पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने दावा किया कि विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA Bill) में सरकार द्वारा प्रस्तावित संशोधन शायद पेश ही न हों। इंडियन एक्सप्रेस को दिए गए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि विधेयक में संशोधन हो सकते हैं, इसे अभी तक पेश ही नहीं किया गया है। चिदंबरम ने पेपर लीक के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शनों पर भी विस्तार से बात की।

खबरों के मुताबिक, सरकार प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया और एफसीआरए में संभावित संशोधनों पर आम सहमति बनाने की कोशिश कर रही है। इन मुद्दों पर आपकी पार्टी का क्या रुख है और क्या आपको लगता है कि विशेष सत्र बुलाए जाने की संभावना है? इस सवाल के जवाब में पी चिदंबरम ने कहा, “मुझे संसदीय कार्य मंत्री की बैठक की कोई जानकारी नहीं है। हम जिस तरह के परिसीमन की बात कर रहे हैं उससे हम संतुष्ट नहीं हैं।” प्रस्तावित एफसीआरए संशोधनों पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा, “एफसीआरए विधेयक पेश नहीं किया गया है। एफसीआरए विधेयक में संशोधन हो सकते हैं। हो सकता है कि एफसीआरए विधेयक पेश ही न हो। मुझे कैसे पता चलेगा?”

गृह मंत्री को सदन में आकर अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए- चिदंबरम

विपक्ष ने प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई के लिए केंद्रीय गृह मंत्री को जिम्मेदार ठहराया है। क्या आपको लगता है कि वे जवाबदेह हैं और क्या उन्हें संसद में अपनी भूमिका स्पष्ट करनी चाहिए? इसके जवाब में पूर्व वित्तमंत्री ने कहा, “संसद में मौजूद होने के बावजूद गृह मंत्री पिछले 10 दिनों से न तो राज्यसभा और न ही लोकसभा में उपस्थित हुए हैं। गृह मंत्री को सदन में आकर अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए। विपक्ष का यह सवाल बिलकुल सही है कि गृह मंत्री दोनों सदनों में क्यों नहीं उपस्थित हो रहे हैं।” उन्होंने कहा कि नागरिक विरोध प्रदर्शन में पेलेट गन का इस्तेमाल बिलकुल गलत है इनका इस्तेमाल केवल दंगा जैसी स्थितियों में अंतिम उपाय के रूप में किया जाना चाहिए। शांतिपूर्ण छात्र प्रदर्शन के दौरान इनका इस्तेमाल क्यों किया गया।

सरकार ने सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम में संशोधन किया है और कहा है कि इससे परीक्षा में होने वाली गलतियों और अनुचित साधनों के इस्तेमाल पर अंकुश लगेगा। इस अधिनियम के बारे में आपकी क्या राय है? इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, “मुझे एक भी धारा, एक भी प्रावधान, एक भी खंड दिखाइए जो अनुचित साधनों को रोकता हो। यह सब सजा के बारे में है। यह तो बाद की बात है। यह कानून पेपर लीक या अनुचित साधनों के होने के बाद ही लागू होता है।” अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई का समर्थन करते हुए उन्होंने तर्क दिया कि मुझे अपराधियों को दंडित करने में कोई आपत्ति नहीं है। आप उन्हें दंडित करें। हालांकि, उन्होंने इस कानून को अनुचित साधनों की रोकथाम विधेयक कहना गलत बताया। चिदंबरम ने इसे अनुचित साधनों के प्रयोग के लिए दंड विधेयक कहा जाना चाहिए।

जम्मू -कश्मीर को राज्य का दर्जा क्यों नहीं?

अनुच्छेद 370 को निरस्त किए जाने के सात साल बाद भी केंद्र सरकार के बार-बार आश्वासनों के बावजूद जम्मू और कश्मीर को राज्य का दर्जा नहीं मिला है। इस देरी को आप किस नजरिए से देखते हैं और क्या आपको लगता है कि सरकार ने अपना वादा तोड़ दिया है? इसके जवाब में चिदंबरम ने कहा, “असली सवाल अनुच्छेद 370 नहीं था बल्कि यह था कि क्या किसी राज्य को दो या दो से अधिक केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित या खंडित किया जा सकता है?” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जम्मू और कश्मीर महाराजा के अधीन एक पूर्ण राज्य के रूप में भारत में शामिल हुआ था।

कांग्रेस नेता ने तर्क दिया कि किसी राज्य को सीमित शक्तियों वाले केंद्र शासित प्रदेश में बदलना पुनर्गठन के माध्यम से नए राज्य बनाने की तुलना में एक पूरी तरह से अलग संवैधानिक सवाल उठाता है। पी चिदंबरम ने कहा कि उन्हें आश्चर्य है कि संविधान पीठ ने इस बात पर फैसला नहीं सुनाया कि क्या संसद के पास किसी राज्य को केंद्र शासित प्रदेश में बदलने का अधिकार है।

क्या सरकार जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को समाप्त करने में सक्षम नहीं?

केंद्र सरकार का कहना है कि जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा स्थिति सुधरने पर ही राज्य का दर्जा बहाल किया जा सकता है, जिसके लिए वह अक्सर लगातार हो रही आतंकवादी घटनाओं का हवाला देती है। आप इस बात को कैसे देखते हैं? इसका जवाब देते हुए पी चिदंबरम ने केंद्र पर विरोधाभासी रुख अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “आप दोनों बातें एक साथ नहीं कह सकते। सरकार एक ही समय में यह दावा नहीं कर सकती कि आतंकवाद काफी हद तक समाप्त हो चुका है जबकि साथ ही यह भी तर्क दे रही है कि आतंकवाद ही राज्य का दर्जा न देने का कारण है।”

पूर्व वित्त मंत्री ने तर्क दिया कि अगर आतंकवाद को राज्य का दर्जा देने में देरी का कारण बताया जाता रहा तो सरकार प्रभावी रूप से यह स्वीकार कर रही है कि आप जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को समाप्त करने में सक्षम नहीं रहे हैं और आप जम्मू-कश्मीर के लोगों को सुरक्षा प्रदान करने में विफल रहे हैं।

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संसद में छात्रों पर लाठीचार्ज को लेकर लगातार कांग्रेस और अन्य विपक्षी पार्टियों का हंगामा जारी है। विपक्ष मांग कर रहा है कि गृह मंत्री अमित शाह सदन में आकर इस मसले पर बयान दें। विपक्ष की इस मांग के बीच गुरुवार को राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने सोमवार को केंद्र सरकार से कहा कि वह सदन में अमित शाह की मौजूदगी के अनुरोध पर विचार करें। खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें