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हुर्रियत पर भारत-पाक में फिर तकरार

कश्मीर के अलगाववादी हुर्रियत नेताओं के पाकिस्तानी उच्चायुक्त अब्दुल बासित से मुलाकात को लेकर भारत और पाकिस्तान में फिर वाद-विवाद शुरू हो गया है। भारत ने हुर्रियत पर निशाना साधते हुए स्पष्ट किया है कि इसमें किसी तीसरे पक्ष के लिए कोई भूमिका नहीं है। जबकि पाक उच्चायुक्त का कहना है कि मुद्दाहीन बातों को […]

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कश्मीर के अलगाववादी हुर्रियत नेताओं के पाकिस्तानी उच्चायुक्त अब्दुल बासित से मुलाकात को लेकर भारत और पाकिस्तान में फिर वाद-विवाद शुरू हो गया है। भारत ने हुर्रियत पर निशाना साधते हुए स्पष्ट किया है कि इसमें किसी तीसरे पक्ष के लिए कोई भूमिका नहीं है। जबकि पाक उच्चायुक्त का कहना है कि मुद्दाहीन बातों को मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए। उधर बासित से अपनी बातचीत को उचित ठहराते हुए अलगाववादियों ने कहा कि वे कश्मीर के ‘जटिल’ मुद्दे के हल के लिए भारत और पाकिस्तान को मदद देने का प्रयास कर रहे हैं

कश्मीर के पृथकतावादी नेताओं, सैयद अली शाह गिलानी, मीरवाइज उमर फारूक और अन्य अलगाववादी नेताओं ने पाकिस्तान के उच्चायुक्त बासित से भेंट की, जिन्हें पाकिस्तान के राष्ट्रीय दिवस समारोह में आमंत्रित किया गया था। इस बारे में उच्चायुक्त ने दावा किया कि भारत इस तरह की भेंट के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा कि मुझे नहीं लगता कि भारत सरकार आपत्ति कर रही है। मैं मीडिया के अपने मित्रों को सुझाव देना चाहूंगा कि वे गैर-मुद्दे में से कोई मुद्दा नहीं बनाएं। मालूम हो कि पिछले साल पाकिस्तान के साथ तय विदेश सचिव स्तरीय वार्ता की पूर्व संध्या पर बासित की हुर्रियत नेताओं से भेंट करने के कारण भारत ने उसे रद्द कर दिया था।

पाकिस्तान के राष्ट्रीय दिवस पर हुर्रियत के नेताओं को आमंत्रित करने पर भारत को कोई आपत्ति नहीं होने संबंधी पाकिस्तान के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद अकबरुद्दीन ने कहा कि भारत सरकार अपने लिए ही बोलना पसंद करती है। कई बार यह दोहराया जा चुका है कि हुर्रियत की कथित भूमिका के बारे में भारत के रुख को लेकर गलतफहमी अथवा गलतबयानी की कोई गुंजाइश नहीं है। मैं फिर दोहराता हूं कि भारत पाकिस्तान के मसलों को हल करने के लिए केवल दो ही पक्ष हैं और इसमें किसी तीसरे पक्ष के लिए कोई जगह नहीं है। सभी लंबित मुद्दों पर आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता शिमला समझौते और लाहौर घोषणा के तहत शांतिपूर्ण द्विपक्षीय वार्ता है।


इससे पहले पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल बासित ने पाकिस्तान दिवस के मौके पर आयोजित समारोह से इतर कहा कि भारत कश्मीर के पृथकतावादियों को आमंत्रित करने के खिलाफ नहीं है। मुझे नहीं लगता कि भारत सरकार को आपत्ति है। बल्कि मैं मीडिया में अपने दोस्तों से कहना चाहूंगा कि वे ऐसी किसी बात को मुद्दा नहीं बनाएं जो मुद्दा ही नहीं है।

वहीं बासित से अपनी बातचीत को उचित ठहराते हुए कश्मीरी अलगाववादी नेताओं ने कहा कि वे कश्मीर के ‘जटिल’ मुद्दे के हल के लिए भारत और पाकिस्तान को मदद देने का प्रयास कर रहे हैं और इस मुद्दे के हल के लिए राजनीतिक दृष्टिकोण की जरूरत है। उन्होंने पाकिस्तान के राष्ट्रीय दिवस समारोह में शामिल होने के लिए उन्हें आमंत्रित किए जाने को भी तवज्जो नहीं दी।

मीरवाइज उमर फारूक ने कहा कि ‘जटिल’ कश्मीर मुद्दे के लिए ‘राजनीतिक दृष्टिकोण’ की जरूरत है। उन्होंने कहा, ‘हुरिर्यत का मुख्य एजंडा है कि संबंधित पक्षों भारत, पाकिस्तान और कश्मीरियों को समस्या के समाधान के लिए एक साथ आगे बढ़ना होगा। निर्दोष आम नागरिकों और सैन्यकर्मियों की मौत व अन्य नुकसान से बचने का यह एकमात्र तरीका है।’

उन्होंने कहा, ‘उन्हें (विभिन्न पक्षों को) समस्या का कोई समाधान खोजना होगा। हम सब यह तथ्य समझते हैं कि कोई सैन्य समाधान नहीं हो सकता और हिंसा के जरिए कोई हल नहीं निकल सकता। इसलिए, हम किस प्रकार आगे बढ़ें? हम हर किसी से बातचीत का प्रयास करते हैं।’ इसके साथ ही उन्होंने हैरानी जताई कि बासित के साथ उनकी मुलाकात को नकारात्मक रूप से क्यों पेश किया जा रहा है।

ऐसी ही भावना व्यक्त करते हुए जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) प्रमुख यासिन मलिक ने कहा कि वह 22 साल से ज्यादा समय से पाकिस्तान राष्ट्रीय दिवस समारोह में शामिल हो रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘मैं यहां सिर्फ कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आया हूं और इसी प्रकार कई अन्य लोग भी। भारतीय नेता, भारतीय पत्रकार वहां होंगे। यह ऐसा कार्यक्रम है जिसमें मैं पिछले 22 साल से शामिल हो रहा हूं।’

याद रहे कि अब्दुल गनी भट, मौलाना अब्बास अंसारी, बिलाल गनी लोन, आगा सैयद हसन, मुस्सदिक आदिल और मुख्तार अहमद वाजा के साथ मीरवाइज रविवार रात बासित के निवास पर वार्ता के लिए गए थे।

इससे एक पखवाड़े पहले बासित दिल्ली स्थित हुर्रियत नेता गिलानी के निवास पर उनसे मिलने गए थे और इस्लामाबाद में भारतीय विदेश सचिव एस. जयशंकर से अपनी मुलाकात और उनसे हुई चर्चा के संबंध में बताया था। पाकिस्तानी राजनयिक और कश्मीरी अलगाववादी हुर्रियत नेता हालांकि पिछले 30 साल से नियमित रूप से मिलते रहे हैं, लेकिन भारत को यह बात नागवार गुजरती है, जिसका कहना है कि जम्मू कश्मीर सहित भारत-पाक मुद्दों का समाधान दोनों देशों के नेतृत्व के बीच द्विपक्षीय रूप से ही किया जाना है।

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