मंदिर के खंभों पर मुख्यमंत्री की तस्वीर उकेरी! विपक्षी पार्टियों का फूटा गुस्सा

भाजपा विधायक टी राजा सिंह ने कहा कि केसीआर खुद को अर्ध-देवता के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहे थे।

Author हैदराबाद | Updated: September 8, 2019 2:01 PM
KCRयादगिरीगुट्टा हिल्स में श्री लक्ष्मी नरसिम्हा स्वामी मंदिर, जिसे अब यादाद्री के रूप में जाना जाता है, तेलंगाना का एक मशहूर मंदिर है।

तेलंगाना में विपक्षी दलों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव को कथित तौर पर खुद को एक भगवान के रूप में चित्रित करने के लिए निंदा की है। दरअसल उनके चेहरे के शिलालेख यदाद्री मंदिर पर खंभों पर खोदे गए थे, जिन्हें पुनर्निर्मित और विस्तारित किया जा रहा है। कुछ खंभों पर TRS का चुनावी प्रतीक (कार) भी उकेरा गया था। प्रदेश में विपक्षी दल भाजपा और कांग्रेस ने इसे शर्मनाक करार दिया है जबकि यदाद्री मंदिर विकास प्राधिकरण के सीईओ जी किशनराव ने कहा कि कुछ शिल्पकारों ने प्रशंसा में खंभे पर केसीआर के चेहरे को उकेर दिया।

उन्होंने कहा, ‘सीएम और सरकार ने उनसे ऐसा करने के लिए नहीं कहा और ना ही उन्होंने इसमें दखल दिया। मजदूरों ने अपनी मर्जी से ऐसा किया। महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी की भी नक्काशी की गई है। इसका कोई राजनीतिक मकसद नहीं है और अगर आपत्तियां हैं तो हम उन्हें दूर करेंगे।’

बता दें कि यादगिरीगुट्टा हिल्स में श्री लक्ष्मी नरसिम्हा स्वामी मंदिर, जिसे अब यादाद्री के रूप में जाना जाता है, तेलंगाना का एक मशहूर मंदिर है। केसीआर ने तिरुपति मंदिर के प्रतिद्वंद्वी मंदिर के लिए 1,800 करोड़ रुपए की विस्तार और नवीकरण परियोजना शुरू की थी। मंदिर के मुख्य वास्तुकार आनंद साई ने बताया कि कमल और चक्र की नक्काशी (बीजेपी और टीडीपी के प्रतीक) भी स्तंभों पर देखें जा सकते हैं। उन्होंने कहा, ‘ये मूर्तिकारों ने खुद किया है। उन्होंने दबाव के कारण नहीं बल्कि प्रशंसा के चलते केसीआर के चेहरे को उकेरा।’

इसी बीच भाजपा विधायक टी राजा सिंह ने कहा कि केसीआर खुद को अर्ध-देवता के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि वे मंदिर में लगाने के लिए केसीआर की मूर्तियां भी बना रहे हैं। यह शर्मनाक है। इस तरह की नक्काशी और शिलालेख हटा दिए जाने चाहिए।’

वहीं कांग्रेस नेता विजय शांति श्रीनिवास ने कहा कि केसीआर मंदिर के स्तंभों पर अपने चेहरे के शिलालेख के जरिए एक मध्यकालीन राजा की तरह व्यवहार कर रहे थे। पूर्व कांग्रेस सांसद जी नारायण रेड्डी ने कहा कि केसीआर जनता द्वारा चुने हुए प्रतिद्वंदी है और वह कोई राजा नहीं है। धर्म में राजनीति को मिलाना असंवैधानिक है।

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