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राम मंदिर पर कार्यक्रम रद्द किया तो भड़के विनय कटियार- जेएनयू राष्‍ट्रविरोधी यूनिवर्सिटी, बंद कर दी जाए

भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि यूनिवर्सिटी परिसर में हमेशा राष्‍ट्रविरोधी कार्य होते रहते हैं, ऐसे में उसे खतम कर देना चाहिए।
Author नई दिल्‍ली | December 6, 2017 17:10 pm
बीजेपी के सीनियर नेता विनय कटियार। Express photo by Vishal Srivastav

जेएनयू विवाद में भाजपा नेता विनय कटियार भी कूद गए हैं। राम मंदिर पर भाजपा के ही वरिष्‍ठ नेता सुब्रमण्‍यम स्‍वामी का कार्यक्रम रद करने पर वह भड़क गए। उन्‍होंने आरोप लगाया कि यूनिवर्सिटी परिसर में हमेशा राष्‍ट्रविरोधी कार्य होते रहते हैं, ऐसे में उसे खतम कर देना चाहिए। कटियार ने कहा कि जेएनयू को खतम कर वहां दूसरा संस्‍थान खोला जाना चाहिए। मालूम हो कि स्‍वामी ने अपना कार्यक्रम रद होने पर कड़ी प्रतिक्रिया जाहिर की थी। विनय कटियार की यह तल्‍ख टिप्‍पणी स्‍वामी का बयान जारी होने के बाद सामने आया है। जेएनयू को लेकर पूर्व में भी भाजपा के कई दिग्‍गज नेता विवि में चलने वाली गतिविधियों पर तीखी प्रतिक्रिया व्‍यक्‍त कर चुके हैं।

एक निजी टीवी चैनल से बात करते हुए भाजपा नेता कटियार ने कहा, ‘जेएनयू में हमेशा राष्‍ट्रविरोधी कार्य होते रहते हैं जो नहीं होना चाहिए। इसके बावजूद वहां ऐसा हो रहा है। ऐसे में उसे बंद कर उसके स्‍थान पर दूसरा संस्‍थान खोला जाना चाहिए। सुब्रमण्‍यम स्‍वामी कौन सा उत्‍तेजक बोलने वाले हैं। वह तो अकादमिक लोग हैं और जो बात बोलते हैं पूरे तर्क के साथ बोलते हैं। ऐसे में उनका कार्यक्रम रद नहीं होना चाहिए। जेएनयू में मे भी तो वे (छात्र) केवल तर्क-वितर्क ही करते हैं और तो कुछ होता नहीं है। इसीलिए मैंने कहा कि उस संस्‍थान को ही खतम करो।’ यह कोई पहला मौका नहीं है जब भाजपा के किसी वरिष्‍ठ नेता ने इस तरह का बयान दिया है। नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद पार्टी के कई नेता जेएनयू में होने वाले कार्यक्रम पर अपना कड़ा विरोध जता चुके हैं।

कटियार के इस बयान पर कई लोगों ने टि्वटर पर प्रतिक्रिया दी है। अभिषेक चक्रवर्ती ने लिखा, ‘समस्‍या यूनिवर्सिटी के साथ नहीं बल्कि परिसर में मौजूद वाम मोर्चा के माहौल से है। इसके चलते ही विवाद होते हैं, जिससे विवि का नाम खराब होता है।’ अजीत माते ने ट्वीट किया, ‘सभी राजनीतिक दलों को यूनिवर्सिटी से बाहर रहना चाहिए। छात्रों को अकेला छोड़ दिया जाना चाहिए।’अन्‍य लोगों ने भी इस मसले पर मिली-जुली प्रत‍िक्रिया दी है। कई अन्‍य लोगों ने वाम छात्र संगठनों पर विवि का नाम खराब करने का आरोप लगाया है तो कुछ ने मौजूदा परिस्थिति में सुधार की भी वकालत की है।

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