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109 हवाईअड्डों में से केवल 10 से होती है कमाई, बाकी घाटे में

हवाईअड्डों के लिए भविष्य में मानव पूंजी और बुनियादी ढांचे की आवश्यकता के लिए एक नए नजरिे की जरूरत है।

109 हवाईअड्डों में से केवल 10 से होती है कमाई, बाकी घाटे में

एक राज्य से दूसरे राज्य तक आसानी से और तेजी से पहुंच जा सके, इसके लिए केंद्र सरकार ने देशभर को हवाईअड्डों से जोड़ दिया है, लेकिन यह योजना केंद्र सरकार के लिए घाटे का सौदा रही है। हाल ही में संसद में पेश एक रिपोर्ट में हवाईअड्डों की यह स्थिति सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक देश में चल रहे 109 हवाईअड्डों में से केवल 10 हवाईअड्डे ऐसे हैं, जिनसे सरकार को कमाई हो रही है, बाकी सभी हवाईअड्डों पर सरकार को नुकसान उठाना पड़ रहा है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआइ) पास कुल 136 हवाईअड्डे हैं। इनमें से 109 हवाईअड्डों का संचालन हो रहा है और इसमें भी केवल दस से ही एएआइ को लाभ हो रहा है। लाभ वाले हवाईअड्डों में पोर्ट ब्लेयर, विशाखापत्तनम, पटना, कांडला, पोरबंदर, श्रीनगर, पुणे, जुहू, कानपुर चकेरी और बागडोगरा शामिल हैं। इस मामले में संसद की नगर विमानन मंत्रालय से संबंधित समिति ने विस्तृत रिपोर्ट तैयार की है। रिपोर्ट को संसद पटल पर प्राक्कलन समिति के सभापति व सांसद गिरीश भालचंद्र बापट ने पेश किया है। यह संसद समिति का पंद्रहवां प्रतिवेदन है।

समिति ने मंत्रालय को सिफारिश दी है कि लगभग 200 अप्रयुक्त हवाई पट्टियों के उपयोग की संभावनाओं पर सक्रिय रूप से प्रयोग किया जाना चाहिए। प्रशिक्षण के उद्देश्य से सभी राज्यों में फ्लाइंग क्लब बनाने के लिए भी प्रयास किया जा जाना चाहिए। प्राथमिकता यह होनी चाहिए कि भारत में भर्ती किए गए सभी पायलटों को देश में प्रशिक्षण मिल सके और यहां तक कि विदेशों से भी छात्र-छात्राएं भारत में आकर पायलट प्रशिक्षण लें।

2024 तक सुधारे जाने हैं सौ हवाईअड्डे : विमान सेवाओं का बेहतर बनाया जा सके, इसके लिए वर्ष 2024 तक 100 हवाईअड्डों को विकसित और उनका पुनरुद्धार किए जाने की योजना है। इसमें 12 वाटर एयरोड्रम और 31 हेलीपोर्ट भी शामिल हैं। समिति ने इन योजनाओं को वक्त पर पूरा करने के लिए इन योजनाओं की विशेष निगरानी की सिफारिश की है, ताकि आम जनता को इनका लाभ तय लक्ष्य समय तक दिलाया जा सके।

यह समिति ने परियोजनाओं में तेजी लाने के लिए जेवर व नवी मुम्बई परियोजना का हवाला दिया है। समिति ने कहा कि इन परियोजनाओं की तर्ज पर ही नियमों में ढ़ील देकर कुछ और ग्रीन फिल्ड हवाईअड्डा योजनाओं पर विचार करना चाहिए, ताकि देश में हवाईअड्डों से भीड़ को कम किया जा सके।

एनएचएआइ की तर्ज पर मिले भूमि : विमानपत्तनों के निर्माण में भूमि अधिग्रहण की वजह से आने वाली परेशानियों को दूर करने के लिए समिति ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) की तर्ज पर जमीन अधिग्रहण योजना को लागू करने की सिफारिश की है। समिति ने यात्रियों की संख्या बढ़ाने और कार्गो यातायात को बढ़ाने के लिए भी मंत्रालय से सिफारिश की है।

समिति का मानना है कि विमानन क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है, जिसके लिए आगामी हवाईअड्डों के लिए भविष्य में मानव पूंजी और बुनियादी ढांचे की आवश्यकता के लिए एक नए नजरिे की जरूरत है। इसीलिए केंद्र सरकार ने क्षेत्रीय संपर्क योजना उड़ान तैयार की है। इसके बावजूद भूमि अधिग्रहण, मुकदमेबाजी और मंजूरियों में मिलने वाली देरी हवाईअड्डे बनाने के लिए एक बड़ी चुनौती हैं।समिति ने मंत्रालय को इस दिशा में सुधार की पहल करने की सिफारिश की है।

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