Opposition dubs Rafale deal a scam, Congress demands setting up of JPC - Jansatta
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कांग्रेस ने की राफेल लड़ाकू विमान सौदे की जेपीसी से जांच कराने की मांग

लोकसभा में कांग्रेस सदस्य के सी वेणुगोपाल ने राफेल लड़ाकू विमान सौदे को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से इसकी जांच कराने की मांग की ।

कांग्रेस का आरोप है कि एनडीए सरकार ने यूपीए सरकार में किए गए सौदे के लिए ज्यादा भुगतान किया था।

लोकसभा में कांग्रेस सदस्य के सी वेणुगोपाल ने राफेल लड़ाकू विमान सौदे को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए संयुक्त संसदीय समिति :जेपीसी: से इसकी जांच कराने की मांग की । लोकसभा में वर्ष 2018 – 19 के लिए अनुदानों की अनुपूरक मांगों – प्रथम बैच पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए वेणुगोपाल ने राफेल लड़ाकू विमान सौदे पर रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण को फ्रांस के साथ किए गए समझौते के गोपनीय प्रावधान को सदन में पेश करने की चुनौती दी। उन्होंने कहा कि राफेल विमानों के लिए संप्रग सरकार के समय किए जाने वाले अनुबंध के तहत 108 विमानों का निर्माण भारत में होना था। यह निर्माण एचएएल में होना था जबकि 18 विमान ही फ्रांस से आने थे। प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के तहत 50 फीसदी राशि इस देश में खर्च की जानी थी। लेकिन सरकार ने इन सभी शर्तों को हटा दिया।

इस पर, सदन में शोरगुल के दौरान भाजपा सदस्य निशिकांत दूबे ने कहा कि यह गोपनीय कागजात हैं और इस तरह किसी पर कैसे आरोप लगाए जा सकते हैं। वेणुगोपाल ने राफेल सौदे को एक बड़ा घोटाला बताते हुए इसकी संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) जांच कराए जाने की मांग की।  उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार चीजों को छिपा रही है तथा गोपनीयता के नाम पर देश को लूटा जा रहा है।

गौरतलब है कि इससे पहले कांग्रेस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन को सौंप चुकी है। यह नोटिस फ्रांस से खरीदे गए राफेल लड़ाकू विमानों की कीमत न बताकर संसद को कथित तौर पर गुमराह करने पर दिया गया था। लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने लोकसभा अध्यक्ष को सौंपे पत्र में कहा था “मैं लोकसभा में 20 जुलाई को अविश्वास प्रस्ताव पर बहस के दौरान भाषण में एक भ्रामक बयान देने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ विशेषाधिकार का एक नोटिस देना चाहता हूं।”

उन्होंने पत्र में कहा है, “प्रधानमंत्री ने कहा था कि राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद की कीमत का खुलासा करने की मांग राष्ट्रहित के खिलाफ है और इस बारे में भारत सरकार और फ्रांस सरकार के बयान विरोधाभाषी थे।  उन्होंने कहा कि समझौते में पारदर्शिता का प्रधानमंत्री का दावा तथ्यात्मक रूप से गलत, असत्य और जानबूझकर सदन को गुमराह करने के इरादे से किया गया था। खड़गे ने आरोप लगाया कि सदन में रक्षामंत्री का वक्तव्य बिल्कुल झूठा था और इस तरह उन्होंने न सिर्फ जानबूझकर सदन के सदस्यों को गुमराह किया, बल्कि पूरे राष्ट्र को भी गुमराह किया था।

भाषा के इनपुट के साथ।

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