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बच्‍चा ना होने पर सुनती थीं ताने, 107 साल की ‘वृक्ष माता’ ने लगाए सैकड़ो पेड़, मिला पद्मश्री

थिमक्का के गोद लिए बेटे उमेश कहते हैं, 'वह सरकार के रवैए से खासी नाराज है और पिछले करीब एक साल से पेंशन भी नहीं ले रही हैं।'

Author Published on: January 27, 2019 3:07 PM
थिमक्का कहती हैं, ‘उनका घर स्मृति चिन्हों और अन्य चीजों से भरा पड़ा।’ पद्म पुरस्कार के लिए चुने जाने पर एक खबरिया चैनल ने शनिवार को उनसे बात की तो बताया, ‘मैं स्मृति चिन्ह नहीं खा सकती।’ (photo source- thimmakkafoundation)

लोक गायिका तीजन बाई, क्रिकेटर गौतम गंभीर और अभिनेता मनोज वाजपेयी समेत विभिन्न क्षेत्रों के 112 लोगों को पद्म पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। पद्म पुरस्कार से सम्मानित होनी वाली मशूर हस्तियों में एक नाम 107 साल की पर्यावरणविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सालूमरदा थिमक्का का भी है। थिमक्का कहती हैं कि सरकार द्वारा खुद के पद्म पुरस्कार के लिए चुने जाने पर वो बहुत खुश हैं। हालांकि राज्य सरकार द्वारा उनके योगदान को महत्व नहीं दिए जाने से वो निराश भी है। मगर कर्नाटक सरकार उन्हें कई बार विभिन्न पुरस्कारों सम्मानित कर चुकी है। उनके नाम पर पर्यावरण से जुड़ी योजना का नाम रखा जा चुका है। मगर थिमक्का को सरकार से वृद्धावस्था पेंशन के रूप में महज 500 रुपए हर महीने दिए जाते हैं। खबर है कि पूर्व में सरकार ने उन्हें दो करोड़ रुपए नकद और जिंदगी गुजारने के लिए जमीन देने का आश्वासन दिया, हालांकि अभी तक सरकार की तरफ से ऐसा नहीं किया गया।

थिमक्का के गोद लिए बेटे उमेश कहते हैं, ‘वह सरकार के रवैए से खासी नाराज है और पिछले करीब एक साल से पेंशन भी नहीं ले रही हैं।’ वो निजी संगठनों से मिलने वाले नकद पुरस्कारों से किसी तरह जिंदगी बसर कर रह हैं। पर्यावरण संरक्षण प्रयासों के बावजूद उनके पास अच्छी जिंदगी का अभाव है। थिमक्का ने अफसोस जताता कि उनकी दलीलें सत्ता के गलियारे में बैठे बहरे कानों तक नहीं पहुंच सकी। थिमक्का कहती हैं, ‘उनका घर स्मृति चिन्हों और अन्य चीजों से भरा पड़ा।’ पद्म पुरस्कार के लिए चुने जाने पर एक खबरिया चैनल ने शनिवार को उनसे बात की तो बताया, ‘मैं स्मृति चिन्ह नहीं खा सकती।’ अब मामले में संज्ञान में आने पर कर्नाटक के समाज कल्याण मंत्री प्रियांक खड़गे ने कहा कि वह मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी के समक्ष इस मुद्दे को उठाएंगे। उन्होंने कहा, ‘हम पद्म श्री पुरस्कार विजेता की आजीविका को बेहतर बनाने के लिए किन सुविधाओं को बढ़ाया जा सकता है, कोशिश करेंगे।’

गौरतलब है कि विवाह के सालों बाद भी कोई संतान ना होने पर थिमक्का को लोगों के खूब ताने सुनने पड़े। बाद में उन्होंने पति चिक्काईया के संग पेड़ लगाने शुरू किए। साल 1991 में पति की मौत तक उन्होंने सैकड़ों बरगद के पड़े लगाए। आज उनके लगाए बरगद के पेड़ों की संख्या 385 के भी पार है। बता दें कि थिमक्का को वैश्विक ख्याति हासिल है। साल 2016 में बीबीसी उन्हें दुनिया की प्रभावशाली और प्रेरणादायक महिलाओं में शुमार किया था।

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