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राइफल को टेस्‍ट में फेल करने पर सरकारी कंपनी ने सेना को ल‍िया आड़े हाथ, कहा- बहुत बढ़‍िया चलती है

रिपोर्ट के अनुसार भारतीय सेना को 1,85,000 असाल्ट राइफल की जरूरत है। राइफल और उसके आनुषंगिक उपकरणों की कीमत करीब एक लाख रुपये है।

पुलिस सूत्रों ने बताया कि भारतीय सेना हमले का प्रभावी तरीके से मुंहतोड़ जवाब दे रही है। (पीटीआई फाइल फोटो)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महत्वाकांक्षी “मेक इन इंडिया” कार्यक्रम के तहत देश में बनाई गई असाल्ट राइफल के निर्माता ऑर्डनैंस फैक्ट्री बोर्ड (ओएफबी) ने कहा है कि उसकी बनाई बंदूक “बगैर किसी दिक्कत के बिना रुके काम कर रही है।” इस राइफल को भारतीय सेना ने गुणवत्ता के आधार पर खारिज कर दिया था। एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार सेना ने कहा था कि  7.62 एमएम की असाल्ट राइफल सेना के परीक्षण में खरी नहीं उतरी थी। सेना ने पाया था कि ये राइफल बहुत ज्यादा शोर करती है और लड़ाई के लिए उपयोगी नहीं है। रिपोर्टे के अनुसार भारतीय सेना ने रक्षा मंत्रालय को भेजे जवाब में कहा था कि इस राइफल की डिजाइन के समेकित विश्लेषण और सुधार की जरूरत है।

आयुध कारखाने के प्रवक्ता डॉक्टर यू मुखर्जी ने एनडीटीवी से कहा कि सेना के एक शीर्ष जरनल ने परीक्षण के दौरान इस राइफल को चलाया था और ये शानदार चली थी। रिपोर्ट के अनुसार भारतीय सेना को 1,85,000 असाल्ट राइफल की जरूरत है। राइफल और उसके आनुषंगिक उपकरणों की कीमत करीब एक लाख रुपये है। राइफल बनाने का कुल ठेका करीब 1850 करोड़ रुपये का बताया जा रहा है। भारतीय सेना एके-47 और भारत में बनी इंसास (इंडियन स्मार आर्म्स सिस्टम राइफल्स) का इस्तेमाल करती है। ये राइफलें 1988 में सेना में शामिल की गईं थी। सेना इन राइफलों की  जगह अब नई आधुनिक और ज्यादा मारक शामिल करना चाहती है।

“ऑर्डनैंस फैक्ट्री बोर्ड” रक्षा मंत्रालय के अधीन विभाग है जिसका काम सरकार के लिए हथियार बनाना है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने कोलकाता के बाहरी इलाके में स्थित ईशापुर आयुध कारखाने में जाकर इस राइफल का मुआयना किया था।  रिपोर्ट के अनुसार राइफल के नमूने को भौतिक परीक्षण किया गया था और उससे बिना रुके 300 राउंड गोलियां चला कर देखी गई थीं।

ofb rifle आर्डनैंस फैक्ट्री द्वारा बनाई जा रही राइफल का नमूना। (तस्वीर – ओएफबी वेबसाइट)

भारतीय सेना ने राइफल की मैगजीन को दोबारा डिजाइन करने के लिए कहा था। सेना ने मांग की है कि राइफल में  मैगजीन लोड करने की प्रक्रिया को सरल और सुरक्षित बनाए जाने की जरूरत है। सेना ने शिकायत की है कि राइफल परीक्षण के दौरान बीस से ज्यादा बार (अधिकतम सीमा) बाधित हुई। दूसरी तरफ आयुध कारखान ने दावा किया है कि उसने राइफल के रिक्वायल को भी सुविधाजनक स्तर तक लाने में कामयाबी हासिल की है। ओएफबी ने कहा है कि वो परीक्षण के लिए 10 और ऐसी राइफलें बना रहा है।

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