Pahalgam Attack News: 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में आतंकी हमला हुआ था। इसकी पहली बरसी से कुछ दिन पहले भारतीय वायु सेना के कॉर्पोरल तागे हैल्यांग का परिवार उनके स्मारक को अंतिम रूप देने में लगा हुआ है। इसका उद्घाटन वे उसी तारीख को करने की योजना बना रहे हैं।
उनके बड़े भाई तागे ताका ने इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए बताया, “हम उनकी स्मृति को जिंदा रखना चाहते हैं और दुनिया को यह पता चलना चाहिए कि तागे हैल्यांग जैसा एक व्यक्ति था जिसने इस तरह अपनी जान गंवाई। हम चाहते हैं कि लोगों को पता चले कि उनकी मृत्यु क्यों हुई, इसलिए हमने एक लेख तैयार किया है जो स्मारक का हिस्सा होगा।”
अरुणाचल प्रदेश के निचले सुबनसिरी जिले में उनके गांव ताजांग के पास स्थित इस स्मारक का मुख्य आकर्षण तागे हैलियांग की कांस्य प्रतिमा है। उनकी मृत्यु के समय उम्र 30 साल थी।
2017 में भारतीय वायु सेना में शामिल हुए थे तागे हैल्यांग
वह भारतीय वायु सेना के श्रीनगर स्थित बेस में कॉर्पोरल थे और 2017 में सेना में भर्ती हुए थे। हमले से ठीक चार महीने पहले ही उनकी शादी चारो कामहुआ से हुई थी और उनका तबादला असम में हुआ था। डिब्रूगढ़ स्थित वायु सेना बेस में ड्यूटी पर आने से पहले वह अपनी पत्नी के साथ दक्षिण कश्मीर के पहलगाम में छुट्टियां मना रहे थे, तभी आतंकवादियों ने पर्यटकों पर गोलियां चला दीं। 22 अप्रैल 2025 को हुए इस हमले में 25 पर्यटकों और एक स्थानीय व्यक्ति समेत 26 लोग मारे गए।
तागे ताका ने कहा कि शोकग्रस्त चारो कामहुआ अब चांगलांग जिले के बोरदुमसा में अपने पैतृक घर में रहती हैं और समय के साथ, उनके परिवार का उनसे संपर्क लगभग खत्म हो गया है। तागे हैल्यांग अपने कई भाई-बहनों में से एक थे। उनके बारे में तागे ताका का कहना है कि वे अब अपने शोक संतप्त बुजुर्ग माता-पिता को इस क्षति से उबरने में मदद करने की कोशिश में लगे हुए हैं।
हमारी मां को इस हालत में देखना मुश्किल- तागे ताका
तागे ताका ने कहा, “हमें उनकी चिंता है। मैं भी एक अभिभावक हूं, मैं समझता हूं कि उन्होंने किस तरह का दर्द सहा है। हमारे पिता अभी भी इसे सहन कर पा रहे हैं, हालांकि उनके भीतर का दुख हमें अभी भी दिखाई देता है, लेकिन हमारी मां को इस हालत में देखना बहुत मुश्किल है। भले ही एक साल बीतने वाला है, लेकिन उनके घाव अभी भी ताजा लगते हैं।”
उनका एक और भाई तागे माली भी स्मारक समारोह की तैयारी में परिवार की मदद करने के लिए अब शहर वापस आ गया है। तागे माली ने कहा, “हम अपने माता-पिता को कुछ हिम्मत देने की कोशिश कर रहे हैं ताकि वे जो कुछ हुआ उसे एक बड़ी त्रासदी के रूप में देखें, लेकिन साथ ही साथ उस व्यक्ति का सम्मान करने पर ध्यान केंद्रित करें जो वह थे।”
पहलगाम हमले के एक साल बाद भी जख्म ताजा
कश्मीर के पहलगाम में पर्यटकों पर हुए आतंकी हमले को एक वर्ष होने को है, लेकिन पीड़ित परिवारों के जख्म अभी भी ताजा हैं और इंसाफ के सवाल कायम हैं। कई पीड़ितों को न्याय नहीं मिला है, तो कई की आंखों में आज भी उस मंजर का डर कायम है। कश्मीर के पहलगाम में पिछले साल 22 अप्रैल को लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादियों द्वारा किए गए हमले की पहली बरसी के मद्देनजर घाटी के पर्यटक स्थलों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। इस हमले में लश्कर के आतंकियों ने 26 लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी थी। पढ़ें पूरी खबर…
