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NSA अजीत डोभाल ने बताया, आतंकवाद के मुद्दे पर गहरे दबाव में पाकिस्तान

अजीत डोभाल ने कहा, ‘‘ पाकिस्तान देश की नीति के एक साधन के तौर पर आतंकवाद का इस्तेमाल करता रहा है।’’ डोभाल ने पाकिस्तान की ओर इशारा करते हुए कहा कि आतंकवाद एक सस्ता विकल्प है जो दुश्मनों को काफी हद तक नुकसान पहुंचा सकता है।

Author Updated: October 14, 2019 12:50 PM
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने सोमवार को कहा कि वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफएटीएफ) का पाकिस्तान पर गहरा दबाव है। एफएटीएफ की बैठक अभी पेरिस में जारी है। आतंकवाद विरोधी दस्ते (एटीएस) के प्रमुखों की बैठक को संबोधित कर रहे डोभाल ने कहा कि पाकिस्तान पर सबसे अधिक दबाव एफएटीएफ के पदाधिकारी बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में कोई भी देश युद्ध करने की स्थिति में नहीं है क्योंकि इसमें जानमाल का बड़ा नुकसान होगा और किसी की जीत भी सुनिश्चित नहीं होगी।

उन्होंने कहा, ‘‘ पाकिस्तान देश की नीति के एक साधन के तौर पर आतंकवाद का इस्तेमाल करता रहा है।’’ डोभाल ने पाकिस्तान की ओर इशारा करते हुए कहा कि आतंकवाद एक सस्ता विकल्प है जो दुश्मनों को काफी हद तक नुकसान पहुंचा सकता है। एफएटीएफ एक अंतर-सरकारी निकाय है। अंतरराष्ट्रीय वित्त प्रणाली की अखंडता को धनशोधन, आतंकवाद के वित्तपोषण सहित पेश होने वाले अन्य संबंधित खतरों का मुकाबला करने के लिए 1989 में इसकी स्थापना की गई थी।

गृह मंत्री अमित शाह जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा हटाए जाने के बाद पाकिस्तान स्थित आतंकी समूहों से बढ़ते खतरे के बीच विभिन्न राज्यों के आतंकवाद रोधी दस्तों (एटीएस) के शीर्ष अधिकारियों को सोमवार को संबोधित करेंगे। इस सम्मेलन को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल भी संबोधित करेंगे। इसमें आतंकवाद के खिलाफ विस्तृत कार्य योजना बनाने और विभिन्न राज्यों की एटीएस के बीच सहयोग बढ़ाने पर बातचीत हो सकती है।

गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया, ‘‘गृह मंत्री उद्घाटन भाषण देंगे जिसमें वह आतंकवाद के बढ़ते खतरों को लेकर केंद्र सरकार की रूपरेखा को रेखांकित कर सकते हैं।’’ राज्यों की एटीएस के शीर्ष अधिकारी अपनी आतंकवाद रोधी रणनीतियों और इस तरह की आपात स्थितियों से निपटने की कार्य योजना पर प्रस्तुति देंगे।

जम्मू कश्मीर में पांच अगस्त को संविधान के अनुच्छेद 370 को हटाने की केंद्र सरकार की घोषणा के बाद से ही राज्य में जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिज्बुल मुजाहिदीन जैसे पाकिस्तान स्थित आतंकवादी समूहों की तरफ से हमले करने का खतरा बढ़ गया है। यह सम्मेलन राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) आयोजित कर रही है।

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