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BHU में संस्कृत प्रोफेसर फिरोज खान को झेलना पड़ा था भारी विरोध, उनके पिता को भी पद्म श्री सम्मान

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने ट्वीट कर बताया कि भजन गायक मुन्ना मास्टर को पद्म श्री सम्मान के लिए चुना गया है। राजस्थान के जयपुर निवासी मुन्ना मास्टर राम-कृष्ण भक्ति गीत गाने के लिए खासी मशहूर है।

मुन्ना मास्टर राम-कृष्ण भक्ति गीत गाने के लिए खासी मशहूर हैं। (https://twitter.com/PIBHomeAffairs)

पिछले दिनों बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) में संस्कृत विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर बहाल मुस्लिम प्रोफेसर फिरोज खान के पिता मुन्ना मास्टर को ‘पद्म श्री’ सम्मान को देने का ऐलान किया किया है। फिरोज खान की नियुक्ति पर बीएचयू के संस्कृत विभाग के छात्रों ने आपत्ति जताई थी और उनके नियुक्ति का विरोध किया था। जिसके बाद उन्होंने वापस जयपुर लौटने का फैसला किया था। हालांकि बीएचयू प्रशासन ने उनकी नियुक्ती को वैध ठहराया था।

अब उनके पिता को पद्मीश्री देने का ऐलान किया गया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने ट्वीट कर बताया कि भजन गायक मुन्ना मास्टर को पद्म श्री सम्मान के लिए चुना गया है। राजस्थान के जयपुर निवासी मुन्ना मास्टर राम-कृष्ण भक्ति गीत गाने के लिए जाने जाते हैं। उनकी किताब ‘श्री श्याम सुरुभि वंदना’ क्षेत्र में खासी मशहूर है। 61 साल के मुन्ना मास्टर जयपुर के बगरू के रहने वाले हैं।

मुन्ना मास्टर के अलावा चंडीगढ़ स्थित पीजीआई अस्पताल के बाहर मरीजों एवं उनके साथ आए लोगों को नि:शुल्क भोजन कराने वाले जगदीश लाल आहूजा, 25,000 से अधिक लावारिस शवों का अंतिम संस्कार करने वाले फैजावाद के मोहम्मद शरीफ और असम में हाथियों के चिकित्सक कुशल कंवर सरमा उन गुमनाम नायकों में शामिल हैं जिन्हें इस साल पद्म श्री से सम्मानित किया गया है।

बता दें कि गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर सरकार ने पद्म पुरस्कारों का ऐलान किया, जिसमें पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली, पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और पूर्व रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस समेत 7 हस्तियों को पद्म विभूषण से सम्मानित करने का ऐलान किया गया। इसके अलावा मनोहर पर्रिकर और पीवी सिंधु समेत 16 हस्तियों को पद्म भूषण से नवाजा जाएगा। इसके अलावा 118 हस्तियों को पद्म श्री देने का ऐलान किया गया है।

अधिकारियों ने बताया कि गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर पुरस्कार विजेताओं की घोषणा की गई जिनमें जम्मू-कश्मीर के दिव्यांग सामाजिक कार्यकर्ता जावेद अहमद टक भी शामिल हैं जो दो दशक से दिव्यांग बच्चों के लिए काम कर रहे हैं, अनंतनाग एवं पुलवामा के 40 गांवों में 100 से अधिक बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा एवं अन्य सहायता मुहैया करा रहे हैं। उन्होंने बताया कि औपचारिक शिक्षा नहीं लेने के बावजूद पौधों की विविध किस्मों के विशाल ज्ञान के कारण ‘वन की विश्वकोष’ उपाधि से जानी जाने वाली कर्नाटक की 72 वर्षीय तुलसी गौडा को भी इस पुरस्कार से नवाजा गया है।

अधिकारियों ने बताया कि पिछले चार दशकों से पूर्वोत्तर राज्यों के दूरदराज के इलाकों में शिक्षा एवं पाठन संस्कृति को प्रोत्साहित कर रहे और ‘अंकल मूसा’ के नाम से विख्यात अरुणाचल प्रदेश के सत्यनारायण मुंदायूर, 1984 भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ितों की खातिर लड़ाई लड़ने वाले अब्दुल जब्बर उर्फ ‘भोपाल की आवाज’ (मरणोपरांत) और राजस्थान में स्वच्छता के क्षेत्र में काम करने वाली दलित सामाजिक कार्यकर्ता ऊषा चौमार को पद्म श्री से सम्मानित किया गया है। (भाषा इनपुट)

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