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यूपी में छोटे दल भी बीजेपी को पिला रहे पानी! राजभर ने पीए को पकड़ा दिया नड्डा का फ़ोन, अनुप्रिया और निषाद भी मांग रहे मंत्री पद!!

कांग्रेस नेता जितिन प्रसाद को अपने पाले में लाकर बीजेपी नेतृत्व अपनी पीठ थपथपाते नहीं अघा रहा है लेकिन जमीनी हकीकत इससे कुछ उलट ही है। पंचायत चुनाव के नतीजों से आभाष हो रहा है कि बीजेपी की हालत यूपी में पतली है। यही वजह है कि अर्से से बीजेपी के हमजोली रहे छोटे-छोटे दल मोलभाव पर उतर आए हैं।

उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ (फोटो – पीटीआई)

कांग्रेस नेता जितिन प्रसाद को अपने पाले में लाकर बीजेपी नेतृत्व अपनी पीठ थपथपाते नहीं अघा रहा है लेकिन जमीनी हकीकत इससे कुछ उलट ही है। पंचायत चुनाव के नतीजों से आभाष हो रहा है कि बीजेपी की हालत यूपी में पतली है। यही वजह है कि अर्से से बीजेपी के हमजोली रहे छोटे-छोटे दल मोलभाव पर उतर आए हैं। कोई केंद्र में मंत्री पद मांग रहा है तो कोई बीजेपी नेतृत्व से बात करने को भी तैयार नहीं। जाहिर है डिमांड ज्यादा हैं।

सूत्रों का कहना है कि कोरोना की दूसरी लहर से पहले ही बीजेपी नेतृत्व को इस बात का एहसास हो चला था कि यूपी में हालात उतने सहज नहीं हैं। राजनीतिक समीकरणों का बात करें तो यूपी में बीजेपी के खराब प्रदर्शन का असर 2024 तक दिखने वाला है। ऐसे में नेतृत्व संजीदगी से अपनी रणनीति तय कर रहा है, लेकिन छोटे दल हैं कि मानने को तैयार नहीं। जैसे ही यूपी में योगी को तब्दील करने की बात मुखऱ हुई इन दलों ने अपना सिर उठाना शुरू कर दिया। सूत्रों का कहना है फिलहाल जो हालात बीजेपी के लिए उलटे पड़ते दिखाई दे रहे हैं उसका कारण यूपी का एक सर्वे है। इसमें दावा किया गया है कि मौजूदा हालात में बीजेपी 100 से भी कम के आंकड़े पर सिमट सकती है। उसके बाद ही हायतौबा मच रही है।

हालांकि, बीजेजी नेतृत्व को पता है कि छोटे दलों को साधे बिना इस बार सत्ता तक पहुंचना मुश्किल है। सुहेल देव भारतीय समाज पार्टी के प्रमुख पिछले कुछ दिनों से बीजेपी के खिलाफ अपने तीखे तेवर दिखा भी रहे थे। उन्हें साधने के लिए जेपी नड्डा ने फोन लगवाया, लेकिन सूत्रों का कहना है कि सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभऱ ने अपने पीए को फोन थमा दिया। नड्डा चाहते हैं कि राजभर दिल्ली आकर बात करें, लेकिन उनका कहना है कि बातचीत का समय जा चुका है। अब उनकी मांगों को पूरा करने का समय आ चुका है।

सुभासपा के राष्ट्रीय महासचिव अरुण राजभर का कहना है कि बीजेपी की तरफ से उन्हें सिर्फ धोखा ही मिला है। उनका कहना है कि पंचायत चुनावों में जो हाल हुआ उससे बीजेपी को लगने लगा है कि हालात उतने सहज नहीं हैं। लेकिन वो क्यों बात करें। बीजेपी को चुनाव नजदीक आते ही उनकी जरूरत महसूस होने लगती है। सुभासपा ने बीते चुनाव में 8 सीटों पर चुनाव लड़ा और 4 जीती थीं।

उधर, एक अन्य घटनाक्रम में गृहमंत्री अमित शाह ने गुरुवार को अपने गठबंधन के दोनों सहयोगियों अपना दल (एस) की नेता अनुप्रिया पटेल और निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद और सांसद प्रवीण निषाद से अपने आवास पर मुलाकात की। साथ ही उन्होंने यह संकेत भी दे दिया यूपी में बीजेपी अपने गठबंधन को सहेज कर चलेगी। ये सभी अपने-अपने लिए मंत्री पद की मांग कर रहे हैं। संजय निषाद की मांग एमएलसी पद की भी है। अनुप्रिया पहले ही कह चुकी हैं कि उनकी पार्टी की यूपी कैबिनेट में ज्यादा हिस्सेदारी बनती है। वो अपने दो नेताओं को मंत्री बनाने की मांग कर रही हैं। फिलहाल योगी कैबिनेट में उनका एक मंत्री है।

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