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कृषि कानूनों का विरोध: किसानों के अड़ जाने से फैसला नहीं हो सका

लगभग दो घंटे तक चली बैठक के बाद तोमर ने कहा कि सरकार को उम्मीद है कि अगली वार्ता में किसान संगठन के प्रतिनिधि वार्ता में कोई विकल्प लेकर आएंगे और कोई समाधान निकलेगा।

farm BILL, FARMERSबैठक में एक किसान नेता ने एक नोट बनाकर लिखा, मरेंगे या जीतेंगे।

तीन कृषि कानूनों को लेकर पिछले लगभग एक महीने से सरकार और किसानों के बीच चला आ रहा गतिरोध शुक्रवार की वार्ता के बाद भी खत्म नहीं हो सका। बैठक की अगली तारीख 15 जनवरी तय की गई। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि वार्ता के दौरान किसान संगठनों ने तीनों कानूनों को निरस्त करने की उनकी मांग के अतिरिक्त कोई विकल्प प्रस्तुत नहीं किया। इस कारण कोई फैसला नहीं हो सका।

लगभग दो घंटे तक चली बैठक के बाद तोमर ने कहा कि सरकार को उम्मीद है कि अगली वार्ता में किसान संगठन के प्रतिनिधि वार्ता में कोई विकल्प लेकर आएंगे और कोई समाधान निकलेगा। एक तरह से उन्होंने कानूनों को निरस्त करने की मांग यह कहते हुए खारिज कर दी कि देश भर के अन्य किसानों के कई समूहों ने इन कृषि सुधारों को समर्थन किया है।

तोमर ने इस बात से इनकार किया कि सरकार ने किसानों के समक्ष कृषि कानूनों से संबंधित सुप्रीम कोर्ट में लंबित एक मामले में शामिल होने का कोई प्रस्ताव रखा। उन्होंने हालांकि कहा कि सुप्रीम कोर्ट जो भी फैसला लेगी, सरकार उसका अनुसरण करेगी। यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार इन कानूनों को लागू करने का अधिकार राज्यों पर छोड़ने के प्रस्ताव पर विचार करेगी, तोमर ने कहा कि इस संबंध में किसान नेताओं की ओर से कोई प्रस्ताव नहीं आया है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा कोई प्रस्ताव आता है तो सरकार उस वक्त फैसला लेगी।

तोमर ने कहा, ‘वार्ता में तीनों कानूनों पर चर्चा होती रही, लेकिन कोई निर्णय आज नहीं हो सका। सरकार का लगातार यह आग्रह रहा कि कानूनों को निरस्त करने के अतिरिक्त कोई और विकल्प अगर यूनियन दें तो सरकार उस पर विचार करेगी। लेकिन बहुत देर तक चर्चा के बाद भी कोई विकल्प आज प्रस्तुत नहीं किए जा सकें। इसलिए चर्चा का दौर यहीं स्थगित हुआ।’

बैठक में मौन धारण किया किसानों ने
कानून निरस्त करने की मांग खारिज किए जाने के बाद किसान नेताओं ने बैठक के दौरान मौन धारण कर लिया। इसके साथ ही उन्होंने नारे लिखे बैनर लहराना आरंभ कर दिया। इन बैनरों में लिखा था ‘जीतेंगे या मरेंगे’। किसान नेता बलबीर राजेवाल ने मंत्रियों से कहा, आप जिद पर अड़े हैं। आप अपने-अपने सेक्रेटरी, ज्वाइंट सेक्रेटरी लगा देंगे। नौकरशाह कोई न कोई तर्क देते रहेंगे। हमारे पास भी सूची है। फिर भी आपका फैसला है। क्योंकि आप सरकार हैं। लोगों की बात शायद कम लगती है। जिसके पास ताकत है, उसकी बात ज्यादा होती है। इस बात को निपटाने का आपका मन नहीं है। तो वक्त क्यों बर्बाद करना है। आप साफ-साफ जवाब लिखकर दे दीजिए, हम चले जाएंगे।

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