुम शिवराम कांबडी के रूप में हुई है।” पुलिस अधिकारी ने बताया कि शुक्रवार दोपहर महिलाओं का एक समूह शिकायतकर्ता छात्र के घर पहुंचा जहां उनमें से कुंचे ने उसे ‘न्यू टेस्टामेंट’ सहित कुछ धार्मिक पुस्तकें मुफ्त में देने की पेशकश की और दावा किया कि इन पुस्तकों को पढ़ने से बीमारी ठीक हो जाएगी और वह बीमारियों से सुरक्षित रहेगा।

हिंदू देवी-देवताओं का किया अपमान

पुलिस अधिकारी ने बताया कि जब शिकायतकर्ता ने धार्मिक किताब को लेने से इनकार कर दिया तो उन महिलाओं ने कथित तौर पर हिंदू देवी-देवताओं और मान्यताओं के बारे में अपमानजनक बातें कीं। उन्होंने बताया कि उसने छात्र से देवी-देवताओं की पूजा बंद करने और ईसाई धर्म अपनाने के लिए कहा। शिकायतकर्ता द्वारा मिलिंद जोले सहित स्थानीय ग्रामीणों को जब इस बारे में पता चला तो उन्होंने महिलाओं के ग्रुप को रोक लिया। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि महिलाएं स्थानीय निवासी कुसुम कांबडी के संपर्क के जरिए हैदराबाद से आई थीं। इस मामले की विस्तृत जांच की जा रही है।

राज्य में आने वाला है नया कानून

महाराष्ट्र से धर्म परिवर्तन की कोशिश का यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब महाराष्ट्र सरकार द्वारा पारित नया धर्मांतरण विरोधी कानून ‘महाराष्ट्र धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम 2026’ राज्य में लागू होने जा रहा है। इस कानून के तहत बलपूर्वक, प्रलोभन या धोखाधड़ी से किए जाने वाले धर्म परिवर्तन को गैर-जमानती अपराध बनाया गया है।

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महाराष्ट्र में धर्म परिवर्तन रोकने वाला सख्त कानून (एंटी-कन्वर्जन लॉ) 28 अगस्त से लागू हो रहा है। इसका असर मुंबई मेट्रोपॉलिटन इलाके में ईसाई सभाओं में भी अब दिखने लगा है। वसई, विरार, मीरा-भायंदर और आस-पास के इलाकों में प्रार्थना सभाओं में स्थानीय पादरी लोगों को एक फॉर्म भरने को कह रहे है। हालांकि स्थानीय लोगों ने इससे पहले कभी ऐसा फार्म नहीं भरा था। यहां पढ़ें पूरी खबर…