ONGC में सालों से ओबीसी आरक्षण नियमों की धज्जियां उड़ाने पर सख्त हुआ NCBC, जारी किया कारण बताओ नोटिस, जानें- पूरा मामला

एनसीबीसी की तरफ से जुटाए गए आंकड़ों में बताया गया है कि साल 1993 से तय संख्या के मुताबिक पिछड़े वर्ग के लोगों की भर्ती नहीं की है। कमीशन ने अपनी रिपोर्ट में यह भी पाया है कि कंपनी में ओबीसी कर्मचारियों का शोषण किया गया है।

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नेशनल कमीशन फॉर बैकवर्ड क्लासेज़ ने शुक्रवार को ओएनजीसी को नोटिस भेजा है। (फाइल फोटो)

नेशनल कमीशन फॉर बैकवर्ड क्लासेज़ ने शुक्रवार को ओएनजीसी को नोटिस भेजा है। ओएनजीसी पर आरोप है कि कंपनी ने आरक्षण के नियमों का उल्लंघन किया है और सालों से पिछड़े वर्ग के कर्मचारियों का शोषण कर रही है। 14 अगस्त को एनसीबीसी ने कंपनी को एक नोटिस भेज अपने सदस्यों के साथ रिव्यू मीटिंग में शामिल होने के लिए कहा था और उल्लंघन को लेकर जवाब मांगा था। कंपनी की तरफ से कोई जवाब नहीं मिलने के चलते एनसीबीसी ने कारण बताओ नोटिस भेजा है।

एनसीबीसी की तरफ से जुटाए गए आंकड़ों में बताया गया है कि साल 1993 से तय संख्या के मुताबिक पिछड़े वर्ग के लोगों की भर्ती नहीं की है। कमीशन ने अपनी रिपोर्ट में यह भी पाया है कि कंपनी में ओबीसी कर्मचारियों का शोषण किया गया है। द प्रिंट की खबर के मुताबिक कमीशन ने कंपनी को हाजिर होकर इस गड़बड़ी के बारे में जवाब देने को कहा है। इसके अलावा कहा गया है कि कंपनी अगर ऐसा करने में विफल होती है तो उसके खिलाफ सख्ती से कार्रवाई की जाएगी।

ओएनजीसी ने इस मुद्दे को लेकर कहा कि सोमवार को वह कमीशन को जवाब देगा। एनसीबीसी के  कारण बताओ नोटिस में कहा गया है कि आयोग को 25 अगस्त  2020 सुबह 11:30 बजे तक  जवाब देना है। अगर ऐसा करने में कंपनी विफल रहती है तो यह मान लिया जाएगा कि कंपनी के पास जवाब नहीं है और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

क्या है मामला: आयोग के नोटिस में कहा गया है कि उचित संख्या में पिछड़े लोगों की भर्ती ना करने के साथ ही कंपनी कर्मचारियों का शोषण करती है। शोषण के खिलाफ आवाज उठाने वाले कर्मचारियों को प्रताड़ित किया जाता है। आयोग के आंकड़ों के मुताबिक 1993 में, ONGC द्वारा केवल 11 OBC उम्मीदवारों की भर्ती की गई थी। रिक्तियों की कुल संख्या 286 थी, और नियम के मुताबिक उस वर्ष 77 ओबीसी उम्मीदवारों की भर्ती की जानी चाहिए थी। 1994 में, ONGC में 99 रिक्तियां थीं, लेकिन केवल आठ OBC उम्मीदवारों की भर्ती की गई।

कानून  के मुताबिक 26 ओबीसी उम्मीदवारों को नियुक्त करने की आवश्यकता थी। आयोग के आंकड़ों ने कहा कि यह प्रवृत्ति लगभग 13 वर्षों से जारी है। ओबीसी उम्मीदवारों की भर्ती को लेकर ओएनजीसी ने संख्या की कमी को दर्शाने के बजाए ओबीसी भर्तियों की कमी को जाहिर नहीं किया। इस संबंध में आयोग ने कंपनी को 27 फरवरी को एक प्रश्नावली भी भेजी थी और इन अनियमितताओं के लिए सवाल भी किया था लेकिन कंपनी की तरफ से इस पर कोई जवाब नहीं दिया गया था।

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