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परदादा नेहरू के नक्‍शे कदम पर वरुण गांधी, भारत के गांवों पर लिख डाली किताब

भाजपा जब चुनावी राज्यों में किसानों से सीधे मुखातिब हो रही है। ऐसे वक्त में वरुण गांधी की किताब के मुताबिक, ''साल 2015 में साल 2014 के मुकाबले तीन गुना ज्यादा किसानों ने आत्महत्या की है।''

Author November 27, 2018 5:51 PM
भाजपा सांसद वरुण गांधी ने अपनी भारत यात्रा के दौरान गांवों में हुए अनुभवों को किताब में उकेरा है। Express photo by Subham Dutta.

जिस वक्त भाजपा के लगभग सभी बड़े नेता चुनावी राज्यों राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के दौरे पर हैं। ऐसे वक्त में भाजपा सांसद वरुण गांधी ने ग्रामीण भारत को नई नजर से देखने का नया तरीका निकाला है। यूपी के सुल्तानपुर जिले से भाजपा सांसद वरूण गांधी काफी वक्त से पार्टी के प्रचारकों की लिस्ट से बाहर चल रहे हैं। उन्होंने ढाई साल के इस वक्त में भारत के ग्रामीण समाज और अर्थव्यवस्था पर 870 पेज की किताब लिखी है।

वरूण गांधी ने ये किताब अंग्रेजी में लिखी है। किताब का नाम,”A Rural Manifesto: Realising India’s Future Through Her Villages” है। इस किताब के साथ ही वरुण गांधी अपने परदादा पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के पदचिह्नों पर चलते दिखाई देते हैं। जवाहर लाल नेहरू की किताबें ‘भारत एक खोज’ और ‘विश्व इतिहास की झलक’ आज भी प्रासंगिक पुस्तकें हैं।

अपनी पुस्तक में, वरुण ने स्वतंत्र सामाजिक-आर्थिक संस्था के तौर पर भारतीय गांवों की सहजता और बिना किसी बाहरी संपर्क के भी खुद में ही जीवंत रहने की क्षमता की तलाश की है। वह अपनी पुस्तक में ग्रामीण भारत की कृषि संबंधी स्थितियों, इलाज और शिक्षा की सुविधाओं, गैर कृषक आय और ग्रामीण मजदूरों की स्थिति और उनके जीवन के बारे में विस्तृत जानकारी देते हैं।

टाइम्स आॅफ इंडिया ने वरुण गांधी से बातचीत के आधार पर रिपोर्ट प्रकाशित की है। बातचीत में पुस्तक के प्राक्कथन से ही एक लाइन को चुनते हुए वरुण गांधी ने कहा,”मेरे मन में लेखन का ​विचार भारत के सुदूर ग्रामीण इलाकों में मेरे दौरे के दौरान देखे गए तथ्यों, आंकलन और उस दौरान हुए व्यक्तिगत अनुभवों के संकलन से उपजा है।” उन्होंने आगे कहा,” किताब पर काम करने से मुझे बहुत कुछ सीखने को मिला है और इससे खासतौर पर मुझे लोकसभा के प्रतिनिधि के तौर पर जनता के बीच बेहतर काम करने में मदद मिलेगी।”

हालांकि वरुण गांधी की पार्टी भाजपा जब चुनावी राज्यों में किसानों से सीधे मुखातिब हो रही है। ऐसे वक्त में वरुण गांधी की किताब के मुताबिक, ”साल 2015 में साल 2014 के मुकाबले तीन गुना ज्यादा किसानों ने आत्महत्या की है। इसके अलावा एनसीआरबी ने भी इसके बाद से आत्महत्या के आंकड़ों को प्रकाशित करना बंद करवा दिया है।” वरुण ने अपनी किताब में किसानों की आत्महत्या, कर्ज और ग्रामीण समस्याओं के आपसी रिश्ते का भी परीक्षण किया है।

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