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आचार संहिता के उल्लंघन के आरोप में ममता बनर्जी को मिला चुनाव आयोग का नोटिस

चुनाव आयोग ने बीते शनिवार को आसनसोल की एक रैली में चुनावी आचार संहिता के उल्लंघन के आरोप में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को गुरुवार को कारण बताओ नोटिस भेजा है।

Author कोलकाता/नई दिल्ली | April 15, 2016 2:57 AM
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (फाइल फोटो)

चुनाव आयोग ने बीते शनिवार को आसनसोल की एक रैली में चुनावी आचार संहिता के उल्लंघन के आरोप में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को गुरुवार को कारण बताओ नोटिस भेजा है। आयोग ने बीरभूम जिले में तृणमूल के बाहुबली नेता अणुब्रत मंडल के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई करने की बात कही है। विपक्ष ने मंडल पर वोटरों को धमकाने की शिकायत की थी। मुख्य चुनाव आयुक्त नसीम जैदी ने रविवार को दूसरे चरण के मतदान की तैयारियों का जायजा लेने के बाद गुरुवार को यहां पत्रकारों को इसकी जानकारी दी।

ममता ने उस रैली में आसनसोल को अलग जिला घोषित करने का भरोसा दिया था। अपनी उस रैली में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी जमकर हमला किया था और कहा था कि वे मोदी की घरेलू नौकरानी नहीं हैं जो उनके बुलावे पर दौड़ी चली जाएं। इससे एक दिन पहले राज्य के चुनावी दौरे पर आए मोदी ने कहा था कि ममता विकास के मुद्दे पर बुलाई गई बैठकों में शामिल नहीं होतीं।

विपक्षी दलों ने ममता की उस रैली में आचार संहिता के उल्लंघन की शिकायत की थी। कारण बताओ नोटिस की सूचना मिलने के बाद बीरभूम जिले के मुरारई में तृणमूल की एक रैली में ममता ने कहा कि उन्होंने जो कहा है अच्छा किया है। वे हजार बार बोलेंगी, लाख बार बोलेंगी। उन्होंने कहा कि वे एक-एक इंच समझ लेंगी। ममता ने चुनाव आयोग को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि एक नहीं 40 पत्र (कारण बताओ) भेजने पर भी कोई फायदा नहीं होगा।

स्टिंग मामले में सांसदों से जवाब तलब

लोकसभा की आचार समिति ने तृणमूल कांग्रेस के उन पांच सांसदों से स्पष्टीकरण मांगा है जो कथित तौर पर पिछले महीने एक स्टिंग आपरेशन में नकदी स्वीकार करते हुए पकड़े गए थे। सूत्रों के मुताबिक भाजपा सांसद लालकृष्ण आडवाणी की अध्यक्षता वाली समिति ने तृणमूल सांसदों से मामले में अपनी स्थिति समझाने के लिए कहा है।

समिति ने इससे पहले स्टिंग का वीडियो टेप जारी करने वाले समाचार पोर्टल नारद न्यूज से क्लिप के स्रोत के बारे में पूछा था। समिति ने पोर्टल से यह भी पूछा था कि क्या वह अभी भी स्टिंग पर कायम है। समझा जाता है कि समिति ने समाचार पोर्टल का जवाब मिलने के बाद सांसदों से स्पष्टीकरण मांगा है। पिछले महीने जारी कथित स्टिंग में तृणमूल कांग्रेस के पांच लोकसभा सांसदों सौगत राय, सुल्तान अहमद, सुवेंदु अधिकारी, काकोली घोष दस्तिदार और प्रसून बनर्जी व राज्यसभा सदस्य मुकुल राय को कथित तौर पर एक फर्जी कंपनी के प्रतिनिधियों से धनराशि स्वीकार करते हुए दिखाया गया था।

संपर्क किए जाने पर तृणमूल कांगे्रस सांसद सुल्तान अहमद ने गुरुवार को कहा-मैंने नोटिस के बारे में सुना है। मैं चुनाव के लिए प्रचार अभियान पर हूं और मुझे अभी तक नोटिस नहीं मिला है। जब मुझे मिलेगा मैं देखूंगा। यह मामला एक नया राजनीतिक विवाद शुरू कर सकता है क्योंकि यह तब प्रकाश में आया है जब पश्चिम बंगाल मेंं विधानसभा चुनाव चल रहा है और अन्य दलों ने वहां सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ चौतरफा हमला बोला है।

जब भाजपा, कांग्रेस और वाम दल संसद और संसद के बाहर तृणमूल कांग्रेस पर इस मामले को लेकर हमला बोल रहे थे ममता बनर्जी की पार्टी ने कहा कि आरोप पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक षड्यंत्र का हिस्सा है। 16 मार्च को लोकसभाध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने कहा था कि तृणमूल कांग्रेस सदस्यों के खिलाफ रिश्वत के आरोपों की लोकसभा की आचार समिति द्वारा जांच की जाएगी। उन्होंने साथ ही कहा कि बहुत गंभीर आरोपों का संसद की विश्वसनीयता पर प्रभाव हुआ है।

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