गुरुवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला सदन में अपने खिलाफ लाए गए विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव पर अपने विचार रखें। ओम बिरला ने कहा कि सदन नियमों से चलता है और नियमों का लागू करना उनका दायित्व है।

ओम बिरला ने कहा कि उन्होंने हमेशा यह प्रयास किया है कि लोकसभा में हर सदस्य नियमों के अनुसार अपने विचार रखें, इसके लिए उन्होंने सभी को समय देने का प्रयास किया है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने सदन की कार्यवाही निष्पक्षता, अनुशासन, संतुलन और नियमों के साथ संचालित हो।

उन्होंने कहा, “मैंने अपने नैतिक कर्तव्य का पालन करते हुए अपने खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिए जाने के साथ ही लोकसभा की कार्यवाही के संचालन से खुद को अलग कर लिया। सदन द्वारा मुझ पर व्यक्त किए गए विश्वास के लिए सभी का आभार व्यक्त करता हूं, इस विश्वास को अपनी जिम्मेदारी मानते हुए पूरी निष्ठा, निष्पक्षता और संवैधानिक मर्यादा के साथ निभाऊंगा।”

‘कोई भी सदस्य सदन से ऊपर नहीं’

ओम बिरला ने कहा, “कुछ सदस्यों का मानना था कि नेता प्रतिपक्ष सदन से ऊपर हैं और किसी भी विषय पर बोल सकते हैं, लेकिन ऐसा विशेषाधिकार किसी को नहीं है और चाहे प्रधानमंत्री हों, मंत्री हों, विपक्ष के नेता हों या अन्य सदस्य, सभी को नियम के अनुसार ही बोलने का अधिकार है। ये नियम सदन ने ही बनाए हैं और मुझे विरासत में मिले हैं।”

ओम बिरला ने क्या कहा, जानिए बड़ी बातें

  1. ओम बिरला ने कहा, ”सदन द्वारा मुझ पर व्यक्त किए गए विश्वास के लिए सभी का आभार व्यक्त करता हूं, इस विश्वास को अपनी जिम्मेदारी मानते हुए पूरी निष्ठा, निष्पक्षता और संवैधानिक मर्यादा के साथ निभाऊंगा।”
  2. उन्होंने कहा, ”मैंने हमेशा यह प्रयास किया है कि लोकसभा में प्रत्येक सदस्य नियमों के अनुसार अपने विचार रखें, इसके लिए सभी को समय देने का प्रयास किया है।” बिरला ने कहा, ”मैंने हमेशा यह प्रयास किया कि सदन की कार्यवाही निष्पक्षता, अनुशासन, संतुलन और नियमों के साथ संचालित हो।”
  3. उन्होंने आसन द्वारा विपक्षी सदस्यों के बोलते समय माइक बंद किए जाने के आरोपों पर कहा, ”अध्यक्ष के पास माइक ऑन करने या बंद करने का अधिकार नहीं है। विपक्ष के जो नेता पीठासीन सभापति होते हैं उनको इस बारे में पता है।”

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विपक्ष ने आरोप लगाया था कि ओम बिरला सदन संचालन में पक्षपात कर रहे थे और विपक्षी सांसदों को बोलने का पर्याप्त अवसर नहीं दे रहे थे। अगर लोकसभा के इतिहास को खंगालें तो पता चलता है कि इससे पहले भी स्पीकरों के खिलाफ ऐसे प्रस्ताव लाए जा चुके हैं। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें