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पद्मावती विवाद: नेताओं की बयानबाजी के बीच फिल्‍म की रिलीज टलने के आसार

Padmavati Movie Controversy, Film Protest: राजपूत समुदाय का कहना है कि फिल्म में इतिहास के साथ छेड़छाड़ किया गया है।
‘पद्मावती’ के खिलाफ मुंबई में प्रदर्शन करते राजपूत समाज के लोग। (Photo: PTI)

संजय लीला भंसाली की फिल्‍म ‘पद्मावती’ को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘पद्मावती’ फिल्म को लेकर चल रहे विवाद पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि उप्र सरकार ने इस मामले को लेकर अपना पक्ष सेंसर बोर्ड और केंद्र के सामने रख दिया है। नगर निकाय चुनाव के प्रचार के लिए गोरखपुर पहुंचे योगी ने मंगलवार को यह कहा। उन्होंने कहा कि दीपिका पादुकोण और संजय लीला भंसाली का सिर काटने वाला बयान देने वाले दोषी हैं। वहीं, हरियाणा में बीजेपी के मीडिया को-आर्डिनेटर सूरज पाल अमू के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। अमू ने दीपिका पादुकोण और भंसाली का सिर काटने वाले को 10 करोड़ रुपये इनाम का ऐलान किया था। इसक बावजूद बीजेपी नेता के तेवर नरम नहीं हैं। अमू ने कहा है कि ‘हिन्‍दुस्‍तान के सारे सिनेमा हॉल्‍स में स्‍वच्‍छता अभियान चलाएंगे। एक-एक स्‍क्रीन को आग लगाने की ताकत रखता है क्षत्रिय समाज और इस देश का नौजवान।’

जम्मू एवं कश्मीर में नेशनल कांफ्रेंस के वरिष्ठ नेता और विधायक देवेंद्र राणा ने मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती से राज्य में ‘पद्मावती’ की रिलीज पर प्रतिबंध लगाने का अनुरोध किया है। नेशनल कांफ्रेंस (एनसी) के विधायक देवेंद्र राणा ने जम्मू एवं कश्मीर में मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती से राज्य में पद्मावती की रिलीज पर प्रतिबंध लगाने का अनुरोध किया है। महबूबा को लिखे एक पत्र में राणा ने कहा, “संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती की रिलीज एक विशेष जाति और धर्म की भावनाओं को आहत करती है और जम्मू क्षेत्र में शांति को बाधित करने की क्षमता रखती है।”

राजपूत समुदाय का कहना है कि फिल्म में इतिहास के साथ छेड़छाड़ किया गया है। जबकि भंसाली लगातार इस आरोप को खारिज कर रहे हैं। निर्माताओं द्वारा ‘पद्मावती’ की रिलीज स्थगित किए जाने के बाद सोमवार को तीन मुख्यमंत्री इस विवाद में कूद पड़े। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्य में फिल्म की रिलीज पर प्रतिबंध लगा दिया, जबकि पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने राजपूत समुदाय की आपत्तियों का समर्थन किया। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस विवाद को ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ करार दिया और इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को धवस्त करने की एक ‘सोची समझी योजना’ बताया।

यहां पढ़ें Padmavati Movie Controversy  Updates:

– अभिनेत्री दीपिका पादुकोण के माता-पिता के बेंगलुरु स्थित घर के बाहर पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। जे.सी. नगर पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर गिरीश नाइक ने यहां आईएएनएस को बताया, “जे.सी. नगर (उत्तरी उपनगर) में दीपिका के माता-पिता के घर के बाहर दो पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है।” दीपिका (31) भले ही मुंबई में रहती हैं, लेकिन मूल रूप से वह बेंगलुरु की रहने वाली हैं। बेंगलुरु में उनके पिता दिग्गज बैंडमिंटन खिलाड़ी प्रकाश पादुकोण, मां उज्जवला, छोटी बहन अनीशा और दादी अहिल्या रहती हैं।

– रामपुर में चुनावी सभा के दौरान समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान ने ‘पद्मावती’ विवाद पर तंज कसते हुए कहा कि “यह कैसी राजगिरी है, एक फिल्म में डांस करने वाली ‘नचनिया’ से डर गए। बड़ी-बड़ी पगड़ियां लगाकर फिल्मों का विरोध कर रहे हैं। फिल्मों की मुखालिफत नहीं की जाती है, मजे लिए जाते हैं। आजम खान ने ये भी कहा कि आज जो लोग इसका विरोध कर रहे हैं जो वो कल तक अंग्रेजों के बस्ते उठाया करते थे। अंग्रेजों के सम्मान में झुककर 40 सलाम करते थे।”

– दीपिका-भंसाली को धमकी देने वाले बीजेपी नेता सूरज पाल अमू ने कहा है कि ‘हिन्‍दुस्‍तान के सारे सिनेमा हॉल्‍स में स्‍वच्‍छता अभियान चलाएंगे। एक-एक स्‍क्रीन को आग लगाने की ताकत रखता है क्षत्रिय समाज और इस देश का नौजवान।’

– पूरे विवाद पर उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने कहा कि ‘हमने इस मामले पर अपना स्‍टैंड साफ कर दिया है। लिखित में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को लिखा है। सुप्रीम कोर्ट ने भी साफ किया है कि सीबीएफसी को फैसला लेना है।’

– बेंगलुरु स्थित दीपिका पादुकोण के घर की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। वहीं तमिल फिल्म अभिनेता कमल हासन ने दीपिका पादुकोण का समर्थन किया है। हासन ने ट्वीट किया, “मुझे चाहिए कि दीपिका का सिर..सुरक्षित रहे। उनके शरीर से अधिक इसका सम्मान किया जाए। इससे भी ज्यादा उनकी स्वतंत्रता का सम्मान किया जाए। कई समुदायों ने मेरी फिल्मों का विरोध किया है। किसी भी बहस में अतिवाद निंदनीय है।” उन्होंने कहा, “जागो उत्सवधर्मी भारत। सोचने का समय है। हमने बहुत कुछ कहा, भारत मां की सुनो।”

– इस विवाद में तीनों मुख्यमंत्री ऐसे समय में कूदे हैं, जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे फिल्म की रिलीज के मद्देनजर कानून-व्यवस्था की गंभीर समस्या उत्पन्न होने की चिंता पहले ही जाहिर कर चुके हैं। चौहान ने भोपाल में राजपूत प्रतिनिधियों के साथ एक बैठक के बाद घोषणा की कि फिल्म को उनके राज्य में रिलीज करने की इजाजत नहीं दी जाएगी।

– शिवराज ने कहा, “फिल्म में ऐतिहासिक तथ्यों से खिलवाड़ कर अगर राष्ट्रमाता पद्मावती जी के सम्मान के खिलाफ जो दृश्य दिखाए जाने की बात कही गई है तो मध्य प्रदेश की धरती पर फिल्म का प्रदर्शन नहीं होने दिया जाएगा।” भाजपा नेता ने कहा, “मैं ऐसा इसलिए कह रहा हूं, क्योंकि देश की जनता और मध्य प्रदेश के लोग अपने अभिमान का अपमान स्वीकार नहीं कर सकते।” चौहान ने कहा कि यह अपमान असहनीय है। उन्होंने कहा कि अगर सेंसर बोर्ड फिल्म को पास कर देता है और देश में फिल्म रिलीज भी हो जाती है तो भी राज्य में इस फिल्म को प्रदर्शित नहीं होने दिया जाएगा।

– अमरिंदर ने अपनी टिप्पणी में कहा, “कुछ भी ऐतिहासिक है तो ..कोई भी विरोध नहीं करेगा, लेकिन यहां वे ऐतिहासिक तथ्यों से छेड़छाड़ कर रहे हैं।” उन्होंने कहा, “मैं चित्तौड़ जाकर वापस आया हूं और मैंने वहां सारी चीजें देखीं..तो यह इतिहास के साथ छेड़छाड़ है और कोई इसे स्वीकार नहीं करेगा।” सिंह ने कहा, “और अगर समुदाय इसका विरोध कर रहे है तो विरोध करना उनका अधिकार है।”

– उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने रविवार को कहा था कि जब तक फिल्म से विवादित दृश्य नहीं हटाए जाते, तब तक इसे राज्य में रिलीज नहीं होने दिया जाएगा। यहां तक कि राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने शनिवार को सूचना एवं प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी को पत्र लिखकर यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि ‘पद्मावती’ आवश्यक परिवर्तन किए बिना रिलीज न हो।

– ममता बनर्जी ने इस विवाद की निंदा की है और इसे ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ करार देते हुए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को धवस्त करने की एक ‘सोची समझी योजना’ बताया है। बनर्जी ने ट्वीट किया, “पद्मावती विवाद न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि एक राजनीतिक दल द्वारा हमारी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को धवस्त करने की सोची समझी योजना भी है। हम इस सुपर आपातकाल की निंदा करते हैं।”

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