Omar Abdullah Independence Day Speech: केंद्र शासित प्रदेस जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर दिए अपने भाषण में केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि अगर वर्ष 2019 में जम्मू-कश्मीर का संवैधानिक ढांचा (अनुच्छेद 370) बदला न गया होता, तो आज पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के लोग भारत में विलय और हमारे साथ एकजुट होने के लिए सड़कों पर आंदोलन कर रहे होते।

उमर अब्दुल्ला ने मांग की है कि जो स्पेशल दर्ज सरकार ने छीने थे, वो जम्मू-कश्मीर को वापस दिए जाएं। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में चल रहे विरोध प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा, “जब मैं सीमा पार की स्थिति देखता हूं, तो मुझे लगता है कि 80 साल पहले हमारे नेताओं ने जो फैसला लिया था, वह बिल्कुल सही था।

उस हिस्से की हालत को देख होता है दुख

उमर अब्दुल्ला ने कहा, “जिन लोगों ने ‘हमलावर खबरदार, हम कश्मीरी हैं तैयार’ का नारा दिया था, वे सही थे। लोगों ने जो कुर्बानियां दीं, वे सही मकसद के लिए दी गई थीं।” उन्होंने आगे कहा, “जम्मू-कश्मीर के उस हिस्से के हालात देखकर हमें दुख होता है और हम परेशान होते हैं। हमें यह महसूस होता है कि अगर 2019 में हमारे हालात न बदले गए होते, तो आज उस तरफ के कश्मीरी हमारे साथ दोबारा जुड़ने के लिए प्रदर्शन कर रहे होते।”

“जो हमसे छीना गया, उसे वापस लौटाया जाए”

संघवाद और लोकतंत्र को भारत की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए उमर अब्दुल्ला ने कहा कि देश में संघवाद को मजबूत करने की शुरुआत जम्मू-कश्मीर से होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा, “हमें हर कीमत पर लोकतंत्र को बचाना और मजबूत करना है। यह हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। लेकिन इसके साथ ही हम देश के संघवाद की रक्षा करने से पीछे नहीं हट सकते।

जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री ने कहा, “आज जब हम संघवाद को मजबूत करने की बात करते हैं, तो इसकी शुरुआत जम्मू-कश्मीर से होनी चाहिए। हमसे जो कुछ भी छीना गया है, उसे वापस किया जाना चाहिए ताकि ये सिर्फ खोखले शब्द बनकर न रह जाएं।” अब्दुल्ला ने यह भी कहा कि सिर्फ किसी केंद्र शासित प्रदेश को राज्य का दर्जा दे देना ही असली संघवाद नहीं है, बल्कि देश के हर राज्य को अधिकार देकर मजबूत बनाया जाना चाहिए।

केंद्रीय एजेंसियों के हस्तक्षेप और जंतर-मंतर प्रदर्शन पर बोला हमला

राज्यों के अधिकारों में केंद्र के हस्तक्षेप पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री ने नीट (NEET) और जेईई (JEE) जैसी परीक्षाओं और हालिया छात्र आंदोलनों का जिक्र किया। उमर अब्दुल्ला ने कहा, “जब केंद्रीय एजेंसियां राज्यों के अधिकारों में दखल देने लगती हैं, तो संघवाद कमजोर होता है। जब राज्यों की शक्तियों को छीना और खोखला किया जाता है, तो संघवाद को नुकसान पहुँचता है। इसके नतीजे अक्सर हमें सड़कों पर देखने को मिलते हैं।”

हाल ही में हुए युवाओं के प्रदर्शनों पर उन्होंने कहा, “अभी कुछ दिन पहले हमने देश भर में युवाओं का प्रदर्शन देखा। दिल्ली की सड़कों पर और जंतर-मंतर पर जो कुछ भी हुआ, वह इसी का नतीजा था। संघीय ढांचे के तहत शिक्षा और स्वास्थ्य राज्यों की जिम्मेदारी थी, लेकिन व्यवस्था बदल दी गई। NEET और JEE जैसी परीक्षाएं लागू करके मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेजों में दाखिले का राज्यों का अधिकार छीन लिया गया।”

क्या हम देश को ‘सारे जहां से अच्छा’ बना पाए?

अपने संबोधन की शुरुआत अल्लामा इकबाल के मशहूर शेर ‘सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा’ से करते हुए उमर अब्दुल्ला ने आत्ममंथन की सलाह दी। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, “क्या हम वाकई अपने देश को ‘सारे जहाँ से अच्छा’ बना पाए हैं? अगर हम इसे अभी तक वैसा नहीं बना पाए हैं, तो आजादी का यह 80वाँ साल इस बारे में सोचने और जरूरी कदम उठाने का बिल्कुल सही समय है।”

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले से देश को संबोधित करते हुए ‘शक्ति की सप्तधारा’ का आह्वान किया और कहा कि ये सात शक्तियां भारत को नई गति तथा नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगी। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर।