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महाराष्ट्र में किसान आंदोलन के पीछे विपक्ष, पूर्व सीएम फडणवीस बोले- यहां कोई समर्थन नहीं

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता देवेंद्र फडणवीस का कहना है कि महाराष्ट्र में कुछ पार्टियां हैं जो कि ढोंग करने का काम कर रही हैं।

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता देवेंद्र फडणवीस।

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता देवेंद्र फडणवीस का कहना है कि महाराष्ट्र में कुछ पार्टियां हैं जो कि ढोंग करने का काम कर रही हैं। उनके नेता गुमराह करने का काम कर रहे हैं। महाराष्ट्र में कहीं पर भी किसानों ने इतने दिनों में कोई आंदोलन नहीं किया। कुछ पार्टियां कुछ लोगों को गुमराह करके आंदोलन करने की कोशिश कर रही हैं। इस आंदोलन का कोई समर्थन महाराष्ट्र के अंदर किसान नहीं कर रहे हैं।

फडणवीस ने कहा, ”महाराष्ट्र में कांग्रेस एनसीपी ने पहले ही कॉन्ट्रैक्ट खेती शुरू कर दी थी। तब से लेकर आज तक महाराष्ट्र में कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग चल रही है। महाराष्ट्र में कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग का कानून बने तो ठीक और केंद्र सरकार बनाए तो गलत इस तरह की जो दोगली नीति नहीं चलने वाली है। कांग्रेस ने तो 2019 में अपने घोषणापत्र में तक लिखा था कि अगर देश में उनकी सरकार बनी तो एपीएमसी को रद्द कर दिया जाएगा। इस तरह दोगली नीति बोलने वाले बहती गंगा में हाथ धोने का काम कर रहे हैं। महाराष्ट्र के किसानों का इस आंदोलन को कोई समर्थन नहीं है।”

बता दें कि महाराष्ट्र के 21 जिलों के किसान राजधानी मुंबई की ओर कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। किसानों की संख्या 15 हजार के करीब है। ऑल इंडिया किसान सभा की महाराष्ट्र इकाई ने यह जानकारी दी है कि किसान गाड़ियों,जीप और ट्रक में लाल झंडे लेकर मुंबई पहुंच रहे हैं। एनसीपी और कांग्रेस ने इस रैली को अपना समर्थन दिया है।

इससे पहले एनसीपी चीफ शरद पवार ने केंद्र सरकार को चेताया था कि अगर सरकार किसानों की भावनाओं को नहीं समझती है तो आगे इसके परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। पहले भी उन्होंने कहा था कि सरकार को किसानों के सब्र की परीक्षा नहीं लेनी चाहिए।

बता दें कि 26 जनवरी को किसान दिल्ली के बाहरी रिंग रोड पर ट्रैक्टर के साथ रैली करेंगे। रविवार को दिल्ली पुलिस ने किसानों को ऐसा करने की इजाजत दे दी थी। मालूम हो कि किसानों से 11 बार वार्ता कर चुकी केंद्र सरकार नहीं चाहती थी कि यह रैली आयोजित हो। बता दें कि 2 महीने से ज्यादा समय हो गया है किसान दिल्ली की सीमा पर बैठकर कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने कृषि कानून को लागू किए जाने पर रोक लगाई हुई है।

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