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भाजपा से गठजोड़ पर उमर की ‘ना’, कहा- सत्ता की भूखी नहीं है नेशनल कांफ्रेंस

नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने जम्मू कश्मीर में सरकार गठन के लिए भाजपा के साथ किसी गठबंधन से रविवार को इनकार किया

Author श्रीनगर/जम्मू | January 18, 2016 3:27 AM
उमर ने फेसबुक पर अपने आधिकारिक पन्ने पर कहा, ‘नेशनल कांफ्रेंस सत्ता की भूखी नहीं है और ऐसी राजनीतिक सत्ता में उसकी रूचि नहीं है। (फाइल फोटो)

नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने जम्मू कश्मीर में सरकार गठन के लिए भाजपा के साथ किसी गठबंधन से रविवार को इनकार किया, वहीं उनके पिता फारुक अब्दुल्ला अपने शनिवार के उस बयान से पीछे हट गए जिसमें उन्होंने ऐसी संभावना जताई थी। नेकां के कार्यकारी अध्यक्ष उमर ने कहा कि उनकी पार्टी सत्ता की भूखी नहीं है और विचारधारा के साथ कोई समझौता नहीं करेगी। उमर ने फेसबुक पर अपने आधिकारिक पन्ने पर कहा, ‘नेशनल कांफ्रेंस सत्ता की भूखी नहीं है और ऐसी राजनीतिक सत्ता में उसकी रूचि नहीं है जो विचारधारात्मक समझौता कर के मिलती हो। हमने एक साल पहले ही भाजपा के साथ गठबंधन की संभावना छोड़ दी थी और ऐसा करने की वजह नहीं बदली है।’ उन्होंने कहा कि फारुक अब्दुल्ला एक काल्पनिक स्थिति पर आधारित एक काल्पनिक सवाल का जवाब दे रहे थे और उन्होंने कभी नहीं कहा कि पार्टी भाजपा का समर्थन करेगी। उमर ने कहा कि फारुक ने बस यही कहा था कि अगर भाजपा की तरफ से इस तरह का कोई आग्रह या प्रस्ताव मिलता है, तो पार्टी की कार्यसमिति इस पर विचार करेगी।

उधर फारुक अपने शनिवार के बयान से पीछे हट गए और कहा कि अगर जम्मू-कश्मीर में गठबंधन सहयोगी पीडीपी व भाजपा सरकार बनाने में नाकाम रहती हैं तो विधानसभा को भंग कर नए सिरे से चुनाव कराए जाने चाहिए। फारुक ने यहां एक कार्यक्रम से इतर संवाददाताओं से कहा, ‘ अगर वे (पीडीपी और भाजपा) लोगों की समस्याओं का समाधान नहीं कर सकते तो उन्हें विधानसभा भंग कर नए सिरे से चुनाव कराने चाहिए।’

फारुक के इस बयान पर कि अगर भाजपा नेतृत्व राज्य में सरकार बनाने के लिए उनसे संपर्क करता है तो उनकी पार्टी के ‘दरवाजे खुले हैं’, के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी नहीं कहा था कि उनकी पार्टी भाजपा के साथ जा रही है। उन्होंने कहा, ‘ मैंने कभी नहीं कहा था कि हम भाजपा के साथ जा रहे हैं, यह स्पष्ट होना चाहिए। मैंने सिर्फ यह कहा था कि पीडीपी को भाजपा के साथ सरकार बनानी चाहिए क्योंकि उनके पास जनादेश है। मैंने सिर्फ यह कहा कि हमारी पार्टी अपनी कार्यसमिति में किसी भी मुद्दे पर विचार कर सकती है।’

फारुक कहा कि उनकी पार्टी के सिर्फ 15 विधायक हैं जिनके दम पर वह सरकार नहीं बना सकते। ‘हम कोई फैसला नहीं कर सकते क्योंकि हमारे पास जनादेश नहीं है। हमारे पास सिर्फ 14-15 लोग हैं और इतने लोग सरकार नहीं बना सकते।’ नेकां नेता ने कहा, ‘ मैं फैसला करने वाला नहीं हूं, फैसला पार्टी आलाकमान को करना होता है।’ उन्होंने गठबंधन सहयोगियों भाजपा और पीडीपी को सलाह दी कि वे अपने मतभेदों को दूर कर अविलंब सरकार बनाएं क्योंकि इस सीमावर्ती राज्य के लिए विलंब अच्छा नहीं है।

उमर ने कहा कि पीडीपी भाजपा की सहयोगी है और उनके राजनीतिक गठबंधन में आए किसी गतिरोध से पीडीपी या भाजपा को निकालने के लिए नेशनल कांफ्रेंस की कोई जिम्मेदारी नहीं है। उन्होेंने कहा कि यह भी याद रखा जाना चाहिए कि श्रीनगर में संपन्न अपनी हालिया बैठक में पार्टी की कार्यसमिति ने पार्टी द्वारा एक साल पहले लिए गए फैसले का समर्थन किया था और उस फैसले में किसी बदलाव की हम उम्मीद नहीं करते।’

भाजपा के 87 सदस्यीय विधानसभा में 25 विधायक हैं जबकि उसकी सहयोगी पीपुल्स कांफ्रेंस के दो सदस्य हैं। सज्जाद गनी लोन इस पार्टी के नेता हैं। नेकां के 15 विधायक हैं। भाजपा और नेकां को सरकार बनाने के लिए कम से कम दो अन्य विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी।

अब्दुल्ला ने कहा कि पीडीपी और भाजपा को साथ बैठना चाहिए और लोगों की समस्याओं का हल करना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘विलंब राज्य के लिए खराब चीज है। यह सीमावर्ती राज्य है और मुश्किल दौर से गुजर रहा है। उन्हें (पीडीपी और भाजपा) जनादेश मिला है और उन्हें बैठकर लोगों की समस्याओं का हल करना चाहिए। इसीलिए लोगों ने उन्हें निर्वाचित किया है। अगर वे लोगों की समस्याओं का हल नहीं कर सकते तो उन्हें विधानसभा भंग कर नए सिरे से चुनाव कराने चाहिए।’

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