7 मई 2026 को ऑपरेशन सिंदूर को एक साल पूरा हो गया। पिछले साल इसी दिन भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में मौजूद आतंकी ठिकानों पर बड़ा हमला किया था। इसके बाद दोनों देशों के बीच चार दिनों तक तनाव और सैन्य गतिविधियां चली थीं। इस ऑपरेशन के बाद भारतीय सेना ने अपनी रणनीति में कई बड़े बदलाव शुरू किए हैं। खास तौर पर अंडरग्राउंड सैन्य ढांचे और मजबूत एयर डिफेंस सिस्टम पर तेजी से काम किया जा रहा है।
रक्षा अधिकारियों के मुताबिक ऑपरेशन सिंदूर और दुनिया में चल रहे युद्धों से मिले अनुभवों के बाद सेना अब युद्ध की नई तैयारी कर रही है। इसमें सैनिकों और हथियारों की तैनाती का तरीका बदलने, नई तकनीक अपनाने, ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम खरीदने और लड़ाई के नए तरीकों पर जोर दिया जा रहा है।
सबसे बड़ा फोकस बड़े पैमाने पर अंडरग्राउंड इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने पर है। सेना अब जमीन के नीचे कमांड और कंट्रोल सेंटर बना रही है। शुरुआत आर्मी के कमांड और कोर मुख्यालयों से की गई है और बाद में इसे डिविजन और निचले स्तर तक बढ़ाया जाएगा। इन सेंटरों में C4I2SR सिस्टम लगाया जाएगा। यानी कमांड, कंट्रोल, कम्युनिकेशन, कंप्यूटर, इंटेलिजेंस, सूचना, निगरानी और टोही से जुड़ी सभी सुविधाएं एक ही नेटवर्क पर होंगी। इससे सेना को युद्ध के दौरान रियल टाइम जानकारी मिलेगी और फैसले तेजी से लिए जा सकेंगे।
इन अंडरग्राउंड सेंटरों का मकसद युद्ध के दौरान सेना के कमांडरों को सुरक्षित माहौल में ऑपरेशन चलाने की सुविधा देना है। इसके अलावा सेना जमीन के नीचे मेडिकल फैसिलिटी, लंबे समय तक रहने लायक बंकर, गोला-बारूद और ईंधन भंडारण केंद्र भी बना रही है। सीमा के पास और अंदरूनी इलाकों में राशन स्टोर करने की भी तैयारी हो रही है।
अधिकारियों के अनुसार अब 3D प्रिंटेड बंकर भी बनाए जाएंगे। ये बंकर कम समय में तैयार हो जाते हैं, मजबूत होते हैं और जरूरत पड़ने पर आसानी से दूसरी जगह ले जाए जा सकते हैं। पश्चिमी सीमा के पास अतिरिक्त अंडरग्राउंड ढांचा तैयार करने पर भी काम हो रहा है ताकि युद्ध या किसी बड़े संकट के समय रोजमर्रा के सैन्य ऑपरेशन प्रभावित न हों।
देश के कई एयरफील्ड अब सिविल उपयोग के लिए भी खोले जा रहे हैं
सिर्फ सैन्य ढांचे ही नहीं, बल्कि ड्यूल-यूज इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी ध्यान दिया जा रहा है। यानी ऐसे एयरफील्ड, सड़कें और हाईवे तैयार किए जा रहे हैं जिन्हें जरूरत पड़ने पर सेना और आम नागरिक दोनों इस्तेमाल कर सकें। पिछले महीने भारतीय वायुसेना ने उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर इमरजेंसी लैंडिंग ड्रिल की थी। इसमें Su-30MKI, Jaguar, Mirage-2000 और C295 जैसे विमान शामिल हुए थे। देश के कई एयरफील्ड अब सिविल उपयोग के लिए भी खोले जा रहे हैं।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने भारत की ओर सस्ते ड्रोन के बड़े झुंड भेजे थे। इसी अनुभव और इजरायल-ईरान युद्ध से सबक लेते हुए भारत अब एयर डिफेंस सिस्टम को और मजबूत कर रहा है। सेना पूरे देश में “सुदर्शन चक्र” मिशन के तहत बड़ा एयर डिफेंस नेटवर्क तैयार करने की योजना पर काम कर रही है। DRDO की एक समिति इस परियोजना पर रिपोर्ट भी दे चुकी है।
इसके साथ ही सेना के मौजूदा “आकाशतीर” एयर डिफेंस सिस्टम को और बेहतर बनाया जा रहा है। यह एक स्वदेशी और ऑटोमैटिक एयर डिफेंस कंट्रोल सिस्टम है, जिसे वायुसेना के IACCS और नौसेना के TRIGUN सिस्टम से जोड़ा जा सकता है। इससे युद्ध के दौरान दुश्मन की हर गतिविधि की लाइव तस्वीर मिल सकेगी।
भारतीय वायुसेना का IACCS सिस्टम दुश्मन के विमान, मिसाइल और ड्रोन की पहचान कर उन्हें रोकने और नष्ट करने में मदद करता है। वहीं आकाशतीर सिस्टम मोबाइल है और युद्ध क्षेत्र में आसानी से तैनात किया जा सकता है।
भारत अब बड़ी संख्या में एंटी-ड्रोन सिस्टम भी खरीद रहा है। इन्हें सेना के पुराने हथियारों के साथ जोड़ा जाएगा ताकि कम खर्च में ज्यादा सटीक हमला किया जा सके। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के कई ड्रोन पुराने L-70 गनों से मार गिराए गए थे। अब इन हथियारों को नई तकनीक से अपग्रेड किया जाएगा।
पूर्व वाइस चीफ ऑफ एयर स्टाफ एयर मार्शल नर्मदेश्वर तिवारी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने अपने सभी एयरबेस सुरक्षित रखे थे क्योंकि देश के पास पहले से मजबूत एयर डिफेंस सिस्टम था। लेकिन अब इसे और आधुनिक बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में ऐसे रडार और सेंसर जरूरी होंगे जो बैलिस्टिक मिसाइल से लेकर छोटे ड्रोन तक हर खतरे का जल्दी पता लगा सकें।
भारत अब और ज्यादा S-400 मिसाइल सिस्टम खरीदने की तैयारी कर रहा है। इसके साथ DRDO “प्रोजेक्ट कुशा” पर काम कर रहा है, जो लंबी दूरी तक मार करने वाला स्वदेशी एयर डिफेंस सिस्टम होगा। इसका मकसद सैन्य और नागरिक ठिकानों को हवाई हमलों से बचाना है।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के एक बड़े एयरबोर्न प्लेटफॉर्म को लगभग 300 किलोमीटर दूर से मार गिराया था। माना जाता है कि यह ELINT या AEW&C विमान था। इसे भारत के S-400 सिस्टम की बड़ी कामयाबी माना गया। भारतीय वायुसेना ने इसे अब तक की सबसे बड़ी सतह से हवा में मार करने वाली कार्रवाई बताया था। एक साल बाद अब साफ है कि ऑपरेशन सिंदूर सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं था, बल्कि उसने भारतीय सेना की भविष्य की तैयारी की दिशा ही बदल दी है।
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पहलगाम आतंकी हमले का करारा जवाब देते हुए भारत ने बुधवार तड़के पाकिस्तान में जबरदस्त एयर स्ट्राइक की। भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (Pakistan-occupied Kashmir) में नौ जगहों पर हमला किया। ये हमले बहावलपुर, कोटली और मुजफ्फराबाद में किए गए हैं। याद दिलाना होगा कि भारत ने 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद कहा था कि वह इसके दोषियों पर सख्त कार्रवाई करेगा। भारतीय सेना की इस कार्रवाई को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ नाम दिया गया है। बताना होगा कि बीते दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तीनों सेना प्रमुखों के साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल के साथ भी बैठक हुई थी। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक
