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पाक के साथ बातचीत के लिए सरकार के पास कोई रूपरेखा नहीं: कांग्रेस

कांग्रेस ने आज आरोप लगाया कि पाकिस्तान के साथ बातचीत के लिए सरकार के पास ‘‘कोई रूपरेखा’’ नहीं है। इसके साथ ही पार्टी ने कहा कि वह ‘‘अकस्मात नीति संबंधी बयान’’ दे रही है। कांग्रेस ने इसी हफ्ते दिल्ली में होने वाली राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) स्तरीय वार्ता के आसपास विचार विमर्श के लिए हुर्रियत […]
Author August 19, 2015 17:34 pm

कांग्रेस ने आज आरोप लगाया कि पाकिस्तान के साथ बातचीत के लिए सरकार के पास ‘‘कोई रूपरेखा’’ नहीं है। इसके साथ ही पार्टी ने कहा कि वह ‘‘अकस्मात नीति संबंधी बयान’’ दे रही है।

कांग्रेस ने इसी हफ्ते दिल्ली में होने वाली राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) स्तरीय वार्ता के आसपास
विचार विमर्श के लिए हुर्रियत नेताओं को पाकिस्तानी उच्चायुक्त द्वारा आमंत्रित किए जाने को तवज्जो नहीं दिया। पार्टी ने कहा कि राज्य के लोगों ने अलगाववादियों को खारिज कर दिया है।

कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘कोई रोडमैप नहीं है। पाकिस्तान के साथ बातचीत को लेकर कोई दूरदृष्टि नहीं है। कई जटिल मुद्दे और चुनौतियां हैं। :पाकिस्तान से निपटने के संबंध में: अकस्मात नीतिगत बयान आते हैं…।’’
वह प्रस्तावित वार्ता के बारे में पूछे गए एक सवाल का जवाब दे रहे थे। पूर्व विदेश मंत्री और भाजपा नेता यशवंत सिन्हा ने भी वार्ता की आलोचना की है।

कश्मीरी अलगाववादियों को पाकिस्तानी उच्चायुक्त द्वारा दिए गए निमंत्रण पर शर्मा ने सवाल किया कि वार्ता किस बारे में हैं। उन्होंने कहा कि हमें अलगाववादियों को अनावश्यक महत्व नहीं देना चाहिए। वे देश की एकता और अखंडता तथा भारत के संविधान का सम्मान नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर में निर्वाचित सरकार है।

उन्होंने कहा, ‘‘ लोगों ने एक से अधिक बार विचार व्यक्त किए हैं (चुनावों के जरिए)। जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और इस मुद्दे पर बातचीत नहीं हो सकती।’’

शर्मा ने कहा कि सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही कह सकते हैं कि ऊफा में उन्हें अपने पाकिस्तानी समकक्ष से क्या आश्वासन मिला जिससे वह एनएसए स्तरीय वार्ता के लिए तैयार हुए।

कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, ‘‘पाकिस्तान इतना युद्ध उन्मादी है कि वह जम्मू कश्मीर के भारत के साथ एकीकरण पर सवाल कर रहा है तथा एनएसए स्तरीय वार्ता के ठीक पहले अब वे अलगाववादियों को आमंत्रित कर रहे हैं जो भारतीय संविधान में भरोसा नहीं करते।’’

उन्होंने सवाल किया, ‘‘क्या यह मोदी सरकार की पाकिस्तान के विषय में कश्मीर नीति है? आतंकवाद से निपटने के लिए मोदी सरकार की क्या नीति है?’’

शर्मा ने कहा कि राजनय और शासनकला ‘‘इवेंट मैनेजमेंट’’ कार्यक्रम और फोटो खिंचवाने के अवसर नहीं हैं। उन्होंने कहा कि उच्च्फा वार्ता के बाद नियंत्रण रेखा पर हमलों में वृद्धि हुयी है।

यह पूछे जाने पर कि क्या वार्ता होनी चाहिए, उन्होंने कहा कि दोनों देशों में रचनात्मक बातचीत की जरूरत है जो शांति और साझा खुशहाली के लिए सहायक होगी।

इसके साथ ही उन्होंने पाकिस्तान से अपनी धरती पर आतंकवादी संगठनों के ढांचे को नष्ट करने के लिए स्पष्ट आश्वासन मांगा। उन्होेंने कहा कि पाकिस्तान को स्पष्ट आश्वासन देना चाहिए कि 26..11 के मुंबई आतंकी हमले के साजिशकर्ताओं को न्याय की जद में लाया जाएगा।

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