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मौलाना ने कहा- हम 72 भी लाखों को मार दें, कोई मां का औलाद नहीं जो मुसलमानों को बंगाल से निकाल सके

जो खून उनका है वहीं खून हमारा भी है और जो खुदा उनका है वह खुदा हमारा भी है, दुनिया में मुसलमान कहीं भी हो हम सभी भाई हैं।

Author कोलकाता | September 19, 2017 2:04 PM
ये बंगाल है, असम, गुजरात, उत्तर प्रदेश, मुजफ्फरपुर और मुजफ्फरनगर नहीं जो तुम यहां से रोहिंग्या मुसलमानों को भगा दोगे। (Photo Source: Video Grab)

म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों के नरसंहार के विरोध में 12 सितंबर को कई मुस्लिम संगठन कोलकाता की सड़कों पर प्रदर्शन करते हुए दिखाई दिए थे। एनडीटीवी के अनुसार कम से कम 25 से 30 हजार प्रदर्शनकारियों ने सर्कस पार्क से रानी राशमॉनी रोड तक 5 किलोमीटर का मार्च किया था। इनमें से एक मुस्लिम समुदाय के शिया मौलाना शब्बीर अली अजाद वारसी ने एक ऐसा विवादित बयान दे दिया था जिसकी अब काफी निंदा की जा रही है। मौलाना वारसी ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा अगर मुस्लिम अल्पसंख्यक हैं तो क्या वे कमजोर हैं? तुम अभी मुसलमानों का इतिहास नहीं जानते हो। हम लोग शिया मुस्लिम हैं, हम 72 भी होते हैं तो भी लाखों को मार सकते हैं।

इसके बाद मौलाना ने कहा दिल्ली में बैठी सरकार से कहना चाहता हूं कि रोहिंग्या हमारे भाई हैं। यह सोचने की भूल मत करो कि रोहिंग्या मुसलमान भारतीय मुसलमानों से अलग हैं। जो खून उनका है वहीं खून हमारा भी है और जो खुदा उनका है वह खुदा हमारा भी है, दुनिया में मुसलमान कहीं भी हो हम सभी भाई हैं। बंगाल से रोहिंग्या मुसलमानों को निकालने की कोशिश मत करो। ये बंगाल है, असम, गुजरात, उत्तर प्रदेश, मुजफ्फरपुर और मुजफ्फरनगर नहीं जो तुम यहां से रोहिंग्या मुसलमानों को भगा दोगे। यहां मीडिया मौजूद है और आज में चुनौती देता हूं कि किसी की मां ने वो औलाद नहीं जनी जो मुसलमानों को बंगाल से निकालकर दिखा दे। अगर ऐसा ही चलता रहा तो हम इससे भी बड़ा जुलूस लेकर दिल्ली पहुंच जाएंगे और एक नया इतिहास रचेंगे।

गौरतलब है कि देश में अवैध रुप से रह रहे रोहिंग्या मुसलमानों के मामले पर केंद्र सरकार ने सोमवार को 16 पन्नों का हलफनामा दाखिल किया था। गृह मंत्रालय ने अपने इस हलफनामे में कहा था कि रोहिंग्या मुसलमान देश के लिए खतरा हैं क्योंकि इनमें से कई आतंकी संगठनों से जुड़े रहे हैं। वहीं म्यांमार में रोहिंग्या संकट पर अपनी पहली टिप्पणी में आंग सान सू ची ने आज यानि 19 सितंबर को कहा कि रखाइन प्रांत में फैले संघर्ष में जिन ‘‘तमाम लोगों’’ को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, उनके लिए मैं ‘‘दिल से दुख’’ महसूस कर रही हूं। सू ची ने अपनी टिप्पणी में यह भी उल्लेख किया कि रोहिंग्या मुस्लिमों को हिंसा के जरिए देश से विस्थापित किया गया।

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