केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मंगलवार को पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण देश में उपजी स्थिति पर बात की। उन्होंने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, “हमारे सामने सप्लाई से जुड़ी कोई समस्या नहीं है। आज देश के पास कच्चे तेल, एलएनजी और एलपीजी का पर्याप्त भंडार मौजूद है। जब यह संकट शुरू हुआ था तब कुछ चिंताएं जरूर थीं लेकिन हमने इस चुनौती को अवसर में बदल दिया।”
उन्होंने देश की जनता को भरोसा दिलाते हुए कहा, “हमने एलपीजी के घरेलू उत्पादन को बढ़ाया है। क्षमता जो पहले 36 हजार मीट्रिक टन प्रतिदिन थी, अब इसे बढ़ाकर 54 हजार मीट्रिक टन प्रतिदिन कर दिया गया है। आपने देखा होगा कि कहीं भी किसी प्रकार की कमी नहीं है। पिछले चार वर्षों में कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है।”
‘भारत आज भी बेहतर स्थिति में है’
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हमें नहीं पता कि होर्मुज जलडमार्ग में नाकेबंदी कितने समय तक जारी रहेगी। लेकिन मैं स्पष्ट तौर पर कह सकता हूं कि आज भारत बेहतर स्थिति में है। दुनिया के कई अन्य देशों को उपलब्धता और सप्लाई की गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ा है। वहां कीमतें 50-60 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं।
उन्होंने पीएम मोदी की अपील के संबंध में कहा कि प्रधानमंत्री का बयान बेहद दूरदर्शी है। वह भविष्य को ध्यान में रखते हुए यह संकेत देता है कि अगर यह स्थिति लंबे समय तक जारी रहती है तो हमें अपनी जीवनशैली में क्या बदलाव करने चाहिए। इस पर विचार करना जरूरी है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि कुछ बुरा होने वाला है। ऐसी बातें केवल नकारात्मक माहौल और घबराहट पैदा करती हैं।
उन्होंने कहा, “मैं हर दिन तेल क्षेत्र की कंपनियों के सीएमडी के साथ एक से डेढ़ घंटे तक स्थिति की समीक्षा करता हूं। चिंता की बिल्कुल भी कोई बात नहीं है। हालांकि मेरी तेल कंपनियां रोजाना लगभग 1000 करोड़ रुपये का नुकसान उठा रही हैं, इसलिए हमें इन बातों पर ध्यान देना होगा।
‘एलपीजी की मांग में कुछ कमी आई’
हरदीप पुरी ने कहा कि एलपीजी की मांग में कुछ कमी आई है। यह पहले 90 हजार मीट्रिक टन थी, जो अब घटकर 75 हजार मीट्रिक टन रह गई है। इसका एक कारण तापमान भी है। लेकिन कुल मिलाकर सप्लाई और डिमांड के प्रबंधन में हमने बहुत अच्छा काम किया है और मुझे पूरा विश्वास है कि आगे भी हम अच्छा प्रदर्शन करेंगे। कृपया प्रधानमंत्री की बात को ध्यान से सुनिए, वह एक बेहद दूरदर्शी बयान है।
गौरतलब है कि उनका यह बयान ऐसे वक्त में सामने आया है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को सिकंदराबाद में लोगों से कई अपीलें की थीं। प्रधानमंत्री ने नागरिकों से जहां संभव हो “वर्क फ्रॉम होम” अपनाने, ईंधन की खपत कम करने, एक साल तक विदेश यात्रा टालने, स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देने, खाने के तेल की खपत घटाने, प्राकृतिक खेती अपनाने और सोने की खरीद सीमित करने की अपील की थी।
आयात पर निर्भरता कम करने की अपील
प्रधानमंत्री ने आयात पर निर्भरता कम करने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा था कि हर परिवार को खाने के तेल की खपत घटानी चाहिए और प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ना चाहिए। ताकि विदेशी मुद्रा की बचत हो और पर्यावरण की रक्षा भी हो सके। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के आयात पर होने वाले भारी खर्च का जिक्र करते हुए किसानों से इनके इस्तेमाल को कम करने की अपील की।
ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव से निपटने के लिए प्रधानमंत्री ने लोगों से मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग करने, कार पूलिंग अपनाने, माल ढुलाई में रेलवे को प्राथमिकता देने और इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ाने का आग्रह किया। गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और होर्मुज जलमार्ग की नाकेबंदी के कारण वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया है। यह समुद्री मार्ग खाड़ी क्षेत्र के तेल व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया संकट के कारण उत्पन्न वैश्विक व्यवधानों को देखते हुए दूसरे दिन फिर खर्च में कटौती की अपील दोहराई और कोविड-काल की आदतें अपनाने को कहा। वडोदरा में सोमवार को देर रात एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने लोगों से ईंधन की खपत कम करने, सार्वजनिक परिवहन एवं इलेक्ट्रिक वाहनों का अधिक उपयोग करने और सोने की खरीद कुछ समय के लिए टालने की अपील की। इससे पहले गिर सोमनाथ में आयोजित सोमनाथ अमृत महोत्सव के दौरान उन्होंने 1998 के पोखरण परमाणु परीक्षण की याद दिलाते हुए कहा कि दुनिया की कोई भी ताकत भारत को झुका नहीं सकती या दबाव में नहीं ला सकती है। पूरी खबर पढ़ें…
