बंगालः PM ने जिन ‘एम्बुलेंस दादा’ को लगाया था गले, उनका आरोप- दीदी से मिलने पहुंचा, तो दुत्कारा गया; जानें- कौन हैं करीमुल हक?

करीमुल हक़ ने कहा कि मैं ममता बनर्जी के पास कोरोना के दौरान डॉक्टरों की लापरवाही की शिकायत दर्ज कराने पहुंचा था। लेकिन वहां मुझे जाने ही नहीं दिया गया।

pm modi, karimul haq, west bengalपश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में प्रचार के दौरान बागडोगरा एयरपोर्ट पर पद्म पुरस्कार के विजेता करीमुल हक ने पीएम का गर्मजोशी से स्वागत किया था। (फोटो- पीटीआई)

बीते शनिवार को पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के चौथे चरण के मतदान के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रचार के लिए जलपाईगुड़ी पहुंचे थे। पीएम के बागडोगरा एयरपोर्ट पर उतरते ही पद्म पुरस्कार के विजेता करीमुल हक ने पीएम का गर्मजोशी से स्वागत किया था। समाज सेवा के लिए मशहूर करीमुल हक़ को एम्बुलेंस दादा के नाम से भी जाना जाता है। इसी बीच करीमुल हक़ ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर आरोप लगाया है कि जब वे उनसे मिलने पहुंचे तो उन्हें वहां से दुत्कार कर भगा दिया गया।

पद्मश्री विजेता करीमुल हक ने नवभारत टाइम्स को दिए इंटरव्यू में कहा कि जब वे ममता बनर्जी से मिलने पहुंचे तो उन्हें मिलने नहीं दिया गया। करीमुल हक़ ने कहा कि मैं ममता बनर्जी के पास कोरोना के दौरान डॉक्टरों की लापरवाही की शिकायत दर्ज कराने पहुंचा था। लेकिन वहां मुझे जाने ही नहीं दिया गया। ममता बनर्जी के लोगों ने मुझे उनसे मिलने नहीं दिया। जिसकी वजह मुझे दुख पहुंचा है। साथ ही करीमुल हक़ ने कहा कि हम लोग गंदे आदमी हैं। हम लोग डस्टबिन के आदमी हैं। शायद इस वजह से हमें दीदी से मिलने नहीं दिया गया।

इसके अलावा करीमुल हक़ ने कहा “मैंने सिर्फ प्रधानमंत्री मोदी से मुलाक़ात की है ना कि बीजेपी से। मैंने आजतक ऐसा प्रधानमंत्री नहीं देखा जिसने इस तरह से गरीब आदमी को गले लगाया हो।” साथ ही करीमुल ने कहा कि वे कोई राजनीतिक व्यक्ति नहीं है बल्कि वे बहुत ही साधारण व्यक्ति हैं। हालांकि उन्होंने मीडिया के साथ बातचीत में ममता बनर्जी पर भी सवाल उठाया। करीमुल ने कहा कि अगर ममता बनर्जी ने बंगाल में काम किया तो उनके आदमी क्यों उनकी पार्टी छोड़कर चले जा रहे हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि अगर उन्हें प्रधानमंत्री से कुछ मांगना होगा तो वे बंगाल के लिए एम्स मांगेंगे।

कौन हैं करीमुल हक?: करीमुल हक अपनी बाइक एंबुलेंस से अब तक करीब 4000 लोगों की जान बचा चुके हैं। करीमुल हक बीमार गरीब और वंचित लोगों को अपनी बाइक एंबुलेंस से लेकर मुफ्त में अस्पताल पहुंचाते हैं। चाय बागान में काम करने वाले हक ने अपर्याप्त ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं के कारण लोगों को होने वाली परेशानियां दूर करने की ठानी और मुफ्त बाइक एम्बुलेंस सेवा शुरू की। 

करीमुल हक़ पर एक किताब भी लिखी जा चुकी है। जिसका नाम है ‘बाइक एम्बुलेंस दादा, द इंस्पायरिंग स्टोरी ऑफ करीमुल हक: द मैन हू सेव्ड 4000 लाइव्स’। कहा जाता है कि करीमुल हक़ की मां की मौत एम्बुलेंस नहीं मिल पाने की वजह से हुई थी। जिसके बाद से ही करीमुल हक़ ने जरुरतमंद लोगों के लिए जुगाड़ एम्बुलेंस बनवाया। 

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