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VIDEO: कैप्‍टन कालिया को मारने की बात कबूल चुका है यह पाकिस्‍तानी फौजी, फिर भी भारत सरकार नहीं करा पाई कोई एक्‍शन

सौरभ कालिया और उसके साथियों की लाशें 9 जून 1999 को भारत को सौंपी गई। पोस्‍टमॉर्टम रिपोर्ट के में उनके साथ बर्बरतापूर्ण व्‍यवहार की बात सामने आई थी।

Author नई दिल्‍ली | June 9, 2016 2:52 PM
(Source: Screenshot)

1999 में कारगिल युद्ध के दौरान घुसपैठ की पुष्टि करने वाले कैप्टन सौरभ कालिया की हत्या पाकिस्तानी सैनिकों ने की थी। इस बात का खुलासा उस जंग में लड़ने वाले पाकिस्तानी फौज के एक सिपाही गुले खानदान ने फौज के एक कार्यक्रम के दौरान किया था। इस खुलासे का वीडियो यू ट्यूब पर सामने आया था। खुलासे के बावजूद भारत सरकार इस मामले में किसी तरह की कार्रवाई नहीं करा पाई है जबकि कालिया के परिवार को 17 साल बाद भी इंसाफ का इंतजार है।

सौरभ कालिया और उसके साथियों की लाशें 9 जून 1999 को भारत को सौंपी गई। पोस्‍टमॉर्टम रिपोर्ट के में उनके साथ बर्बरतापूर्ण व्‍यवहार की बात सामने आई। सैनिकों को सिगरेट्स से जलाया गया, उनके कानों में गर्म सलाखें डाली गईं, आखें निकालने से पहले उनमें छेद किए गए, उनकी खोपड़ी में फ्रैक्‍चर पाया गया और उनके अंग व प्राइवेट पार्ट गोली मारने से पहले काट दिए गए थे।

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यू ट्यूब पर सामने आए वीडियो में पाकिस्तानी फौज का सिपाही गुले खानदान शेखी बघारते हुए अपनी और अपने साथियों के बहादुरी के किस्से बयां कर रहा है। वह कहता है, “वे (कैप्टन कालिया और उनके साथी) शिकार करने आए थे, खुद शिकार हो गए। मैं एलओसी के नजदीक एक पोस्ट पर तैनात था। हम लोगों ने देखा कि कैप्टन कालिया अपने साथियों के साथ रेकी के लिए सीमा पार कर रहा है। हमारे कमांडर ने कहा कि उन्हें नजदीक आने दो। वे नजदीक आए। हम लोग उन्हें पकड़ना चाहते थे। लेकिन हमें देखकर भागने की कोशिश करने लगे तो हमने उन पर फायर कर दिया।”

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गुले खानदान ने दावा किया है कि कैप्टन कालिया और उनके पांच साथियों को मारने के बाद पाकिस्तानी फौज ने भारतीय फौजियों से उनके शव ले जाने को कहा था। गुले खानदान के मुताबिक, “हमारे कहने के बावजूद भारतीय फौजियों ने कैप्टन कालिया का शव ले जाने से इनकार कर दिया। इसके बाद हमने दस्तूर के मुताबिक शवों को भारत को सौंप दिया।”

पाकिस्तान के पूर्व आंतरिक सुरक्षा मंत्री रहमान मलिक ने पिछले साल दिसंबर में अपने पद पर रहते हुए कैप्टन कालिया की शहादत के मुद्दे पर कहा था, “मैंने यह केस देखा नहीं है। यह मेरे ध्यान में लाया गया है। मैं उस बच्चे (कैप्टन कालिया) के पिता से मिलना चाहूंगा। एक सैनिक का पिता, मैं उनसे हाथ मिलाना चाहूंगा और फिर यह जानना चाहूंगा कि क्या हुआ था। जब बॉर्डर पर जंग लड़ी जाती है, तो हमें यह मालूम नहीं कि वह (कैप्टन कालिया) पाकिस्तानी गोली से मरा या फिर खराब मौसम से।”

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