कर्नाटक के दक्षिणी कन्नड़ जिले में पद्म श्री विजेता हरेकला हजब्बा को सोमवार को वोटर लिस्ट सुधार अभियान स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के तहत एक नोटिस मिला। नोटिस के मद्देनजर हरेकला हजब्बा को 11 सितंबर तक जरूरी दस्तावेज जमा करने का समय दिया गया है।
हरेकला हजब्बा को 8 नवंबर 2021 में सस्ती शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए पद्म श्री से सम्मानित किया गया था। यह पुरस्कार तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथों मिला था।
2002 के वोटर लिस्ट में नाम था सिर्फ हजब्बा
सूत्रों के अनुसार, साल 2002 में वोटर लिस्ट में बदलाव के दौरान उनका नाम ‘हजब्बा’ के तौर पर दर्ज किया गया था। हालांकि, उनके मौजूदा दस्तावेजों जैसे राशन कार्ड, आधार, पासपोर्ट और वोटर आईडी में उनका नाम ‘हरेकला हजब्बा’ है।
चुनाव आयोग ने यह नोटिस यह पता करने के लिए भेजा कि क्या यह वही मतदाता है। बूथ-लेवल ऑफिसर (आंगनवाड़ी कार्यकर्ता) के जरिए हजब्बा को यह नोटिस भेजा गया है। सूत्रों ने यह भी बताया कि नोटिस में हजब्बा से 11 सितंबर को वेरिफिकेशन के लिए दस्तावेज जमा करने को कहा गया है।
हरेकला खुद पढ़ नहीं सके थे
हरेकला हजब्बा खुद नहीं पढ़ सके और न ही कभी स्कूल नहीं गए, लेकिन 150 रुपये प्रतिदिन की कमाई से उन्होंने स्कूल बनवाए। वे मंगलुरु शहर में संतरे बेचते थे, अपने कमाए गए पैसों से साल 2000 में अपने पैतृक गाँव न्यूपाडापु में एक प्राइमरी स्कूल बनवाया था।
प्रदेश में 43.81 लाख वोटरों को मिलेगा नोटिस
हरेकला हजब्बा उन 43.81 लाख वोटरों में शामिल हैं, जिन्हें 27 अक्टूबर को फाइनल वोटर लिस्ट जारी होने से पहले 24 अगस्त से 22 अक्टूबर के बीच “दावों और आपत्तियों के निपटारे के चरण” के दौरान नोटिस मिलेंगे।
राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी के अनुसार, मतदाताओं को 7.31 लाख नोटिस भेजे गए। 206 मामलों में सुनवाई पूरी हो चुकी है और आने वाले दिनों में इनकी संख्या बढ़ने की उम्मीद है।
कर्नाटक में SIR की शुरुआत 30 जून को हुई थी। घर-घर जाकर जानकारी जुटाने के चरण को दो बार बढ़ाया गया- पहले 29 जुलाई से 8 अगस्त तक और फिर 17 अगस्त तक।
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लगभग तीस सालों तक एक ठग सैम पीटर, राहुल पीटर, डैनी थरक्कन, राजेश रॉबिन्सन, एंथनी फ्रांसिस के नाम से जाना जाता था। पुलिस का कहना है कि उसने सालों में और भी कई नाम इस्तेमाल किए होंगे लेकिन हम अब तक सिर्फ़ इन पांच के बारे में ही जानते हैं। उसने अपनी लोकेशन बदली और कभी-कभी वह एजेंसी भी बदल दी जिसका वह प्रतिनिधित्व करने का दावा करता था। कभी वह नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) का अधिकारी होता था, तो कभी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) का आदमी। वह अपनी पहचान से मेल खाने के लिए नकली पासपोर्ट, आधार और पैन कार्ड रखता था। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
