पहलगाम आतंकी हमले को 22 अप्रैल को एक साल पूरा होने जा रहा है, लेकिन लेफ्टिनेंट विनय नरवाल का परिवार अभी भी उस गम से बाहर नहीं निकल पाया है। आज भी बेटे का जाना परिवार को अंदर तक तोड़ देता है। इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए लेफ्टिनेंट विनय नरवाल के पिता कहते हैं, “ऐसा लगता है कि मैं आज भी उस घटना को रोज अपनी आंखों के सामने जी रहा हूं।”

लेफ्टिनेंट विनय नरवाल ने आतंकी हमले से कुछ ही दिन पहले हिमांशी से शादी की थी। उस दिन को याद करते हुए उनके पिता कहते हैं, “मेरे बच्चे के लिए जिंदगी का जो नया सफर शुरू होना चाहिए था, वह अब हर दिन का दर्द बन चुका है।” पहलगाम हमले के बाद सोशल मीडिया पर हिमांशी की एक तस्वीर भी काफी वायरल हुई थी, जिसमें वह पति के पार्थिव शरीर के पास बैठी नजर आ रही थीं। उस तस्वीर ने हर किसी को भावुक कर दिया था। इस आतंकी हमले में 25 पर्यटकों और एक स्थानीय व्यक्ति की मौत हुई थी।

विनय नरवाल के पिता हुए भावुक

विनय नरवाल के पिता बताते हैं कि जीवन के 53 साल तो आसानी से गुजर गए, लेकिन इस आतंकी हमले के बाद से हर दिन भारी लगने लगा है। वह कहते हैं, “लोग कहते हैं कि समय हर घाव भर देता है, लेकिन एक पिता से पूछिए यह बढ़ता समय केवल दर्द को और गहरा करता है। हर दिन पिछले दिन से ज्यादा भारी लगता है। आप ऐसे आगे नहीं बढ़ते, बल्कि बस खुद को संभालना सीख जाते हैं।”

हिमांशी इस समय गुरुग्राम में काम कर रही हैं, जहां वह हमले से पहले भी कार्यरत थीं। उनके बारे में विनय नरवाल के पिता कहते हैं, “वह भी हमारी बच्ची है। हम उसके संपर्क में हैं, लेकिन यह जरूरी है कि वह व्यस्त रहे। काम में लगी रहेगी तो शायद किसी तरह जिंदगी आगे बढ़ पाएगी।” वहीं, विनय की छोटी बहन इस समय पीएचडी की पढ़ाई कर रही हैं और सिविल सर्विसेज की तैयारी में भी जुटी हुई हैं।

नरवाल के परिवार के साथ खड़ा देश

विनय नरवाल के पिता इस बात पर भी तसल्ली जताते हैं कि कई स्थानीय नेता, चाहे वे किसी भी राजनीतिक दल से हों, अब भी उनके संपर्क में रहते हैं और उनसे मिलते रहते हैं। सरकार भी उनके प्रति संवेदनशील रही है। वह कहते हैं, “विनय को पूरे देश से समर्थन मिला है। उसके दोस्त आज भी आते हैं। ऐसा लगता है कि पूरा देश हमारे साथ खड़ा है। पिछले रक्षाबंधन पर भी देश के अलग-अलग हिस्सों से उसके दोस्त आए थे, एक तो अंडमान-निकोबार से आया था। वे पूछते रहते हैं कि हमें किसी मदद की जरूरत तो नहीं। इससे लगता है कि विनय आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है।”

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