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चुनाव प्रक्रिया में अहम बदलाव की तैयारी में मोदी सरकार, आधा दर्जन से ज्यादा टॉप अफसरों का PMO में मंथन, राज्यों से छिन सकते हैं ये अधिकार!

बैठक के दौरान संविधान के आर्टिकल 243K और 243ZA में संशोधन करके देश में सभी चुनाव के लिए एक मतदाता सूची बनाने के विकल्प पर चर्चा हुई।

Translated By नितिन गौतम नई दिल्ली | Updated: August 29, 2020 9:17 AM
सरकार एकसाथ चुनाव कराने को लेकर संविधान संशोधन पर भी विचार कर रही है। (फाइल)

देश में एक साथ चुनाव कराने के मुद्दे पर चर्चा के लिए पीएमओ में इस माह की शुरुआत में एक अहम बैठक हुई थी। इस बैठक के दौरान सभी स्थानीय निकाय चुनाव, विधानसभा और लोकसभा चुनाव के लिए एक कॉमन वोटर लिस्ट तैयार करने को लेकर चर्चा हुई। 13 अगस्त को हुई इस बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पीके मिश्रा ने की।

बैठक के दौरान दो विकल्पों पर बात हुई, पहला कि संविधान के आर्टिकल 243K और 243ZA में संशोधन करके देश में सभी चुनाव के लिए एक मतदाता सूची का होना अनिवार्य किया जाए। दूसरा विकल्प ये है कि राज्य सरकारों को अपने-अपने कानूनों में बदलाव करके नगरपालिका और पंचायत चुनाव के लिए चुनाव आयोग की मतदाता सूची को अपनाने के लिए राजी किया जाए। सूत्रों के अनुसार, कैबिनेट सचिव राजीव गौबा, विधान सचिव जी.नारायण राजू, पंचायती राज सचिव सुनील कुमार और चुनाव आयोग के तीन प्रतिनिधि और सेक्रेटरी जनरल उमेश सिन्हा भी इस बैठक में शामिल हुए।

बता दें कि संविधान का अर्टिकल 243K और 243ZA पंचायत और निगम चुनाव से संबंधित है। यह आर्टिकल राज्य चुनाव आयोग को मतदाता सूची बनाने और चुनाव कराने और उसे दिशा देने और नियंत्रित करने की शक्ति देता है।

वहीं दूसरी तरफ आर्टिकल 324(1) चुनाव आयोग को सभी संसदीय चुनाव और विधानसभा चुनाव के लिए मतदाता सूची तैयार करने और उसे नियंत्रित करने की शक्ति देता है। दूसरे शब्दों में कहें तो राज्य चुनाव आयोग स्थानीय चुनाव के लिए अपनी मतदाता सूची तैयार करने के लिए स्वतंत्र हैं और इसके लिए उन्हें चुनाव आयोग से समन्वय करने की भी कोई जरूरत नहीं है।

अभी अधिकतर राज्य अपने पंचायत और निगम चुनाव के लिए चुनाव आयोग की मतदाता सूची का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, ओडिशा, असम, मध्य प्रदेश, केरल, ओडिशा, असम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड और केन्द्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर के पास स्थानीय चुनाव के लिए अपनी मतदाता सूची है।

सूत्रों के अनुसार, पीएमओ में हुई बैठक के दौरान पंचायती राज सचिव सुनील कुमार अन्य राज्यों के स्थानीय चुनाव के लिए चुनाव आयोग की मतदाता सूची अपनाने के पक्ष में थे। बैठक के दौरान प्रधान सचिव पीके मिश्रा ने कैबिनेट सचिव को इस विषय पर राज्य सरकारों से चर्चा करने को कहा है।

बीते साल हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में कॉमन मतदाता सूची का वादा किया था। भाजपा के घोषणा पत्र में एक देश एक चुनाव की बात भी थी, यानि कि सरकार लोकसभा, विधानसभा और स्थानीय चुनाव एक साथ कराने पर विचार कर रही है।

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