संसद के मानसून सत्र के दौरान जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच करने वाली समिति की रिपोर्ट पेश की जाएगी। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शनिवार को कहा कि तीन सदस्यीय समिति की रिपोर्ट 20 जुलाई से शुरू होने वाले मानसून सत्र में लोकसभा में पेश की जाएगी।
जानकारी दे दें कि दिल्ली हाईकोर्ट से भ्रष्टाचार के आरोप लगने के बाद इलाहाबाद हाई कोर्ट भेजे गए जस्टिस यशवंत वर्मा ने 9 अप्रैल 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को इस्तीफा भेजा था। हालांकि राष्ट्रपति ने उनका इस्तीफा अब तक मंजूर नहीं किया है क्योंकि उनका नाम अभी भी इलाहाबाद हाईकोर्ट के आधिकारिक पोर्टल पर जजों की सूची में तीसरे नंबर पर है।
जस्टिस यशवंत वर्मा हटाने के प्रस्ताव की संभावना
साथ ही ओम बिरला ने यह भी कहा कि उनके इस्तीफे के फैसले के बावजूद संसद की ओर से उन्हें हटाने के प्रस्ताव पर विचार करने की संभावना अभी भी खुला रखा है। पश्चिम बंगाल के विधायकों को संबोधित करते हुए एक कार्यक्रम के दौरान ओम बिरला ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरविंद कुमार की अध्यक्षता वाली समिति की ओर से सौंपी गई रिपोर्ट सदन के पटल पर पेश होगी, इसके बाद आगे की कार्रवाई तय करने का काम संसद का होगा। रिपोर्ट सत्र के पहले दिन पेश की जा सकती है।
पक्ष और विपक्ष दोनों हटाने को लेकर साथ
उन्होंने बताया कि सत्ताधारी गठबंधन और विपक्ष, दोनों ही दलों के सदस्यों ने जस्टिस यशवंत वर्मा को हटाने के नोटिस पर हस्ताक्षर किए हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा के नई दिल्ली स्थित बंगले के एक बाहरी कमरे में जले हुए करेंसी नोटों के बंडल मिलने के बाद वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों का सामना कर रहे हैं।
क्या था मामला?
दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस यशवंत वर्मा के आधिकारिक आवास पर 14 मार्च 2025 में आग लगने के बाद करीबन 15 करोड़ रुपये तक के जले हुए नोट मिले थे, इसके बाद यह विवाद सामने आया था। इस मामले में जस्टिस यशवंत के खिलाफ महाभियोग की प्रकिया शुरू की गई थी।
एक सूत्र ने कहा, तथ्य यह है कि उनका हाईकोर्ट अब भी उन्हें अपने सेवारत न्यायाधीशों में शामिल करता है और आगे कहा कि उनके इस्तीफे के बावजूद जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट पूरी करने का काम जारी रखा और अपनी रिपोर्ट ओम बिरला को सौंप दिए।
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इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज यशवंत वर्मा ने शुक्रवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। दिल्ली हाईकोर्ट में नियुक्ति के दौरान जस्टिस वर्मा के घर पर लगी आग के बाद जले हुए नोट मिले थे। जिसके बाद उनके खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया जारी थी। संसदीय कमेटी जस्टिस वर्मा के खिलाफ जांच कर रही थी लेकिन अब जब जस्टिव वर्मा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है, तो उनके खिलाफ चल रही महाभियोग की प्रक्रिया खत्म हो जाएगी। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
