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भारत के साथ बातचीत के लिए पाकिस्तान को आतंकवादियों पर करनी होगी कार्रवाई, दोनों देशों के बीच मध्यस्थता पर बोला व्हाइट हाउस

इसके साथ ही इसने इंगित किया कि दोनों देशों के बीच वार्ता तभी सफल होगी जब पाकिस्तान अपने देश में आतंकवादियों और चरमपंथियों पर कार्रवाई करे।

Author Edited By सिद्धार्थ राय नई दिल्ली | Published on: February 22, 2020 12:50 PM
डोनाल्ड ट्रम्प भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने को बढ़ावा दे रहे हैं। (file photo)

व्हाइट हाउस ने शुक्रवार को कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने को बढ़ावा दे रहे हैं। इसके साथ ही इसने इंगित किया कि दोनों देशों के बीच वार्ता तभी सफल होगी जब पाकिस्तान अपने देश में आतंकवादियों और चरमपंथियों पर कार्रवाई करे।

ट्रम्प की आगामी भारत यात्रा के दौरान कश्मीर मुद्दे पर फिर मध्यस्थता की पेशकश किए जाने पर एक सवाल के जवाब में एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि आप राष्ट्रपति से जो सुनेंगे वह भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने के लिए काफी प्रेरित करने वाला होगा, दोनों देशों को अपने मतभेदों को हल करने के लिए एक-दूसरे के साथ द्विपक्षीय वार्ता करने के वास्ते प्रेरित करने वाला होगा।’’ ट्रम्प और अमेरिका की प्रथम महिला मेलानिया ट्रम्प का 24 और 25 फरवरी को अहमदाबाद, आगरा तथा नयी दिल्ली जाने का कार्यक्रम है। उनके साथ 12 सदस्यीय अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल भी होगा।

अधिकारी ने कहा, ‘‘हमारा हमेशा से मानना है कि दोनों देशों (भारत और पाकिस्तान) के बीच किसी भी सफल बातचीत की नींव पाकिस्तान के अपने क्षेत्र में आतंकवादियों और चरमपंथियों पर कार्रवाई करने के प्रयासों पर आधारित है।’’ अधिकारी ने पत्रकारों को बताया, ‘‘लेकिन मुझे लगता है कि राष्ट्रपति दोनों देशों से नियंत्रण रेखा पर शांति एवं स्थिरता बनाए रखने तथा ऐसी कार्रवाइयों या बयानों से बचने का अनुरोध करेंगे जो क्षेत्र में तनाव बढ़ा सकते हैं।’’ अफगानिस्तान शांति प्रक्रिया पर एक सवाल के जवाब में अधिकारी ने कहा कि अमेरिका, भारत को प्रेरित करेगा कि वह इस शांति प्रक्रिया का समर्थन करने के लिए जो कर सकता है वह करे ताकि यह सफल हो।

अधिकारी ने कहा, ‘‘आप जानते हैं कि हम सैन्य भागीदारी खत्म कर सकते हैं। हम अपनी कूटनीतिक और आर्थिक भागीदारी जारी रखेंगे, जो वहां पिछले 19 वर्षों से है, लेकिन हम इस शांति प्रक्रिया का समर्थन करने के लिए निश्चित तौर पर भारत की ओर देखेंगे, जो क्षेत्र में महत्वपूर्ण देश है, क्षेत्र की स्थिरता के लिए अहम है। मुझे लगता है अगर यह मुद्दा उठता है तो यह राष्ट्रपति के अनुरोध पर ही होगा।’’

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