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चिटफंड कंपनियों पर सख्ती वाले विधेयक पर विपक्ष आपस में उलझा

विधेयक को पेश करने के दौरान तृणमूल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के सदस्य सदन में हंगामा कर रहे थे। हंगामे के दौरान ही लोकसभा अध्यक्ष ने जैसे ही विधेयक पर सदस्यों को बोलने के लिए नाम लेने शुरू किए हंगामे की दिशा ही बदल गई।

Author February 14, 2019 6:50 AM
लोकसभा। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

मौजूदा संसद के आखिरी सत्र के आखरी दिन लोकसभा में जो कुछ हुआ उसकी कल्पना भी सत्ता पक्ष के सदस्यों ने नहीं की थी। फर्जी चिटफंड कंपनियों के खिलाफ कारगर कार्रवाई के उद्देश्य से लाए गए ‘अविनियमित निक्षेप स्कीम पाबंदी विधेयक, 2018’ को बुधवार को लोकसभा ने मंजूरी दे दी। विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि सभी दलों ने गरीबों के लिए लाए गए इस विधेयक का समर्थन किया है। विधेयक को पेश करने के दौरान तृणमूल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के सदस्य सदन में हंगामा कर रहे थे। हंगामे के दौरान ही लोकसभा अध्यक्ष ने जैसे ही विधेयक पर सदस्यों को बोलने के लिए नाम लेने शुरू किए हंगामे की दिशा ही बदल गई।

पहले कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी ने सारदा मामले को तृणमूल से जोड़कर बोलना शुरू किया और कहा कि 25 लाख गरीबों के पैसे को लूट कर यह पार्टी पश्चिम बंगाल में सत्ता में आई है। हंगामें को हवा माकपा के मो. सलीम ने दे दी। उन्होंने कहा कि अगर इस लूट की ठीक से जांच हो जाए तो तृणमूल के आधे सांसद जेल चले जाएंगे। केंद्र सरकार उनसे गरीबों के पैसे की वसूली करे।

यह अजीब संयोग है कि जिस समय लोकसभा में विपक्ष के ही सदस्य आपस में लड़ रहे थे, उसके घंटे भर बाद ज्यादातर विपक्ष के सदस्य जंतर-मंतर पर तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के धरने में शामिल हो रहे थे। वैसे घंटे भर में सदन में अकेले पड़ने पर धीरे-धीरे तृणमूल के सदस्य अपनी सीट पर बैठ गए या पार्टी के धरने में पहुंच गए।

कांग्रेस सदस्य चौधरी और माकपा के सलीम के भाषण के बाद तो अजीब स्थिति पैदा हो गई। तृणमूल सदस्य पहले अध्यक्ष के आसन के सामने जाकर भाजपा के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। बाद में सलीम के बोलने पर वे आसन से हट कर सलीम की सीट के पास आकर माकपा और सलीम के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। हालात ऐसे हो गए कि अधीर रंजन चौधरी को कुछ देर के लिए सदन से बाहर निकल गए।

मामला बिगड़ता देख माकपा के कई सदस्य सलीम के सामने काफी देर तक उनके बचाव में खड़े रहे। संयोग ऐसा रहा कि जितने भी दलों के सदस्य बोलने खड़े हुए वे सभी बिल के पक्ष में ही बोलते दिखे। पहले तो गुस्से में तृणमूल सांसद सौगत राय अधीर रंजन चौधरी को ‘माफिया’ बोल गए लेकिन बाद में वे और सुदीप बनर्जी ने माहौल को हल्का करने का प्रयास किया। सौगत राय सदस्यों को सलीम के सामने से हटाते दिखे तो कल्याण बनर्जी नारेबाजी की अगुवाई करते दिखे। राय ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में माकपा और कांग्रेस के लोग सारदा तथा रोजवैली जैसी कंपनियों से जुड़े हैं।

सुदीप बनर्जी ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार ने इस विधेयक से ज्यादा मजबूत विधेयक पारित किया है। उन्होंने कहा कि सरकार को चिटफंड शब्द को प्रतिबंधित कर देना चाहिए। इस पूरे हंगामे के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह और दूसरे मंत्री चुप्प बैठे रहे और सत्ता पक्ष के अन्य सदस्य मेज थपथपाते रहे। वहीं कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी अधीर रंजन के भाषण के दौरान पीछे मुड़कर उन्हें देखती रहीं और बाद में उठ कर चली गईं।

इससे पहले सदन में विधेयक को चर्चा एवं पारित कराने के लिए रखते हुए वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने सदन में प्रदर्शन कर रहे तृणमूल सदस्यों को आड़े हाथों लिया और कहा कि कुछ लोग विधेयक में अड़चन डालकर इसे लटकाना चाहते हैं। गोयल ने कहा कि जुलाई 2014 से मई 2018 के बीच आई इस तरह की योजनाओं में ठगी के 978 मामलों पर विचार हुआ था, जिसमें से अकेले 326 मामले पश्चिम बंगाल के थे। गोयल ने कहा सरकार ने इसके निराकरण के लिए तेज गति से कार्य किया है। मंत्री के जवाब के बाद सदन ने आरएसपी के एनके प्रेमचंद्रन के कुछ संशोधनों को नामंजूर करते हुए ध्वनिमत से विधेयक को मंजूरी प्रदान की।

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