ताज़ा खबर
 

विज्ञान मंत्रालय की राय- कोरोना वैक्‍सीन 2021 से पहले असंभव, I&B ने कहा- यह आधिकारिक वर्जन नहीं

विज्ञान और तकनीक मंत्रालय की राय में ऐसा 2021 से पहले होना संभव नहीं है। विज्ञान मंत्रालय ने अपने तहत चलने वाली समाचार सेवा इंडिया वायर सर्विस के जरिए इस लेख को तमाम मीडिया संस्‍थानों को भेजा।

प्रतीकात्मक तस्वीर

COVID-19 या कोरोना के संक्रमण से बचाने वाली वैक्‍सीन कब तक आम लोगों के लिए उपलब्‍ध हो सकेगी, इसे लेकर केंद्र सरकार में एक राय नहीं है। विज्ञान और तकनीक मंत्रालय की राय में ऐसा 2021 से पहले होना संभव नहीं है, लेकिन सूचना प्रसारण मंत्रालय इसे आधिकारिक वर्जन नहीं मानता। यह बात तब सामने आई जब हमने वैक्‍सीन आने के समय के बारे में एक विवाद पर सरकार की ओर से ‘फैक्‍ट चेक’ करवाया।

विवाद क्‍या है: विवाद यह है कि विज्ञान व तकनीक मंत्रालय से जुड़े एक विशेषज्ञ ने लेख लिख कर बताया कि कोरोना वैक्‍सीन 2021 से पहले आम लोगों के लिए उपलब्‍ध नहीं हो सकती। मंत्रालय ने अपने तहत चलने वाली समाचार सेवा इंडिया वायर सर्विस के जरिए इस लेख को तमाम मीडिया संस्‍थानों को भेजा। लेकिन अगले दिन प्रेस इन्‍फॉरमेशन ब्‍यूरो (पीआईबी) ने जब यह लेख जारी किया तो उसमें से वो लाइन हटा दी, जिसमें टीका के 2021 से पहले नहीं आ पाने की बात कही गई थी। (इस प्रकरण को विस्‍तार से जानने के लिए यहां क्‍लिक करें)

जनसत्‍ता.कॉम ने पीआईबी (जो सूचना व प्रसारण मंत्रालय के तहत काम करता है) की ‘फैक्‍ट चेक यूनिट’ से इस बारे में खबर की सत्‍यता जांचने के लिए संपर्क किया। जवाब में कहा गया कि इस खबर के बारे में फैक्‍ट चेक यूनिट आधिकारिक वर्जन उपलब्‍ध करा रहा है। साथ में पीआईबी द्वारा जारी उस प्रेस रिलीज का लिंक दिया गया, जिसमें 2021 से पहले टीका नहीं आ सकने वाली बात का जिक्र नहीं है। नीचे दखें स्‍क्रीनशॉट

पीआईबी नेे फैक्‍ट चेक यूनिट इस मकसद से बनाया है कि भ्रामक, गलत या विरोधाभासी खबरों का प्रचार-प्रसार रोका जा सके। ऐसी खबरों की जांच कर तथ्‍यात्‍मक खबर बताई जा सके।

कोरोना से बचाव की वैक्‍सीन आने के समय को लेकर विरोधाभासी खबरें कई दिनों से चल रही हैं। हालांकि, यह विरोधाभास सरकार की ओर से है। आईसीएमआर ने बीते हफ्ते एक चिट्ठी लिखकर 12 संस्‍थानों को कहा था कि भारत बायोटेक द्वारा बनाई जा रही कोरोना वैक्‍सीन COVAXIN का क्‍लीनिकल ट्रायल पूरा हो जाए और 15 अगस्‍त तक यह सुनिश्‍चित हो जाए कि यह टीका ‘आम लोगों के स्‍वास्‍थ्‍य’ के लिए इस्‍तेमाल के लिए तैयार हो।

इस समयसीमा को कई विशेषज्ञों ने अव्‍यावहारिक और कुुुछ ने तो असंभव भी बता दिया है। जिन संस्‍थानों को आईसीएमआर ने चिट्ठी भेजी, उनमें से भी कुछ ने कहा  कि व्‍यावहारिक ताैर पर क्‍लीनिकल ट्रायल की प्रक्रिया इतनी जल्‍दी पूरी नहीं की जा सकती। तब आईसीएमआर ने सफाई दी कि 15 अगस्‍त की समयसीमा का जिक्र ‘लाल फीताशाही’ से बचने के मकसद से किया गया था। वैज्ञानिकों की संस्‍था Indian Academy of Sciences ने भी कहा है कि 15 अगस्‍त की समयसीमा अतार्किक और हकीकत से परेे है।

इस समयसीमा के चलते सरकार की काफी किरकिरी हुई। आरोप लगे कि लाल किले से प्रधानमंत्री के स्‍वतंत्रता दिवस भाषण को दमदार बनाने के लिए लोगों के स्‍वास्‍थ्‍य से खिलवाड़ किया जा रहा है।

Next Stories
1 कुवैत सरकार ने पेश किया नया प्रवासी बिल, जा सकती हैं 8 लाख भारतीयों की नौकरियां
2 राहुल गांधी बोले- कोरोना, नोटबंदी और जीएसटी लागू करने की असफलता पर रिसर्च करेगा हार्वर्ड बिजनेस स्कूल
3 कोरोना वायरस की वैक्सीन के लिए अभी करना पड़ सकता है लंबा इंतजार, वैज्ञानिक बोले – 15 अगस्त तक संभव नहीं
ये पढ़ा क्या?
X