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CBI में थम नहीं रहा कलह, अब आलोक वर्मा के ट्रांसफर रोकने के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती

सीबीआई के डीएसपी देवेंद्र कुमार ने विभिन्न अधिकारियों के तबादले के आदेश को पलटने के लिए जांच एजेंसी के निदेशक आलोक वर्मा के फैसले के खिलाफ गुरुवार को दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।

Author नई दिल्ली | January 10, 2019 4:44 PM
सीबीआई के पूर्व निदेशक आलोक वर्मा। (photo: PTI)

सीबीआई के डीएसपी देवेंद्र कुमार ने विभिन्न अधिकारियों के तबादले के आदेश को पलटने के लिए जांच एजेंसी के निदेशक आलोक वर्मा के फैसले के खिलाफ गुरुवार को दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। याचिका न्यायमूर्ति नजमी वजीरी के समक्ष शुक्रवार को सुनवाई के लिये सूचीबद्ध होने की संभावना है। उन्होंने सीबीआई निदेशक राकेश अस्थाना, कुमार और बिचौलिया मनोज प्रसाद की विभिन्न याचिकाओं पर पहले ही सुनवाई पूरी करके अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। इन लोगों ने इन याचिकाओं में अपने खिलाफ प्राथमिकी को निरस्त करने की मांग की थी। कुमार ने लंबित याचिका में दायर अपने आवेदन में सीबीआई को यह निर्देश देने की मांग की है वह आलोक वर्मा और फिर से स्थानांतरित किये गए अधिकारियों को किसी भी तरीके से उनके और अन्य के खिलाफ प्राथमिकी पर विचार नहीं करने दे।

सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा ने छुट्टी पर भेजे जाने के 77 दिन बाद बुधवार को अपना कार्यभार संभाला था। उन्हें 23 अक्टूबर 2018 की देर रात को केंद्र सरकार ने एक आदेश के जरिये जबरन छुट्टी पर भेज दिया था। केंद्र सरकार के आदेश को उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को निरस्त कर दिया था।

मामले को लेकर मल्लिकार्जुन खड़गे ने मांगे दस्तावेज  

सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा के भविष्य का फैसला करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली चयन समिति दूसरी बार बृहस्पतिवार को बैठक करेगी। उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को आलोक वर्मा को उनके पद पर बहाल कर दिया था। उन्हें सरकार ने करीब दो महीने पहले जबरन छुट्टी पर भेज दिया था। अधिकारियों ने अधिक जानकारी नहीं देते हुए बताया कि पैनल की बुधवार को हुई बैठक बेनतीजा रही। सीबीआई प्रमुख वर्मा औैर विशेष निदेशक राकेश अस्थाना ने एक दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगााए थे जिसके बाद उन्हें जबरन छुट्टी पर भेज दिया गया था।

वर्मा ने बुधवार को पदभार पुन: संभालते हुए एम नागेश्वर राव द्वारा किये गये ज्यादातर तबादले रद्द कर दिये। राव वर्मा की अनुपस्थिति में अंतरिम सीबीआई प्रमुख नियुक्त किए गए थे। अधिकारियों ने बताया कि वर्मा ने जिन अधिकारियों के तबादले के आदेश रद्द किए हैं, उन्हें वर्मा का विश्वासपात्र माना जाता है।
नियमों के मुताबिक प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली इस समिति में प्रधान न्यायाधीश या उच्चतम न्यायालय के एक न्यायाधीश और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष शामिल होते हैं।

अधिकारियों ने बताया कि मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई द्वारा नामित उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश ए के सीकरी और लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने बुधवार को हुई बैठक में हिस्सा लिया। खड़गे ने इस मामले में केंद्रीय सतर्कता आयोग की जांच रिपोर्ट समेत दस्तावेज मांगे हैं।
उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘मैंने सीवीसी की जांच रिपोर्टों समेत मामले के संबंध में सरकार से कुछ दस्तावेज मांगे हैं।’’ न्यायमूर्ति गोगोई उस पीठ का हिस्सा थे जिसने मंगलवार को वर्मा को सीबीआई निदेशक पद पर बहाल करने का आदेश दिया था, इसलिए उन्होंने पैनल की बैठक से खुद को अलग रखने का फैसला किया।

फिलहाल लोकसभा में कोई विपक्ष का नेता नहीं है क्योंकि किसी भी विपक्षी दल को कुल सदस्यों की दस प्रतिशत सीटें नहीं मिली थी। मल्लिकार्जुन खड़गे लोकसभा में विपक्ष के सबसे बड़े दल कांग्रेस के नेता हैं। शीर्ष अदालत ने सरकार से अपने फैसले के एक हफ्ते के अंदर ही बैठक बुलाने को कहा था।

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