नेवी चीफ एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने बुधवार को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से जुड़ा एक बयान दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय नेवी ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, पाकिस्तान पर समुद्र के रास्ते हमला करने से ‘कुछ ही मिनट दूर’ थी।

मुंबई में आयोजित Naval Investiture Ceremony के दौरान एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी यह जानकारी साझा की। इस कार्यक्रम में उन्होंने नौसेना के जवानों को वीरता और विशिष्ट सेवा पुरस्कार प्रदान किए। उन्होंने कहा, ” ऑपरेशन सिंदूर ने हमारी नौसेना की उत्कृष्ट तैयारी और दृढ़ संकल्प को प्रदर्शित किया। हमारी यूनिट्स तेजी से तैनात हुईं और पूरे समय बेहद आक्रामक रुख बनाए रखा। अब यह कोई छिपी बात नहीं है कि हम पाकिस्तान पर समुद्र के जरिए हमला करने से बस कुछ ही मिनट दूर थे, तभी उन्होंने सैन्य कार्रवाई रोकने का अनुरोध किया। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तेज और दृढ़ फैसलों के जरिए भारतीय नेवी ने देश के विश्वास और भरोसे को और मजबूत किया।”

नौसेना प्रमुख ने यह भी कहा कि समुद्र अब केवल द्वितीयक क्षेत्र नहीं रह गए हैं जहां महाद्वीपों के आपसी संघर्ष होते हैं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में हालिया घटनाएं इसका उदाहरण हैं। उन्होंने कहा, ”हम ऐसे समय में इकट्ठा हुए हैं जब वैश्विक व्यवस्था बढ़ते विभाजन और तनाव से घिरी हुई है। ऐसे माहौल में समुद्र अब केवल द्वितीयक क्षेत्र नहीं हैं जहां महाद्वीपीय संघर्ष फैलते हैं।”

एडमिरल त्रिपाठी ने कहा, ”अब समुद्र केवल सहायक क्षेत्र नहीं रहे बल्कि वे फर्स्ट एरीना बनते जा रहे हैं जहां रणनीतिक इरादों का संकेत दिया जाता है और मुकाबला होता है जिसका असर कई बार असमान रूप से बड़ा होता है।”

उन्होंने कहा, ”स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में हालिया घटनाएं इसे स्पष्ट रूप से दिखाती हैं। संघर्ष शुरू होने के बाद से 23 से ज्यादा व्यापारिक जहाजों पर हमले हुए हैं। करीब 1,900 जहाज फंसे हुए हैं और रोजाना अब सिर्फ 6-7 जहाजों की आवाजाही हो रही है जबकि पहले यह औसतन लगभग 130 हुआ करती थी।” नेवी स्टाफ चीफ ने कहा कि मौजूदा हालात में संगठन, यूनिट और व्यक्ति- तीनों स्तर पर तैयारी, समझदारी और बेहतर काम करना बहुत जरूरी है।

एडमिरल त्रिपाठी ने कहा, ”ऑपरेशन सिंदूर और पूरे साल लगातार हाई लेवल के ऑपरेशनल कामकाज के अलावा हमें यह दिखाने पर भी गर्व हुआ कि हमारी क्षमताएं कितनी व्यापक और मजबूत हैं। हमने माननीय नरेंद्र मोदी को पश्चिमी तट पर भारतीय नेवी के साथ 17 घंटे की ऐतिहासिक रातभर की यात्रा के दौरान यह प्रदर्शित किया।”

उन्होंने कहा, ”इसके अलावा, भारतीय नौसेना ने क्षेत्र में ‘पहला जवाब देने वाले’ (फर्स्ट रिस्पॉन्डर) के रूप में भारत की प्रतिबद्धता को भी निभाया। कम समय और कठिन परिस्थितियों में कई HADR (मानवीय सहायता और आपदा राहत) मिशन जैसे म्यांमार में ऑपरेशन ब्रह्मा से लेकर श्री लंका में ऑपरेशन सागर बंधु तक किए।” उन्होंने कहा कि ‘आत्मनिर्भरता’ पर लगातार ध्यान देने से नौसेना ‘बिल्डर नेवी’ में बदलने में सफल रही है और क्षमताओं के विस्तार में तेजी आई है। महज एक साल में 12 जहाजों और पनडुब्बियों को कमीशन किया गया।