केंद्रीय श्रमिक संगठनों के द्वारा बृहस्पतिवार को बुलाई गई एक दिवसीय देशव्यापी हड़ताल का सामान्य जनजीवन पर अधिक असर नहीं पड़ा। श्रमिक संगठनों ने कई राज्यों में मुख्य रूप से दफ्तरों के बाहर प्रदर्शन किया।
खबरों के मुताबिक, ओडिशा, केरल, तमिलनाडु, गोवा, झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और पंजाब सहित कई राज्यों में इसका मिला-जुला असर देखने को मिला।
केंद्रीय श्रमिक संगठनों के संयुक्त मंच के द्वारा बुलाए गए इस 12 घंटे के राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन के कारण ओडिशा में सामान्य जनजीवन प्रभावित रहा। श्रमिक संगठनों ने दावा किया कि यह केंद्र सरकार की आम-जन और राष्ट्र-विरोधी नीतियों के खिलाफ बड़ी प्रतिक्रिया है। उन्होंने दावा किया कि इस हड़ताल में 30 करोड़ से अधिक श्रमिकों, किसानों और अन्य वर्गों ने भाग लिया।
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मंच ने कहा कि केंद्रीय श्रमिक संगठनों और स्वतंत्र क्षेत्रीय संघों और संघों के संयुक्त मंच, संयुक्त किसान मोर्चा के घटकों और कृषि श्रमिक संघों के संयुक्त मोर्चे के साथ देश के 600 से अधिक जिलों में हड़ताल की कार्रवाई और बड़े पैमाने पर लामबंदी करने में सफल रहे।
दिल्ली में श्रमिक संगठनों ने किया प्रदर्शन
दिल्ली में श्रमिक संगठनों ने हड़ताल के तहत सभी औद्योगिक क्षेत्रों में प्रदर्शन आयोजित किए। जंतर-मंतर पर एक बैठक हुई जिसे केंद्रीय श्रमिक संगठनों के नेताओं ने संबोधित किया।
ओडिशा में बंद का असर भुवनेश्वर, कटक, बालासोर, बेरहामपुर और संबलपुर सहित सभी प्रमुख शहरी क्षेत्रों में महसूस किया गया। झारखंड के बैंक ऑफ इंडिया कर्मचारी संघ के उपमहासचिव उमेश दास ने कहा कि राज्य में हड़ताल के कारण बैंकिंग, बीमा एवं कोयला क्षेत्र प्रभावित हुए। राज्य में वाम दलों और कांग्रेस ने भी हड़ताल को समर्थन दिया। छत्तीसगढ़ में कर्मचारियों के हड़ताल में शामिल होने के कारण कई राष्ट्रीयकृत बैंक बंद रहे।
मजदूरों और किसानों के साथ-साथ बीमा कंपनियों, डाकघरों के कर्मचारियों ने भी आंदोलन में भाग लिया, जिससे उनके संबंधित क्षेत्रों में कामकाज प्रभावित हुआ। हालांकि, राज्य में परिवहन सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहीं और दुकानें, बाजार और अधिकांश व्यावसायिक प्रतिष्ठान खुले रहे।
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले सहित कई इलाकों में मौटे तौर पर सामान्य स्थिति बनी रही, जहां भिलाई इस्पात संयंत्र में कामकाज सामान्य रूप से जारी रहा।
तमिलनाडु में बंदरगाह संचालन प्रभावित रहा और श्रमिकों ने प्रदर्शन किया। तूतीकोरिन और चेन्नई बंदरगाहों पर आंदोलन का सबसे ज्यादा असर पड़ा।
आम आदमी पार्टी ने दिया समर्थन
केरल में राज्य सरकार द्वारा सरकारी कर्मचारियों के लिए ‘डाइस-नॉन’ (वह दिन जब कोई कानूनी कारोबार नहीं किया जाता) घोषित किया गया। पंजाब में सरकार चला रही आम आदमी पार्टी ने राष्ट्रव्यापी हड़ताल को समर्थन दिया।
गोवा में आंदोलन का मिला-जुला असर देखने को मिला। मध्य प्रदेश में रक्षा प्रतिष्ठानों में कार्यरत 25 हजार से अधिक असैनिक कर्मचारी हड़ताल के समर्थन में बृहस्पतिवार को एक घंटे देरी से काम पर पहुंचे। राज्यभर में बाजार, स्कूल और कॉलेज खुले रहे। पश्चिम बंगाल में हड़ताल के आह्वान का कोई खास असर नहीं दिखा। सरकारी एवं निजी कार्यालयों में सामान्य उपस्थिति दर्ज की गई। इसी तरह त्रिपुरा में भी हड़ताल का खास असर नहीं पड़ा। सरकारी कार्यालय, बैंक, शैक्षणिक संस्थान और बाजार खुले रहे जबकि सड़क परिवहन एवं रेल सेवाएं सामान्य रूप से संचालित होती रहीं।
गुजरात में भी हड़ताल का सीमित असर रहा और राज्यभर में अधिकतर सेवाएं तथा व्यावसायिक प्रतिष्ठान सामान्य रूप से काम करते रहे। अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा और राजकोट सहित प्रमुख शहरों में सामान्य जनजीवन अप्रभावित रहा।
क्या हैं श्रमिक संगठनों की मांगें?
श्रमिक संगठनों की मांगों में चार लेबर कोड एवं नियमों को रद्द करना, बीज विधेयक और विद्युत संशोधन विधेयक तथा ‘सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया (शांति) अधिनियम’ को वापस लेना शामिल है। श्रमिक संघों ने मनरेगा की बहाली और ‘विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025’ को रद्द करने की भी मांग की।
केंद्रीय श्रमिक संगठनों के संयुक्त मंच में इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (आईएनटीयूसी), ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एआईटीयूसी), हिंद मजदूर सभा (एचएमएस), सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन (सीआईटीयू), ऑल इंडिया यूनाइटेड ट्रेड यूनियन सेंटर (एआईयूटीयूसी), स्वरोजगार महिला संघ (सेवा), ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियन (एआईसीसीटीयू), लेबर प्रोग्रेसिव फेडरेशन (एलपीएफ) और यूनाइटेड ट्रेड यूनियन कांग्रेस (यूटीयूसी) शामिल हैं।
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