पहलगाम आतंकी हमले को एक साल बीतने को आया लेकिन पिछले 365 दिन में एक भी दिन ऐसा नहीं बीता जब लेफ्टिनेंट विनय नरवाल के परिवार ने आंसू न बहाए हों। विनय नरवाल भारतीय नौसेना के अधिकारी थे और उस भयावह घटना में मारे गए 26 लोगों में शामिल थे। लेफ्टिनेंट विनय के पिता राजेश नरवाल ने कहा कि परिवार अभी तक अपने शोक से उबर नहीं पाया है और अपने जवान बेटे को याद करता रहता है जिसने भविष्य के लिए ना जाने क्या क्या सपने देखे थे।

लेफ्टिनेंट विनय और उनकी पत्नी हिमांशी दक्षिण कश्मीर के पहलगाम शहर में गए थे, जब आतंकवादियों ने 22 अप्रैल, 2025 को उन्हें बेहद करीब से गोली मार दी। इस घटना में ज्यादातर 25 अन्य लोग भी मारे गए थे जिनमें ज्यादातर पर्यटक थे। करनाल स्थित अपने आवास पर पत्रकारों से बात करते हुए राजेश नरवाल ने कहा कि पिछले एक साल से उनका परिवार लेफ्टिनेंट विनय की मौत के गम से जूझ रहा है।

विनय नरवाल की मृत्यु परिवार के लिए पीड़ादायक

राजेश नरवाल ने कहा कि लेफ्टिनेंट विनय की मृत्यु न केवल परिवार के लिए पीड़ादायक है, बल्कि राष्ट्र के लिए भी एक बड़ी क्षति है। उन्होंने कहा, “इस त्रासदी के बाद हमारी जिंदगी पटरी से उतर गई है। हम इस घटना से उबर नहीं पा रहे हैं।” उन्होंने कहा, “अपने जवान बेटे को खोने वाला बाप ही जानता है कि दर्द क्या होता है। समय बीतने के साथ, जीवन के छोटे-मोटे दुख से तो उबर सकते हैं, लेकिन यह दर्द हमेशा बना रहेगा।”

विनय ने ना जाने कितने सपने बुने थे- राजेश नरवाल

राजेश ने बताया कि विनय ने अपनी आगे की जिंदगी को लेकर ना जाने कितने सपने बुन रखे थे। उन्होंने कहा, “बहुत छोटी उम्र में वो अधिकारी बन गया था। एक डायरी में उसने अपनी भविष्य की योजनाओं का ब्यौरा लिख रखा था।” लेफ्टिनेंट के पिता ने कहा, “वह मेरा बेटा था, लेकिन मैं उसे एक फरिश्ता मानता हूं।”

मेरा बेटा वायुसेना में शामिल होना चाहता था- राजेश नरवाल

उन्होंने याद करते हुए कहा, “मुझे आज भी उसके चेहरे की वो खुशी याद है जब उसने मेरी उंगली पकड़कर चलना शुरू किया था।” राजेश ने यह भी याद किया कि विनय पहले वायुसेना में शामिल होना चाहता था लेकिन जब उसका चयन नौसेना में हुआ तो वो बहुत खुश हुआ। उन्होंने पिछले साल हुए आतंकी हमले के बाद परिवार को सरकार द्वारा दिए गए समर्थन की सराहना की।

लेफ्टिनेंट विनय के परिवार में उनकी पत्नी हिमांशी, बहन सृष्टि और माता-पिता राजेश और आशा हैं। मई में ऑपरेशन सिंदूर के बाद राजेश नरवाल ने भारत की कार्रवाई की सराहना की थी और नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की प्रशंसा करते हुए कहा था कि उसने 22 अप्रैल के हमले के दोषियों को कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने कहा था कि आतंकवादी भविष्य में इस तरह के हमले दोहराने से पहले “सौ बार सोचेंगे।”

पहलगाम हमले के एक साल बाद भी जख्म ताजा

कश्मीर के पहलगाम में पर्यटकों पर हुए आतंकी हमले को एक वर्ष होने को है, लेकिन पीड़ित परिवारों के जख्म अभी भी ताजा हैं और इंसाफ के सवाल कायम हैं। कई पीड़ितों को न्याय नहीं मिला है, तो कई की आंखों में आज भी उस मंजर का डर कायम है। कश्मीर के पहलगाम में पिछले साल 22 अप्रैल को लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादियों द्वारा किए गए हमले की पहली बरसी के मद्देनजर घाटी के पर्यटक स्थलों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। इस हमले में लश्कर के आतंकियों ने 26 लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी थी। पढ़ें पूरी खबर…