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आगरा धर्म परिवर्तन मामले को लेकर संसद में मचा बवाल

राज्यसभा में आज बसपा सहित विपक्षी दलों ने आगरा में कुछ लोगों का दबाव डालकर एवं प्रलोभन देकर धर्मान्तरण कराने का आरोप लगाते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं से देश में सांप्रदायिक तनाव फैल सकता है। उन्होंने केंद्र सरकार इसका जवाब देने की मांग की जबकि सरकार ने इस मुद्दे से पल्ला झाड़ते हुए कहा […]

Author Updated: December 10, 2014 3:12 PM

राज्यसभा में आज बसपा सहित विपक्षी दलों ने आगरा में कुछ लोगों का दबाव डालकर एवं प्रलोभन देकर धर्मान्तरण कराने का आरोप लगाते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं से देश में सांप्रदायिक तनाव फैल सकता है। उन्होंने केंद्र सरकार इसका जवाब देने की मांग की जबकि सरकार ने इस मुद्दे से पल्ला झाड़ते हुए कहा कि यह राज्य सरकार का मामला है।

बसपा प्रमुख मायावती ने आज शून्यकाल में यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि आगरा में आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) के सहयोगी संगठन बजरंग दल ने कुछ मुसलमानों पर दबाव डालकर और प्रलोभन देकर उनका धर्मपरिवर्तन करवाया। उन्होंने कहा कि भारत के संविधान के तहत किसी पर दबाव डालकर या प्रलोभन देकर धर्मान्तरण करवाना गैर कानूनी है।

सरकार का पक्ष रखते हुए संसदीय कार्य राज्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि इस मुद्दे पर उत्तर प्रदेश सरकार ने प्राथमिकी दर्ज करवायी है। उन्होंने कहा कि कानून एवं व्यवस्था राज्य सरकार का विषय है। इस मामले में कार्रवाई राज्य सरकार को करना है। केंद्र सरकार इसमें कोई कार्रवाई नहीं कर सकती।

नकवी ने इस मुद्दे में राजनीतिक कारणों से आरएसएस का नाम लेने पर आपत्ति जताते हुए कहा कि इस मामले में किसी संगठन का नाम लेना उपयुक्त नहीं है। उन्होंने आसन से कहा कि आरएसएस का नाम सदन की कार्यवाही से निकाल दिया जाना चाहिए।

इससे पूर्व मायावती ने दावा किया कि इस माह के अंत में अलीगढ़ में भी एक ऐसे ही आयोजन की तैयारियां की जा रही हैं जिसमें ईसाइयों का धर्मांतरण कर उन्हें हिन्दू बनाया जायेगा। उन्होंने कहा कि संविधान भारत में धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी देता है। उन्होंने कहा कि संविधान के तहत लोगों के जानमाल और धार्मिक आजादी की रक्षा करना केंद्र एवं राज्य सरकार, दोनों की जिम्मेदारी है।

मायावती ने कहा कि केंद्र सरकार को आगरा की घटना को गंभीरता से लेना चाहिए और ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार इस मामले में यह कहकर नहीं बच सकती कि यह राज्य का मुद्दा है। उन्होंने कहा कि सरकार को इस मामले में जवाब देना चाहिए और इस तरह की जबरन धर्मान्तरण की घटनाओं को रोकना चाहिए अन्यथा देश में सांप्रदायिक तनाव फैल जायेगा।

कांग्रेस, वाम, तृणमूल कांग्रेस, जदयू सहित विभिन्न दलों के सदस्यों ने भी इस मुद्दे पर सरकार से जवाब मांगते हुए देश में धर्मनिरपेक्षता को बरकरार रखने की मांग की।
माकपा नेता सीताराम येचुरी ने मांग की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सदन में आकर इस मुद्दे पर जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘भारत एक जनतांत्रिक धर्मनिरपेक्ष गणतंत्र है और यह बना रहेगा। इसे बदलने का प्रयास नहीं होना चाहिए। सपा के नरेश अग्रवाल ने कहा कि इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली गयी है तथा कार्रवाई की जा रही है।

कांग्रेस के दिग्विजय सिंह ने कहा कि किसी का दबाव या प्रलोभन देकर धर्मान्तरण करवाना एक जुर्म है। उन्होंने कहा कि इस मामले में गृह मंत्री को जवाब देना चाहिए। इस मामले में सत्ता पक्ष के सदस्यों ने आरएसएस का नाम लिये जाने का कड़ा विरोध करते हुए शून्यकाल चलने देने की मांग की।

इसी बीच जब कांग्रेस नेता आनंद शर्मा, जदयू नेता शरद यादव तथा कुछ अन्य विपक्षी नेताओं ने इस मामले में अपनी बात कहनी चाही तो उपसभापति पी जे कुरियन ने उनसे शून्यकाल चलने देने को कहा। कुरियन ने कहा, ‘‘सरकार ने संविधान की शपथ ली है। वह संविधान की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है। यदि संविधान का उल्लंघन होता है तो सरकार उसका संज्ञान लेगी और उस पर कार्रवाई करेगी।’’उन्होंने सदस्यों से कहा कि यदि वे इस मुद्दे पर चर्चा चाहते हैं तो वे संबद्ध नियमों के तहत नोटिस दे सकते हैं।

उधर लोकसभा में भी तृणमूल कांग्रेस सदस्यों ने अपने हाथ में अखबार की प्रति लहराते हुए आगरा में धर्मपरिवर्तन के संबंध में कथित धोखाधड़ी का मामला उठाया। सपा, राकांपा सदस्यों ने भी इसका समर्थन किया। तृणमूल सदस्य सुल्तान अहमद ने कहा, अगरा में क्या हो रहा है? धर्मपरिवर्तन के नाम पर क्या हो रहा है? प्रधानमंत्रीजी सदन में मौजूद हैं, आप अपने लोगों को ऐसा करने से रोकें।

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