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ओलोंद के बयान पर सरकार ने कहा- राफेल डील के लिए साझेदार के चयन में नहीं कोई भूमिका

फ्रांस सरकार ने एक बयान में कहा, ‘फ्रांसीसी कंपनियों की ओर से चुने गए/चुने जा रहे या चुने जाने वाले भारतीय औद्योगिक साझेदारों के चयन में फ्रांसीसी सरकार किसी भी तरीके से शामिल नहीं रही है।’

Author September 23, 2018 2:53 AM
Nirmala Sitharaman, Defence Minister, India, Pakistan, Pakistani Soldiers, Pakistan Army, 10 Heads, 2 Heads, Cut Off, Display, POK, Indian Army, National News, India News, Hindi Newsरक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण। (एक्सप्रेस फोटोः रेणुका पुरी)

भारत व फ्रांस की सरकारों ने शनिवार को कहा कि रफाल लड़ाकू विमानों के अरबों डॉलर के करार के लिए भारतीय औद्योगिक साझेदार चुनने के मामले में वह किसी भी तरीके से शामिल नहीं रही है जबकि रफाल के विनिर्माता दस्सो एविएशन ने कहा है कि उसने रफाल करार के लिए खुद ही रिलायंस डिफेंस लिमिटेड से साझेदारी का फैसला किया था।
रक्षा मंत्रालय ने कहा कि ओलोंद के कथित बयान के संबंध में मीडिया में खबर को लेकर ‘अनावश्यक विवाद’ खड़े किए जा रहे हैं। मंत्रालय ने कहा कि भारत सरकार ने इससे पहले भी कहा था और एक बार फिर दोहरा रही है कि ऑफसेट साझेदार के तौर पर रिलायंस डिफेंस के चयन में उसकी कोई भूमिका नहीं थी। रक्षा मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘यह बात दोहराई जाती है कि न तो सरकार और न ही फ्रांस सरकार वाणिज्यिक फैसले में किस भी रूप से शामिल थी।’ इससे पहले पूर्व फ्रांसीसी राष्ट्रपति फ्रांसुआ ओलोंद ने कथित रूप से कहा था कि भारत ने ही इन करार के लिए भारतीय साझेदार के तौर पर रिलायंस डिफेंस के नाम का प्रस्ताव रखा था। उनके इस बयान से राजनीतिक विवाद गहरा गया। कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि ओलोंद के बयान पर सरकार को सफाई देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि संयुक्त संसदीय समिति से जांच होनी चाहिए और पूर्व फ्रांसीसी राष्ट्रपति ओलोंद को भी बुलाया जाना चाहिए।

फ्रांस सरकार ने कहा कि फ्रांस की कंपनियों को इस करार के लिए भारतीय कंपनियों को चुनने की पूरी आजादी है। फ्रांस सरकार और फ्रांसीसी एविएशन ने अलग अलग तब बयान जारी किया है जब फ्रांस के मीडिया में पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के हवाले से कहा गया कि 58,000 करोड़ रुपए के रफाल करार में दस्सो एविएशन के लिए साझेदार के तौर पर रिलायंस डिफेंस के नाम का प्रस्ताव भारत सरकार ने ही रखा था और फ्रांस के पास कोई अन्य विकल्प नहीं था। फ्रांसीसी वेबसाइट ‘मीडियापार्ट’ द्वारा उद्घृत ओलांद के सनसनीखेज बयान से इस विवाद में एक नया मोड़ आ गया है क्योंकि भारत सरकार अब तक कहती रही है कि उसे आधिकारिक रूप से इस बात की जानकारी नहीं थी कि दस्सो एविएशन ने इस करार की ऑफसेट शर्त को पूरा करने के लिए भारतीय साझेदार के तौर पर किसे चुना है।

फ्रांस सरकार ने एक बयान में कहा, ‘फ्रांसीसी कंपनियों की ओर से चुने गए/चुने जा रहे या चुने जाने वाले भारतीय औद्योगिक साझेदारों के चयन में फ्रांसीसी सरकार किसी भी तरीके से शामिल नहीं रही है।’ फ्रांसीसी सरकार ने कहा कि भारत की अधिग्रहण प्रक्रिया के अनुसार, हमारी कंपनियों को ऐसी भारतीय साझेदार कंपनियां चुनने की पूरी आजादी है जिन्हें वे सबसे प्रासंगिक समझती हों, फिर ऐसी ऑफसेट परियोजनाओं को भारत सरकार की मंजूरी के लिए पेश करें जिन्हें वे भारत में इन स्थानीय साझेदारों के साथ मिलकर लागू करना चाहती हों। ‘मीडियापार्ट’ ने अपनी एक खबर में ओलांद के हवाले से कहा था, ‘भारत सरकार ने इस सेवा समूह का प्रस्ताव किया था और दस्सो ने अंबानी से बातचीत की थी। हमारे पास कोई विकल्प नहीं था, हमने उस साझेदार को अपनाया जो हमें दिया गया था।’ इस बीच एनडीटीवी ने खबर दी है कि ओलांद के कार्यालय ने कहा है कि वह मीडियापार्ट में छपे अपने बयान पर अडिग हैं।

फ्रांसीसी कंपनी ने दस्सो ने कहा, ‘रक्षा खरीद प्रक्रिया (डीपीपी) 2016 के नियमन के अनुसार इस ऑफसेट अनुबंध की आपूर्ति की गई। इस ढांचे में और ‘मेक इन इंडिया’ नीति के अनुसार, दस्सो एविएशन ने भारत के रिलायंस समूह के साथ साझेदारी का फैसला किया है। यह दस्सो एविएशन की पसंद है।’  दस्सो ने अपने बयान में कहा कि 36 रफाल लड़ाकू विमानों की आपूर्ति के लिए दोनों देशों की सरकारों के बीच समझौता हुआ। कंपनी ने कहा, ‘इसमें एक अलग अनुबंध है, जिसमें दस्सो एविएशन खरीद मूल्य का 50 फीसद हिस्सा भारत में निवेश (ऑफसेट) करने के लिए प्रतिबद्ध है।’ कंपनी ने यह भी कहा कि रिलायंस के साथ इसकी साझेदारी के कारण फरवरी 2017 में दस्सो रिलायंस एअरोस्पेस लिमिटेड (डीआरएएल) नाम का संयुक्त उपक्रम बना। कंपनी ने कहा कि बीटीएसएल, डेफसिस, काइनेटिक, महिंद्रा, मैनी, सैमटेल जैसी अन्य कंपनियों के साथ भी अन्य साझेदारियों पर दस्तखत हुए हैं….सैकड़ों अन्य संभावित साझेदारों के साथ भी बातचीत चल रही है। दस्सो को इस बात पर गर्व है कि भारतीय अधिकारियों ने रफाल लड़ाकू विमान का चयन किया है।

 

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