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धर्म परिवर्तन के मुद्दे को लेकर संसद में नोक-झोक

धर्मांतरण और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसदों के बयानों को लेकर राज्यसभा में लगातार तीसरे दिन बुधवार को भी हंगामा जारी रहा, जिसके कारण सदन को कई बार स्थगन का सामना करना पड़ा। विपक्ष इस बात से भी नाराज है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाजपा संसदीय दल की बैठक में बयान दिया, लेकिन […]

Author December 18, 2014 1:46 PM

धर्मांतरण और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसदों के बयानों को लेकर राज्यसभा में लगातार तीसरे दिन बुधवार को भी हंगामा जारी रहा, जिसके कारण सदन को कई बार स्थगन का सामना करना पड़ा। विपक्ष इस बात से भी नाराज है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाजपा संसदीय दल की बैठक में बयान दिया, लेकिन वह सदन में नहीं आए। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता नरेश अग्रवाल ने यह मुद्दा उठाया। अग्रवाल ने प्रधानमंत्री द्वारा पार्टी सदस्यों को ‘लक्ष्मण रेखा’ न लांघने के संबंध में दी गई हिदायत का उल्लेख करते हुए कहा, ‘‘हमने अखबारों में पढ़ा है कि भाजपा की संसदीय दल की बैठक में कुछ नीतिगत निर्णय लिए गए हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘यदि उनके मंत्री कुछ गलत कर रहे हैं, तो सदन में सफाई देना उनकी जिम्मेदारी है।’’ केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने हालांकि, इस आरोप को खारिज कर दिया कि किसी तरह का नीतिगत फैसला किया गया है। वित्त मंत्री ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री ने बैठक के दौरान किसी तरह का नीतिगत फैसला नहीं किया है। मेरे सामने व्यवस्था का सवाल है। लेकिन व्यवस्था के प्रश्न की आड़ में क्या नरेश अग्रवार हर दिन अव्यवस्था का सवाल उठा सकते हैं।’’ कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने इसी मुद्दे पर व्यवस्था का प्रश्न खड़ा किया। तिवारी ने कहा, ‘‘हम प्रधानमंत्री को सिर्फ यह बता रहे हैं कि आपके लोग देश में असहिष्णुता फैला रहे हैं। अगर वह इस बात को स्वीकार कर रहे हैं कि कुछ लोग लक्ष्मण रेखा लांघ रहे हैं, तो वह बताएं कि कौन-सी लक्ष्मण रेखा लांघी जा रही है।’’ भाजपा नेता तरुण विजय ने इसके बाद शिकायत की कि उन्हें शून्यकाल के दौरान मुद्दे उठाने नहीं दिया गया।

माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेता सीताराम येचुरी ने कहा कि वह अव्यवस्था से जुडम एक मुद्दा उठाना चाहते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘मैं यह जानना चाहता हूं कि क्या प्रधानमंत्री सदन में आएंगे, ताकि हम चर्चा कर सकें। क्या प्रधानमंत्री यहां आना चाहेंगे। सदन के बाहर भाषण देने के बदले वह यहां आएं और सदन में बोलें।’’ कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने शिकायत की कि विपक्षी नेताओं को बोलने नहीं दिया जा रहा। शर्मा ने कहा, ‘‘जब कभी विपक्षी नेता बोलना चाहते हैं, सत्तारूढ़ पार्टी हमेशा सदन में बाधा उत्पन्न करती है।’’ जैसे ही विपक्षी सदस्यों ने प्रधानमंत्री की उपस्थिति की मांग करने वाला तर्क प्रस्तुत किया, सत्ता पक्ष ने भी अपने तर्क प्रस्तुत किए।

उपसभापति पी.जे.कुरियन ने सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। कार्यवाही फिर शुरू होने पर विपक्षी दलों के सदस्यों ने प्रश्नकाल फिर नहीं चलने दिया। अग्रवाल ने सभापति से अनुरोध किया कि अन्य कामकाज स्थगित करने से संबंधित उनके नोटिस को स्वीकार कर लिया जाए और चर्चा शुरू हो। हालांकि, सभापति एम. हामिद अंसारी ने नोटिस को अस्वीकार कर दिया। उन्होंने ऐसा देश में सांप्रदायिक हालात पर एक चर्चा पहले से सूचीबद्ध होने के कारण किया। अग्रवाल के बार-बार अनुरोध करने पर सभापति ने गुस्से में कहा, ‘‘आपके अनुसार सदन के बाकी सभी कामकाज क्यों स्थगित किए जाएं।’’ सभापति ने सीट छोड़ कर गलियारे में खड़े सदस्यों को फटकार लगाई। अंसारी ने कहा, ‘‘आप यहां से बात करने वाले कौन हैं, आपको इस गलियारे में खड़े होने का हक नहीं है।’’

हंगामा जारी रहने पर ऊपरी सदन की कार्यवाही फिर 15 मिनट के लिए स्थगित कर दी गई। सभापति ने एकबार फिर कहा कि चर्चा तय है, लेकिन विपक्ष प्रधानमंत्री को बुलाने की मांग पर अड़ा रहा। अंसारी ने कहा, ‘‘आप अपने पक्ष का ख्याल रखें, उन्हें अपने पक्ष का ख्याल रखने दें। सरकार की संयुक्त जिम्मेदारी है।’’ विपक्ष हालांकि, नहीं झुका और सदन की कार्यवाही अपराह्न दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

विपक्ष मुसलमानों को हिंदू बनाने की हालिया खबरों और सांसद योगी आदित्यनाथ के धर्मातरण कार्यक्रम से संबंधित बयान के खिलाफ विरोध जता रहा है। आदित्यनाथ ने एक बयान में कहा था कि इसमें कोई बुराई नहीं है अगर लोग अपनी इच्छा से दोबारा हिंदू धर्म अपनाना चाहते हैं। भाजपा सूत्रों ने कहा कि मोदी ने मंगलवार को संसदीय दल की बैठक में सदस्यों को आगाह करते हुए कहा था कि वे विवादास्पद बयान देकर ‘लक्ष्मण रेखा’ न लांघें।

 

 

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