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सुषमा स्वराज की मदद के बाद इलाज के लिए भारत पहुंचा पाकिस्तानी बच्चा, पिता बोले- बहुत किया हमारे लिए

पाकिस्तान के नागरिक केन सिड ने ट्विटर पर अपने बीमार बच्चे की तस्वीर साझा करते हुए कहा था, “मेरे बच्चा उचित इलाज नहीं मिलने से महरूम क्यों रहे? कोई जवाब है सर सरताज अजीज या मैडम सुषमा?”

Author नई दिल्ली। | June 13, 2017 14:38 pm
सुषमा स्वराज की मदद के बाद इलाज के लिए भारत पहुंचा पाकिस्तानी बच्चा। (ANI Photo)

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज लोगों की मदद करने के लिए जानी जाती हैं। हाल ही में उन्होंने एक पाकिस्तानी शख्स और उसके साढे तीन महीने की बीमार बेटे की मदद की। मजबूर पाकिस्तानी पिता ने सुषमा से मदद की गुहार लगाई थी। जिसके बाद फरियाद सुनते हुए विदेश मंत्री ने तुरंत उन्हें वीजा देने के लिए कहा था। मंगलवार को वह बच्चा इलाज के लिए भारत पहुंचा। बच्चे के पिता ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की प्रशंसा करते हुए कहा, “उन्होंने हमारी बहुत मदद की।”

बीते दिनों पाकिस्तान के इस शख्स ने सोशल मीडिया पर अपने नवजात बच्चे की बिगड़ती हालात का हवाला देकर मदद की गुहार लगाई थी। पाकिस्तान के नागरिक केन सिड ने ट्विटर पर अपने बीमार बच्चे की तस्वीर साझा करते हुए कहा था, “मेरे बच्चा उचित इलाज नहीं मिलने से महरूम क्यों रहे? कोई जवाब है सर सरताज अजीज या मैडम सुषमा?” इसके जवाब में सुषमा ने ट्वीट कर कहा, “नहीं। बच्चे को उचित इलाज मिलेगा। कृपया पाकिस्तान में भारतीय उच्चायोग से संपर्क करें। हम आपको मेडिकल वीजा देंगे।” केन सिड ने अपने ट्विटर प्रोफाइल में खुद को इंजीनियर बताया है जो लाहौर में फॉरमैन क्रिस्टिन कॉलेज में प्रोजेक्ट मैनेजर हैं।

पाकिस्तानी शख्स के बेटे रोहान के दिल में छेद है। एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक प्रख्यात बाल हृदय विशेषज्ञ डॉ आशुतोष मारवाह के साथ हार्ट सर्जन डॉ राजेश शर्मा बच्चे का इलाज कर रहे हैं। डॉ आशुतोष बच्चे की बीमारी और स्थिति के बारे में जांच करेंगे और डॉक्टर शर्मा उसका इलाज करेंगे। डॉक्टर मारवाह ने बताया, “”रोहान के दिल में एक छेद के साथ धमनियों में समस्या है, जिसे डी-ट्रांसस्पॉजेशन कहा जाता है। इस स्थिति में दिल और फेफड़े की नसें उल्टी दिशा से आती हैं और शरीर में ऑक्सीजन युक्त खून का प्रवाह नहीं होता है। इसके कारण बच्चे को पहली महीने में सांस लेने में तकलीफ होती है और तेज तेज सांस लेता है। यही नहीं बच्चे का वजन भी नहीं बढ़ता है और उसके जीवित रहने के चांस कम हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि सबसे जरुरी है कि इस बीमारी का सही समय पर इलाज होना। क्योंकि 8 महीने बाद यह बीमारी लाइलाज हो जाती है और मृत्यु की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।

 

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