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कारगिल: पलटन की इज्जत का सवाल है, मेरे लड़कों की लाशें दे दीजिए- पाकिस्तानी कमांडर ने ऐसे की थी भारतीय ब्रिगेडियर से मनुहार

रिटायर्ड ब्रिगेडियर एमपीएस बाजवा ने कहा कि उनके कमांडिंग अधिकारी ने कहा कि पाकिस्तान की तरफ से कोई रेडियो सेट पर बात करना चाहता है। दूसरी तरफ से फ्रंटियर फोर्स रेजीमेंट के ले. कर्नल मुस्तफा ने हमारे जवानों की बहादुरी की तारीफ करते हुए अपने जवानों के शव को सौंपने को कहा।

Author जालंधर | July 20, 2019 12:57 PM
रिटायर्ड ब्रिगेडियर एमपीएस बाजवा 192 माउंटेन ब्रिगेड के पूर्व कमांडर रह चुके हैं। (फोटोः इंडियन एक्सप्रेस)

करगिल युद्ध के दौरान पाकिस्तानी सेना इंफेंट्री बटालियन के कमांडिंग अधिकारी ने अपनी बटालियन की इज्जत का हवाला देते हुए अपने मारे गए जवानों के शव लौटाने का आग्रह किया था। यह बात करगिल युद्ध के दौरान 192 माउंटेन ब्रिगेड के कमांडर रहे रिटायर्ड ब्रिगेडियर एमपीएस बाजवा ने बताई।

माउंटेन ब्रिगेड ने टाइगर हिल पर फिर से कब्जा लिया था। बाजवा उस समय को याद करते हुए कहते हैं। फ्रंटियर फोर्स कमांडर की 19वीं बटालियन के ले. कर्नल मुस्तफा ने उनसे वायरलेस कम्यूनिकेशन पर बात कर अपने जवानों के शवों को लौटाने का आग्रह किया था।

इसके बाद पाकिस्तानी जवानों के शवों को पूरे सैन्य सम्मान के साथ सौंपा गया। इस पूरे घटना की वीडियोग्राफी भी की गई। इससे यह बात साबित करने में मदद मिली कि पाकिस्तानी सेना नियमित रूप से नियंत्रण रेखा पार कर घुसपैठ करती रहती है। इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में बाजवा ने बताया, ’27-28 जुलाई 1999 को पाकिस्तान सैन्य बटालियन के कमांडर ने 3/3 गोरखा राइफल के सीओ से बातचीत की थी।

मेरे कमांडिंग अधिकारी ने मुझसे कहा कि पाकिस्तान की तरफ से कोई रेडियो सेट पर मुझसे बात करना चाहता है।’ ब्रिगेडियर बाजवा ने बताया कि पाकिस्तानी अधिकारी ने कहा, ‘हेलो सर, मैं फ्रंटियर फोर्स रेजीमेंट कमांडर से लें. कर्नल मुस्तफा बोल रहा हूं।’ पाकिस्तानी कमांडर ने मुझसे कहा कि बंटवारे से पहले फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ भी फ्रंटियर फोर्स से जुड़े थे।

बाजवा ने कहा, उस पाकिस्तानी अधिकारी ने कहा, ‘आपके लड़कों ने बहुत अच्छी तरह से जंग लड़ी। मेरे लड़के मारे गएं और आप जानते हैं कि यह बटालियन की ‘इज्जत’ का सवाल है। मेरा आग्रह है कि आप शवों को मुझे सौंप दें जिससे कि मैं उनकों दफना सकूं। यह पलटन की इज्जत के लिए है।’

बाजवा ने कहा, ‘मुस्तफा यदि मैं जवानों के शव सौंप दूं तो तुम मेरे लिए क्या करोगे?’ उसने कहा कि वह पाकिस्तान की तरफ वापस लौट (उसका मतलब बटालियन के लौटने से था) जाएगा-अगली लड़ाई नहीं होगी। ब्रिगेडियर बाजवा ने कहा कि वे अभी भी संतुष्ट नहीं थे और उन्होंने ले. कर्नल मुस्तफा से पूछा कि कैसे उनकी बात पर भरोसा किया जा सकता है।

उसने कहा, ‘मैं पठान हूं, मैंने कहा कि मैं भी सरदार हूं और जो वादा किया है उसे पूरा करूंगा।’ उन्होंने कहा, ‘मैंने मुस्तफा से कहा कि उन्हें अपने सैनिकों को सफेद झंडा और स्ट्रेचर लेकर भेजना चाहिए। उन्होंने इन निर्देशों का पालन किया और शवों को सौंपने की वीडियोग्राफी की गई। इस वीडियो से यह साबित करने में मदद मिली की पाकिस्तान सेना नियमित रूप से लड़ रही थी।’

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