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शौचालयों के अलावा संपूर्ण साफ-सफाई पर सरकार का ध्यान, स्वच्छ सर्वेक्षण का बढ़ाया दायरा

पांच साल पहले गांधी जयंती के मौके पर 2014 में स्वच्छ भारत अभियान को शुरू किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य टॉयलेट के निर्माण और लोगों को जागरूक करके खुले में शौच को रोकना था। इस मुहिम का असर भी कारगर साबित रहा है।

इस तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक रूप में किया गया है। (फाइल फोटो सोर्स: द इंडियन एक्सप्रेस)

स्वच्छ भारत अभियान के तहत केंद्र सरकार देश भर में सर्वेक्षण करा रही है। हालांकि, सर्वेक्षण का लक्ष्य सिर्फ खुले में शौच या शौचालय नहीं है। बल्कि इसका दायरा खुले में शौच के अलावा ठोस और लिक्विड कचरा मैनेजमेंट भी है। गांवों में खुले शौच के अलावा प्लास्टिक कूड़ा और जल-जमाव जैसे स्थिति से निपटने के लिए सरकारी स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। 2014 से ग्रामीण स्वच्छता अभियान के अंतर्गत शौचालयों के निर्माण पर सरकार ने खास ध्यान दिया है। लेकिन, इसके साथ ही साथ ठोस एवं लिक्विड कूड़ा मैनेजमेंट को लेकर चुनौतियां खड़ी हैं।

पांच साल पहले गांधी जयंती के मौके पर 2014 में स्वच्छ भारत अभियान को शुरू किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य टॉयलेट के निर्माण और लोगों को जागरूक करके खुले में शौच को रोकना था। इस मुहिम का असर भी कारगर साबित रहा है। सरकारी आंकड़ों की माने तो सरकार 2 अक्टूबर 2019 तक के तय लक्ष्य (शौचालय निर्माण) को हासिल करने जा रही है। द हिंदू में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक स्वच्छ सर्वेक्षण 2019 की लॉन्चिंग के मौके पर जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखवात ने बताया, “ODF+ यानी खुले में शौच के साथ अन्य स्वच्छता की चुनौतियों के मुख्य रूप से चार चरण हैं। जिसमें ठोस कूड़ा मैनेजमेंट को बायोडिग्रेडबल कचरा और प्लास्टिक कचरे में बांटा गया है। वहीं, लिक्विड कूड़ा मैनेजमेंट को रसोई का गंदा पानी और मल का पान के रूप में बांटा गया है।”

शेखावत ने बताया, “हम अलग- अलग मॉड्यूल के लिए विशिष्ट प्रोटोकॉल पर काम कर रहे हैं। फिलहाल, अधिकांश गांवों में प्लास्टिक अपशिष्ट संग्रह या अपशिष्ट निपटान के लिए कोई तंत्र नहीं है।” एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि प्लास्टिक कचरे के संदर्भ में प्रोटोकॉल के तहत ब्लॉक स्तर पर कचरे का संग्रह और छंटाई की जाएगी। यदि संभव हुआ तो प्लास्टिक कचरे की रिसाइकलिंग के लिए भेजा जाएगा। अधिकारी ने बताया कि इसका उपयोग सीमेंट प्लांट और ईंट भट्ठों में करने का प्रस्ताव है। गौरतलब है कि सर्वे में 18,000 गावों को कवर करने का लक्ष्य है। लगभग एक जिल में 30 गांवो को शामिल किया जाएगा और 2.5 करोड़ से अधिक ग्रामीणों का फीडबैक लिया जाएगा।

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