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राज्यसभा में मार्शल की वर्दी से हटी ‘पी कैप’, पूर्व अधिकारियों ने की आलोचना

गुरुवार को जब यह मामला सदन में उठा तो सभापति ने कहा कि यह सेना की वर्दी की तरह नहीं दिखनी चाहिए।

सभापति के दाएं व बाएं खड़ा व्यक्ति मार्शल होता है। (फोटो-इंडियन एक्सप्रेस)

राज्यसभा में तैनात मार्शल के सिर से ‘पी कैप’ हट गई है। गुरुवार को सदन शुरू होते ही मार्शल बिना टोपी के नजर आए। हालांकि बाकि वर्दी में अभी कोई बदलाव नहीं किया गया है। राज्यसभा ने नए सत्र की शुरुआत के साथ मार्शल के लिए नया ड्रेस कोड (वेशभूषा) लागू किया है। नई वर्दी में राज्यसभा के मार्शल एक सैनिक की तरह नजर आ रहे हैं। पहले ही दिन से इस ड्रेस को लेकर लगातार आपत्तियां सामने आ रही हैं। इसके बाद सभापति एम वेंकैया नायडू ने मंगलवार को वर्दी की समीक्षा के आदेश जारी किए थे।

गुरुवार को जब यह मामला सदन में उठा तो सभापति ने कहा कि यह सेना की वर्दी की तरह नहीं दिखनी चाहिए और इस संबंध में प्रक्रिया चल रही है। मामले में सेना के पूर्व अधिकारियों ने भी मार्शलों की वर्दी में किए गए बदलाव की आलोचना की थी। इसके बाद ही सभापति की प्रतिक्रिया सामने आई थी। ज्ञात हो कि सदन में अध्यक्ष की कुर्सी के ठीक पीछे मार्शल की तैनाती की जाती है।

सभापति के दाएं व बाएं खड़ा व्यक्ति मार्शल होता है। इनमें एक मार्शल और दूसरा डिप्टी मार्शल होता है। मार्शल सुचारू तौर पर सदन चलाने के लिए सभापति के मददगार की भूमिका में होते हैं। सदन के संचालन के लिए मार्शलों द्वारा वार्ड अधिकारियों की भी तैनाती की जाती है, जो सभापति के आदेश के बाद लोगों को सदन से बाहर लेकर जाते हैं।

अब तक ये मार्शल सफेद वर्दी में और एक विशेष टोपी के साथ नजर आते थे। गर्मियों में ये सफारी सूट और सर्दियों में बंद गले वाले पारंपरिक सूट पहने नजर आते थे। इनके सिर पर कलगीदार पगड़ी होती थी। यह वर्दी व्यवस्था सदन में 1950 से लागू है और आज तक इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया था।

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