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मोटरसाइकिल के दीवाने रहे हैं जस्टिस एसए बोबडे, हार्ले डेविडसन चलाने के दौरान खा गए थे चोट; आया था फ्रैक्चर

सुप्रीम कोर्ट बार काउंसिल के अध्यक्ष विकास सिंह ने किया खुलासा- सीजेआई बनने से पहले जस्टिस बोबडे खरीदना चाहते थे हार्ले डेविडसन बाइक।

Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र नई दिल्ली | Updated: April 24, 2021 8:37 AM
चीफ जस्टिस शरद अरविंद बोबडे। (एक्सप्रेस फाइल फोटो)

निवर्तमान प्रधान न्यायाधीश शरद अरविंद बोबडे शुक्रवार को पद से सेवानिवृत्त हो गए। बोबडे ने नवंबर 2019 में प्रधान न्यायाधीश के रूप में शपथ ली थी और उनका कार्यकाल 17 महीने का रहा। इस दौरान उनके साथ कई विवाद भी जुड़े। इनमें एक विवाद उनके हार्ले डेविडसन मोटरसाइकिल के साथ फोटो खिंचाने को लेकर भी उठा था। दरअसल, यह मोटरसाइकिल एक भाजपा नेता के बेटे की थी। इसे लेकर विपक्षी नेताओं ने तत्कालीन सीजेआई बोबडे पर जबरदस्त निशाना साधा था। हालांकि, यह बात दीगर है कि न्यायमूर्ति एसए बोबडे हमेशा से ही मोटरसाइकिलों के शौकीन रहे हैं और उनके विदाई समारोह में भी उनके इस शौक का जिक्र हुआ।

दरअसल, बोबडे के विदाई समारोह के दौरान सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विकास सिंह ने एक घटना का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि सीजेआई बोबडे 2019 में चीफ जस्टिस बनने से पहले एक मोटरसाइकिल की वजह से एक्सिडेंट का शिकार हो गए थे। इससे उनके पैर में फ्रैक्चर आया था। विकास सिंह ने कहा कि यह बाइक उनकी हार्ले डेविडसन थी, जिसे बोबडे ने चलाने की कोशिश की। हालांकि, पैर में फ्रैक्चर के बाद वे सीजेआई बनने से पहले काफी समय तक काम से दूर रहे थे।

सुप्रीम कोर्ट बार काउंसिल के अध्यक्ष ने यह भी बताया कि वे इस बाइक को जस्टिस बोबडे को बेचना चाहते थे, क्योंकि वे भी ऐसी ही बाइक को खरीदने के लिए तैयार थे और इसे चलाकर देखना चाहते थे। लेकिन एक्सिडेंट के बाद उन्होंने हार्ले डेविडसन खरीदने का विचार निकाल दिया, क्योंकि यह काफी भारी मोटरसाइकिल है।

किन बड़े फैसलों में शामिल रहे बोबडे?: न्यायमूर्ति बोबडे ने अपने कार्यकाल के दौरान ऐतिहासिक अयोध्या फैसले, निजता के अधिकार, संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) को चुनौती देने वाली याचिकाओं, टाटा-मिस्त्री मामले, सोन चिरैया (ग्रेट इंडियन बस्टर्ड) के संरक्षण, महाबलेश्वर मुद्दे, उच्च न्यायालयों में तदर्थ न्यायाधीशों की नियुक्ति और पटाखों पर प्रतिबंध सहित कई महत्वपूर्ण मामलों को देखा। न्यायमूर्ति बोबडे ने उस पीठ का भी नेतृत्व किया जो सीएए की संवैधानिक वैधता पर विचार करने को सहमत हुई और 22 जनवरी 2020 को स्पष्ट किया कि कानून का क्रियान्वयन रोका नहीं जाएगा।

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