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संसद कार्यवाही: विपक्ष ने राष्ट्रपति से मांगा समय, नोटबंदी से हो रही परेशानियों का उठाएंगे मुद्दा

विपक्षी नेताओं ने कहा कि वे देश के निर्वाचित जनप्रतिनिधि हैं और उन्हें संसद में बोलने का पूरा हक है। उन्होंने कहा कि संसद में उन्हें नहीं बोलने देना ‘असंवैधानिक’ है।

Author नई दिल्ली | December 15, 2016 16:20 pm
संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान राज्यसभा की कार्यवाही का एक दृश्य। (PTI Photo/ TV GRAB/18 Nov, 2016)

नोटबंदी के मुद्दे पर अपना पक्ष राष्ट्रपति के समक्ष रखने के लिए विपक्षी दलों ने राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी से समय देने की गुरुवार (15 दिसंबर) को मांग की ताकि आम आदमी को हो रही परेशानियों तथा संसद में विपक्ष को ‘बोलने नहीं देने’ के मुद्दों से उन्हें अवगत कराया जा सके। राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद के कक्ष में हुयी बैठक में विभिन्न विपक्षी दलों के प्रतिनिधियों ने नोटबंदी के कारण किसानों और आम लोगों को हो रही परेशानियों का मुद्दा राष्ट्रपति के समक्ष उठाने का फैसला किया। विभिन्न दलों के नेताओं ने कहा कि पूरे विपक्ष ने संसद में नहीं बोलने देने को लेकर सत्तारूढ़ दल के खिलाफ ‘शिकायत’ करने के लिए राष्ट्रपति से संपर्क करने का फैसला किया है।

विपक्षी नेताओं ने कहा कि वे देश के निर्वाचित जनप्रतिनिधि हैं और उन्हें संसद में बोलने का पूरा हक है। उन्होंने कहा कि संसद में उन्हें नहीं बोलने देना ‘असंवैधानिक’ है। सूत्रों ने कहा कि राष्ट्रपति से शुक्रवार (16 दिसंबर) के लिए समय मांगा जा रहा है और सभी विपक्षी पार्टियां एकजुट होकर उनके सामने मुद्दा उठाने को तैयार हैं। सूत्रों ने कहा कि बैठक में यह भी फैसला किया गया कि किसानों और आम लोगों की परेशानी का मुद्दा लोकसभा एवं राज्यसभा दोनों सदनों में उठाया जाएगा और किसानों के लिए ऋण माफी की मांग की जाएगी। सभी विपक्षी दलों ने फैसला किया कि आजाद राज्यसभा में यह मुद्दा उठाएंगे वहीं लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे यह मुद्दा उठाएंगे।

आजाद ने नोटबंदी के कारण किसानों की समस्याओं पर चर्चा के लिए राज्यसभा में नियम 267 के तहत एक नोटिस भी दिया था। संसद के शीतकालीन सत्र में विपक्षी पार्टियां नियमित रूप से हर सुबह बैठक करती हैं ताकि संसद में एकजुट रणनीति बनायी जा सके। गुरुवार की बैठक में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, बसपा, सपा, जदयू, भाकपा, माकपा, राकांपा, द्रमुक और एआईयूडीएफ के प्रतिनिधि शामिल हुए।

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