Maharashtra Politics: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के दोनों गुटों के बीच विलय को लेकर जारी अनिश्चितता के बीच, लोकसभा सांसद और एनसीपी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे ने रविवार को कहा कि बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के साथ रहने का उनकी पार्टी का फैसला स्थायी है और अन्य गुटों को अपनी स्थिति तय करने का अधिकार है।

तटकरे ने किसी भी पार्टी का नाम लिए बिना कहा, “हम एनडीए के साथ हैं और उनके साथ रहने का हमारा फैसला स्थायी है। यह दूसरों पर निर्भर करता है कि वे हमारे रुख के अनुरूप रुख अपनाना चाहते हैं या नहीं।” एनसीपी नेता के इस बयान को शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी-एसपी को एक साफ संदेश के रूप में देखा जा रहा है कि क्या वह बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए में शामिल होना चाहती है और कांग्रेस और शिवसेना यूबीटी के विपक्षी गठबंधन को छोड़ना चाहती है।

एनसीपी विधायक दल दादा की मेहनत से बना था- तटकरे

तटकरे ने रविवार को पार्टी के राज्य कार्यक्रम में अस्थि कलश पूजन के दौरान मीडिया से बात की। तटकरे ने सवाल उठाया कि पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के अंतिम संस्कार से पहले ही एनसीपी और एनसीपी-एसपी के विलय की चर्चा क्यों शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा, “एनसीपी विधायक दल दादा की मेहनत से बना था। उनके नेतृत्व में ही यह सामूहिक निर्णय लिया गया था कि धर्मनिरपेक्ष जड़ों और शाहू-फुले-अंबेडकर के मूल्यों पर अडिग रहते हुए एनडीए में शामिल हुआ जाए। महाराष्ट्र की 12 करोड़ जनता ने इसका समर्थन किया है। दादा द्वारा एनडीए में शामिल होने के लिए लिए गए इस दूरदर्शी निर्णय के हम समर्थन में हैं।”

उन्होंने एनडीए के अंदर बीजेपी के नेतृत्व की तारीफ करते हुए कहा, “बीजेपी ने हमेशा सहयोग किया है। वे हमारे मंत्रिमंडल या आंतरिक फैसलों को निर्देशित नहीं करते, बल्कि वे हमारे साथ सौहार्द और सम्मान से पेश आते हैं। मैं बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व में इस सकारात्मक अनुभव का प्रत्यक्ष गवाह हूं।” उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी विलय की बात नहीं की। तटकरे ने कहा, “मैं 30 सालों से दादा का एक विश्वसनीय सहयोगी रहा हूं। पवार साहब (शरद पवार) के नेतृत्व में चार सालों तक अध्यक्ष के रूप में या उसके बाद अन्य भूमिकाओं में, मैंने निष्ठापूर्वक अपने कर्तव्यों का निर्वाह किया है। उनके कार्यकर्ता और सहकर्मी के रूप में, मैंने हमेशा उनके विचारों का समर्थन किया है।”

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भावुक हो गए पार्थ

तटकरे की ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई है जब एनसीपी (SP) के नेता बार-बार कह रहे हैं कि दोनों पार्टियों के विलय का फैसला अजित पवार ने अंतिम रूप दिया था। शरद पवार ने शनिवार को कहा कि विलय की घोषणा 12 फरवरी को होनी थी। इससे पहले तटकरे ने बताया कि अजित पवार की अस्थियां महाराष्ट्र के सभी जिलों में ले जाई जाएंगी। इस समारोह में अजित पवार के बेटे पार्थ भी मौजूद थे। अजित पवार के केबिन में घुसते ही पार्थ ने उस कुर्सी को गले लगा लिया जहां वे अक्सर बैठते थे और भावुक होकर फूट-फूटकर रोने लगे।

अजित पवार के निधन के चार दिन बाद ही सुनेत्रा पवार के उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण को लेकर उठ रही आलोचनाओं का जवाब देते हुए तटकरे ने कहा, “डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर द्वारा दिए गए संविधान के तहत सभी को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अपने विचार रखने का अधिकार है। हालांकि, उन्होंने महाराष्ट्र और एनसीपी परिवार को स्थिर करने और अजित दादा के विकसित महाराष्ट्र के सपने को साकार करने की शपथ ली है। इसमें कुछ भी अनुचित नहीं है।”

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